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यूहन्ना रचित सुसमाचार – ज्योती अंध्कार में चमकती है।
पवित्र शास्त्र में लिखे हुए यूहन्ना के सुसमाचार पर आधारित पाठ्यक्रम
चौथा भाग - ज्योति अन्धकार पर विजय पाती है (यूहन्ना 18:1 - 21:25)
ब - मसीह का पुनरुत्थान और दर्शन देना (यूहन्ना 20:1 - 21:25)

2. यीशु ऊपर के कमरे में चेलों पर प्रगट होते हैं (यूहन्ना 20:19-23)


यूहन्ना 20:20
“20 और यह कह कर उस ने अपना हाथ और अपना पंजर उन को दिखाए | तब चेले प्रभु को देख कर आनन्दित हुए |”

यीशु का पुनरुत्थान यह सिद्ध करता है कि परमेश्वर के साथ मिलाप हो चुका है | परमेश्वर ने अपने पुत्र को कब्र में नहीं छोड़ा, न ही उस ने आप को हमारे पापों के कारण निकाल दिया जो आप ने उठाये | उस ने आप का दोषरहित बलिदान स्विकार किया, और आप कब्र पर विजय पाकर उठ खड़े हुए और अपने पिता के साथ पूर्ण प्रीतिभाव के साथ जीते रहे | इस के अतिरिक्त, आप ने केवल अपने पिता की इच्छा पूरी करने के लिये क्रूस की मृत्यु स्विकार की | आप के आने का उद्देश क्रूस था और वही दुनिया का उद्धार करने का साधन है | फिर कुछ लोग यह कैसे कहते हैं कि यीशु ने क्रूस पर अपने प्राण नहीं दिये ?

मसीह ने बताया कि आप कोई भूत या गुप्त आत्मा न थे | आप ने अपने चेलों को अपनी हथेली में पड़े हुए कीलों के निशान बताये | आप ने अपनी पसली बताई ताकि वे उस भाले का निशान देखें जिस से आप को छेदा गया था | उन्हों ने कीलों के निशान देखे और विश्वास किया कि वह व्यक्ति जो उन के सामने खड़ा है कोई अजनबी परमेश्वर जैसा नहीं है बल्कि मसीह ही हैं जिन्हें क्रूस पर चढ़ाया गया था | परमेश्वर का मेमना विजेता है | जिसे क्रूस पर चढ़ाया गया वह मृत्यु पर विजय पा गया |

धीरे धीरे चेलों को विश्वास हो गया कि यीशु कोई भूत या छाया नहीं हैं बल्कि एक असली व्यक्ति उन के बीच में उपस्थित है | आप के अस्तित्व के नये रूप ने उन्हें आनन्दित किया | हमारे लिये यही अच्छा है कि हम विश्वास करें और महसूस करें कि यीशु जीवित प्रभु हैं जो मृतकों में से जी उठे | हम त्याग दिये हुए अनाथ नहीं हैं | हमारे भाई (यीशु) अपने पिता और पवित्र आत्मा की एकता के साथ विश्व पर राज कर रहें हैं |

मसीह ने मृत्यु पर पाई हुई विजय के कारण चेलों का आनन्द और भी बढ़ गया | तब से आप हमारे लिये जिन का नाश हो रहा है, जीवित आशा बन गये | खुली कब्र हमारा अन्त नहीं है परन्तु आप का जीवन हमारा है | जैसा कि महिमा के योग्य मसीह ने कहा, “पुनरुत्थान और जीवन मैं हूँ, जो मुझ पर विश्वास करे वह यदि मर भी जाए तौ भी जियेगा | और जो कोई जीता और मुझ पर विश्वास करता है वह कभी न मरेगा |”

जब चेलों को विश्वास हो गया कि यीशु पापों की क्षमा करते हैं तो वे और भी आनन्दित हो गये | आप हमें विश्वास दिलाते हैं कि आप ने हमारे पापों का प्रायश्चित किया है | इस लिये आप के घाव के द्वारा हमें परमेश्वर के साथ शान्ति प्राप्त हुई है |

क्या तुम ईस्टर के दिन उन के आनन्द में सहभागी होते हो ? क्या तुम जी उठे हुए मसीह के सामने नमन करते हो क्योंकि आप उपस्थित हैं, तुम्हें आशा प्रदान करते हैं और तुम्हारी क्षमा का आश्वासन देते हैं ? यीशु जीवित हैं और आनन्द हमारे भाग में आया है | इसलिये प्रेरित पौलुस कलीसिया से इस प्रकार सम्बोधित होते हैं , “प्रभु में सदा आनन्दित रहो; मैं फिर कहता हूँ, आनन्दित रहो | तुम्हारी कोमलता सब मनुष्यों पर प्रगट हो | प्रभु निकट है |” (फिलिप्पियों 4:4-5) |

प्रार्थना: प्रभु यीशु, हम आनन्दित हो कर आप का धन्यवाद करते हैं क्योंकि केवल आप ही हमारी आशा हैं और आप ही ने हमारे जीवन को अर्थ पूर्ण बनाया | आप के घाव ने हमें धार्मिक ठहराया और आप का व्यक्तित्व हमें जीवन देता है | आप का राज आये और आप की विजय साकार हो ताकि अनेक लोग पाप की मृत्यु से जी उठें और आप के पुनरुत्थान की महिमा के लिये जीयें |

प्रश्न:

124. चेले प्रसन्न क्यों हुए ?

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