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यूहन्ना रचित सुसमाचार - ज्योती अंध्कार में चमकती है।

पवित्र शास्त्र में लिखे हुए यूहन्ना के सुसमाचार पर आधारित पाठ्यक्रम

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पहला भाग - दिव्य ज्योति चमकती है (यूहन्ना 1:1 - 4:54)
अ - प्रभु के वचन का यीशु में अवतारित होना (यूहन्ना 1:1-18)
1. अवतारित होने से पहले वचन का जौहर और काम (यूहन्ना 1:1-5)
2. बपतिस्मा देने वाला यूहन्ना, मसीह का रास्ता तैयार करता है (यूहन्ना 1:6-13)
3. मसीह के अवतारन में परमेश्वर की परिपूर्णता | (यूहन्ना 1:14-18)
ब - मसीह अपने चेलों को पश्चताप के घेरे से निकाल कर शादी की खुशी में ले जाते हैं (यूहन्ना 1:19 - 2:12)
1. यहुदियों के बड़े न्यायालय का प्रतिनिधी मंडल बपतिस्मा देने वाले यूहन्ना से प्रश्न पूछता है (यूहन्ना 1:19-28)
2. बपतिस्मा देने वाले यूहन्ना की मसीह के बारे में दिल हिलाने वाली गवाही (यूहन्ना 1:29-34)
3. पहले छे चेले (यूहन्ना 1:35-51)

4. काना में एक शादी के दौरान यीशु का पहला आश्चर्यकर्म (यूहन्ना 2:1-12)
क - मसीह का पहली बार यरूशलेम को चले आना (यूहन्ना 2:13-4:54) - सही उपासना क्या है?
1. मन्दिर की सफाई (यूहन्ना 2:13-22)
2. यीशु की निकुदेमुस से बात चीत (यूहन्ना 2:23 - 3:21)
अ) लोग यीशु की तरफ झुकते गये (यूहन्ना 2:23-25)

ब) नये जन्म की जरुरत (यूहन्ना 3:1-13)
क) क्रूस, नये जन्म का साधन (यूहन्ना 3:14-16)
ड) मसीह को अस्वीकार करना, दंड की और ले जाता है (यूहन्ना 3:17-21)
3. दूल्हे यीशु के बारे में बपतिस्मा देने वाले यूहन्ना की गवाही (यूहन्ना 3:22-36)

4. यीशु सामरिया में (यूहन्ना 4: 1-42)
अ) यीशु एक कुलटा को पश्यताप करने की प्रेरणा देते हैं (यूहन्ना 4:1-26)
ब) यीशु अपने चेलों को पकी हुई फसल दिखाते हैं (यूहन्ना 4:27-38)
क) यीशु सामरिया में (यूहन्ना 4:39-42)
5. एक अफसर के पुत्र का स्वस्थ होना (यूहन्ना 4:43-54)

दूसरा भाग - दिव्य ज्योती चमकती है (यूहन्ना 5:1-11:54)
1. बेतहसदा में एक अपाहिज का चंगा होना | (यूहन्ना 5:1-16)
2. परमेश्वर अपने पुत्र के साथ काम करता है (यूहन्ना 5: 17 - 20)
3. मसीह मृत्कों को जीवित करते हैं और संसार का न्याय करते हैं (यूहन्ना 5:20-30)
4. मसीह की दिव्यता क्वे विषय में चार गवाह (यूहन्ना 5:31-40)
5. विश्वास ना करने का कारण (यूहन्ना 5:41-47)

ब - यीशु जीवन की रोटी हैं (यूहन्ना 6:1-71)
1. पाँच हजार पुरुषों को खिलाना (यूहन्ना 6:1-13)
2. यीशु मुकुट धारण के लिये जनप्रदर्शन से पीछे हट जाते हैं (यूहन्ना 6:14-15)
3. संकट के समय यीशु का अपने चेलों के पास पहुंचना (यूहन्ना 6:16-21)
4. यीशु लोगों को चुनने का मौका देते हैं, “स्वीकार करो या ठुकराओ” (यूहन्ना 6:22-59)
5. चेलों का छोड़ कर चले जाना (यूहन्ना 6:59-71)

क - यीशु की यरूशलेम में अन्तिम यात्रा (यूहन्ना 7:1 - 11:54) अन्धकार का ज्योती से अलग होना
1. झोपड़ियों के पर्व के समय पर यीशु का वचन (यूहन्ना 7:1 - 8:59)
अ) यीशु और आपके भाई (यूहन्ना 7:1-13)
ब) लोगों और उच्च न्यायालय के सदस्यों के बीच यीशु के विषय में निराशा जनक विचार (यूहन्ना 7:14-53)

क) शास्त्री, व्यभिचार में पकड़ी गई एक स्त्री को यीशु को परखने के लिये आप के पास लाते हैं (यूहन्ना 8:1-11)
ड) यीशु जगत की ज्योती (यूहन्ना 8:12-29)
5) पाप गुलामी है (यूहन्ना 8:30-36)
6) शैतान हत्यारा और झूटा है (यूहन्ना 8:37-47)
ग) अब्राहम से पहले से यीशु उपस्थित हैं (यूहन्ना 8:48-59)

2. जन्म से अंधे व्यक्ती का स्वस्थ हो जाना (यूहन्ना 9:1-41)
अ) सब्बत के दिन स्वस्थ करना (यूहन्ना 9:1-12)
ब) यहूदियोंने उस चंगे व्यक्ती से प्रश्न पूछे (यूहन्ना 9:13-34)
क) यीशु उस चंगे व्यक्ती को बताते हैं कि आप परमेश्वर के पुत्र हैं (यूहन्ना 9:35-41)

3. यीशु अच्छा चरवाहा (यूहन्ना 10:1-39)
अ) भेड़ें सच्चे चरवाहे की आवाज़ पहचानती हैं (यूहन्ना 10:1-6)
ब) यीशु विश्वसनीय दरवाज़ा हैं (यूहन्ना 10:7-10)
स) यीशु ही अच्छा चरवाहा हैं (यूहन्ना 10:11-21)
डी) पिता और पुत्र की एकता में हमारी सुरक्षा (यूहन्ना 10:22-30)
ई) परमेश्वर का पुत्र, पिता में और पिता उस में (यूहन्ना 10:31-36)

4. लाज़र का जिलाया जाना और उसका परिणाम (यूहन्ना 10:40 - 11:54)
अ) यीशु का यरदन के पार प्रयास (यूहन्ना 10:40 - 11:16)
2) यीशु का मार्था और मरियम से मिलना (यूहन्ना 11:17-33)
3) लाज़र का मृतकों में से जी उठाना (यूहन्ना 11:34-44)
डी) यहूदियों की अदालत यीशु को मृत्यु दंड की सज़ा सुनाती है (यूहन्ना 11:45-54)

तीसरा भाग - प्रेरितों के दल में ज्योती चमकती है (यूहन्ना 11:55 - 17:26)
अ - पवित्र सप्ताह की शुरुआत (यूहन्ना 11:55 - 12:50)
1. यीशु का बैत निय्याह में अभिषेक किया जाना (यूहन्ना 11:55 - 12:8)
2. यीशु यरूशलेम में प्रवेश करते हैं (यूहन्ना 12:9-19)
3. यूनानीयों की यीशु से मिलने की इच्छा (यूहन्ना 12:20-26)
4. हंगामे के बीच में पिता का महिमा पाना (यूहन्ना 12:27-36)
5. लोग न्याय की ओर अपने दिल कठोर कर लेते हैं (यूहन्ना 12:37-50)

ब - प्रभु भोज के बाद होने वाली घटनायें (यूहन्ना 13:1-38)
1. मसीह का अपने चेलों के पांव धोना (यूहन्ना 13:1-17)
2. विश्वासघाती का रहस्य खुल गया और वो चिंतित हुआ (यूहन्ना 13:18-32)
3. कलीसिया के लिये नया आदेश (यूहन्ना 13:33-35)

4. मसीह, पतरस के इनकार की भविष्यवाणी करते हैं (यूहन्ना 13:36-38)
स - ऊपर के कमरे में बिदाई का प्रवचन (यूहन्ना 14:1-31)
1. परमेश्वर मसीह में है | (यूहन्ना 14:1-11)
2. सहायक (पवित्र आत्मा) के द्वारा विश्वासियों के ऊपर पवित्र त्रिय का उतरना (यूहन्ना 14:12-25)
3. मसीह की बिदाई की शांति (यूहन्ना 14:26-31)

द - गैतसमनी के मार्ग पर बिदाई (यूहन्ना 15:1 - 16:33)
1. मसीह में बने रहने से बहुत फल आता है (यूहन्ना 15:1-8)
2. हमारे स्वर्गीय पिता की संगती में बने रहने से हमारा आपस का प्रेम स्पष्ट होता है (यूहन्ना 15:9-17)
3. दुनिया मसीह और आप के चेलों से घ्रणा करती है(यूहन्ना 15:18 - 16:3)

4. पवित्र आत्मा इतिहास की सर्वोच्च महत्वपूर्ण घटनायें घोषित करता है (यूहन्ना 16:4-15)
5. पुनरुत्थान के पर्व के समय पर मसीह चेलों के आनंद की भविष्यवाणी करते हैं (यूहन्ना 16:16-24)
6. हम में पाई जाने वाली मसीह की शांति दुनिया की यातनाओं को पराजीत करती हैं (यूहन्ना 16:25-33)

इ - यीशु की मध्यस्थयी प्रार्थना (यूहन्ना 17:1-26)
1. मध्यस्थी /सिफारशी प्रार्थना का परिचय
2. पिता की महिमा के लिये प्रार्थना (यूहन्ना 17:1-5)
3. यीशु अपने चेलों के लिये प्रार्थना करते हैं (यूहन्ना 17:6-19)
4. यीशु कलीसिया की एकता के लिये प्रार्थना करते हैं (यूहन्ना 17:20-26)

चौथा भाग - ज्योति अन्धकार पर विजय पाती है (यूहन्ना 18:1 - 21:25)
अ - गिरिफ्तारी से गाड़े जाने तक की घटनायें (यूहन्ना 18:1 - 19:42)
1. यीशु की बाग में गिरिफ्तारी (यूहन्ना 18:1-14)
2. यीशु की हन्ना के सामने पेशी और पतरस का तीन बार इनकार करना (यूहन्ना 18:15-21)
3. राष्ट्र के न्यायालय में रोमी गव्हर्नर के सामने यीशु की पेशी (यूहन्ना 18:28 - 19:16)
अ) मसीह के राजसी दावों के विरुद्ध दोषारोपण (यूहन्ना 18:28-38)
ब) यीशु और बरअब्बा में से किसी एक का चुना जाना (यूहन्ना 18:39-40)

क) अपराधी ठहराने वालों के सामने यीशु को कोड़े लगाया जाना (यूहन्ना 19:1-5)
डी) मसीह के दिव्य स्वभाव से पिलातुस आश्चर्यचकित हुआ (यूहन्ना 19:6-12)
5) पिलातुस का यीशु पर अन्यायी दंड का आदेश (यूहन्ना 19:12-16)
4. क्रूस और यीशु की मृत्यु (यूहन्ना 19:16-42)
अ) क्रूस पर लटकाया जाना और कबर के कपड़े (यूहन्ना 19:16ब-22)
ब) कपड़ों का बांटना और चिठ्ठी डालना (यूहन्ना 19:23-24)
क) मसीह का अपनी माँ को सम्बोधित करना (यूहन्ना 19:25-27)
डी) पूरा होना (यूहन्ना 19:28-30)
5) यीशु की पसली का छेदा जाना (यूहन्ना 19:31-37)
6) यीशु का गाड़ा जाना (यूहन्ना 19:38-42)

ब - मसीह का पुनरुत्थान और दर्शन देना (यूहन्ना 20:1 - 21:25)
1. फसह के प्रात: काल की घटनायें (ईस्टर) (यूहन्ना 20:1-10)
अ) मरियम मगदलीनी का कब्र के पास आना (यूहन्ना 20:1-2)
ब) पतरस और यूहन्ना कब्र की ओर दौड पड़े (यूहन्ना 20:3-10)
क) यीशु मरियम मगदलीनी को दिखाई देते हैं (यूहन्ना 20:11-18)
2. यीशु ऊपर के कमरे में चेलों पर प्रगट होते हैं (यूहन्ना 20:19-23)
3. थोमा की उपस्थिति में यीशु का चेलों पर प्रगट होना (यूहन्ना 20:24-29)
4. यूहन्ना के सुसमाचार का अन्त (यूहन्ना 20:30-31)

5. यीशु झील के किनारे पर प्रगट होते हैं (यूहन्ना 21:1-25)
अ) मछलियों का आश्चर्यजनक पकड़ा जाना (यूहन्ना 21:1-14)
ब) पतरस की समूह की सेवा के लिये नियुक्ति (यूहन्ना 21:15-19)
क) यीशु की भविष्यवाणियां (यूहन्ना 21:20-23)
डी) यूहन्ना की गवाही और उन का सुसमाचार (यूहन्ना 21:24-25)

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