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यूहन्ना रचित सुसमाचार – ज्योती अंध्कार में चमकती है।
पवित्र शास्त्र में लिखे हुए यूहन्ना के सुसमाचार पर आधारित पाठ्यक्रम
तीसरा भाग - प्रेरितों के दल में ज्योती चमकती है (यूहन्ना 11:55 - 17:26)
अ - पवित्र सप्ताह की शुरुआत (यूहन्ना 11:55 - 12:50)

2. यीशु यरूशलेम में प्रवेश करते हैं (यूहन्ना 12:9–19)


यूहन्ना 12:9-11
“ 9 जब यहूदियों की बड़ी भीड़ जान गई कि वह वहाँ है,तो वे केवल यीशु के कारण आए परन्तु इसलिये भी कि लाज़र कोदेखें, जिसे उसने मरे हुओं में से जिलाया था | 10 तब प्रधान याजकों ने लाज़र को भी मार डालने का षडयन्त्र रचा | 11 क्योंकि उसके कारण बहुत से यहूदी चले गए और यीशु पर विश्वास किया |

जब यह खबर फैल गई कि यीशु लाज़र के घर गए थे तो राजधानी में अशांतता फैल गई | भीड़ यरूशलेम से जैतून के पहाड़ और बैतनिय्याह की ओर जीवन प्रदान करने वाला आश्चर्यकर्म देखने के लिये चल पड़ी |

जो भी हो सदूकी पुनरुत्थान और आत्माओं के अस्तित्व पर विश्वास नहीं करते फिर भी महायाजक उन की ओर झुक गए | फिर भी वे यीशु और लाज़र से घ्रणा करते थे, यहाँ तक कि उन्होंने न केवल आश्चर्यकर्म को ठुकराया बल्कि आश्चर्यकर्म करने वाले को भी मार डालना चाहते थे और उन दोनों को कबर में लिटाना चाहते थे ताकि यह सिद्ध करें कि मरने के बाद कोई आशा नहीं होती | साथ ही साथ वह यीशु के आन्दोलन पर से लोगों का विश्वास हटाना चाहते थे क्योंकि भीड़ यह समझती थी कि लाज़र का जिलाया जाना इस बात का सबूत था कि यीशु निश्चित मसीह थे |

यूहन्ना 12:12-13
“ 12 दूसरे दिन बहुत से लोगों ने जो पर्व में आए थे यह सुना कि यीशु यरूशलेम में आ रहा है | 13 इसलिये उन्होंने खजूर की डालियाँ लीं और उससे भेंट करने को निकले, और पुकारने लगे, ‘होशाना ! धन्य इस्राएल का राजा, जो प्रभु के नाम से आता है |’”

यीशु का नाम हर जबान पर था और वे अटकल लगा रहे थे कि आप क्या करेंगे, “क्या आप भाग जायेंगे या शहर पर कब्ज़ा कर लेंगे ? बैतनिय्याह में रात बिताने के बाद लोगों ने आप को अपने चेलों के साथ यरूशलेम आते हुए देखा,”नया राजा आ रहा है,दिव्य राजा आ रहा है |” कई लोग नए आश्चर्यकर्म और विजय देखने के लिये खड़े हुए | कुछ लोगों ने खजूर की डालियाँ काट कर आप का स्वागत करने के लिये ले गए | दूसरों ने ऐसे गीत गाये जो राजाओं और नायकों के आगमन पर गाये जाते हैं |उन्होंने ऊँची आवाज में जयजयकार किया: “हम आपकी प्रशंसा और स्तुति करते हैं | आप सर्वशक्तिमान हैं और प्रभु के नाम में और उसके अधिकार से परिपूर्ण हो कर आए हैं | आप जो आशीष ले कर आए हैं उसके लिये हम आप का धन्यवाद करते हैं | आप हमारी सहायता कीजिये और हमें लज्जा से बचाईये | आप हमारे मुक्तिदाता, नायक और नेता हैं | आप हमारे सच्चे राजा हैं |

यूहन्ना 12:14-16
“ 14 जब यीशु को गदहे का एक बच्चा मिला; तो वह उस पर बैठ गया,जैसा लिखा है, 15 “:हे सिय्योन की बेटी, मत डर; देख,तेरा राजा गदहे के बच्चे पर चढ़ा हुआ चला आता है \’ 16 उसके चेले ये बातें पहले न समझे थे, परन्तु जब यीशु की महिमा प्रगट हुई तो उनको स्मरण आया कि ये बातें उसके विषय में लिखी हुई थीं और लोगों ने उस समय इसी प्रकार का व्यवहार किया था |”

यीशु ने इस प्रशंसा का कोई उत्तर नहीं दिया क्योंकि आप जानते थे कि जब लोग कोलाहल मचाते हैं तब वो न साफ तरह से सुन सकते हैं न सोच सकते हैं बल्कि गलियों और कूचों मे धक्कम धक्का करते हुए चिल्लाते निकलते और जयजयकार करते हुए निकलते हैं | इसलिये यीशु ने उनसे अपनी आँखों के द्वारा बातें कीं और उनके गीतों के अनुसार गदहे पर सवार होकर मानो यह कहा: “मैं राजा हूँ जिस की जकर्याह 9:9 में प्रतिज्ञा की गई है | डरो नहीं बल्कि खुशी मनाओ | मैं शहरों के फाटक और दीवारें नहीं तोड़ता | मैं किसी को क़त्ल नहीं करता और न परमेश्वर की ओर से न्याय करता हूँ | मेरा न्याय सच्चा है और में किसी का पक्षपात नहीं करता | और अनाथों का न्याय करता हूँ और विध्वाओं की चिन्ता करता हूँ |

दुख इस बात का है कि सब लोग निष्पक्ष नहीं होते | अधिकतर लोग अन्यायपूर्ण होते हैं और सरल मार्ग से भटक जाते हैं | डरो नहीं, मैंतुम्हें नष्ट न करूँगा जैसे कि तुम्हारे साथ किया जाना चाहिये बल्कि तुम्हारे अन्दर पाई जाने वाली दुष्टता को पराजीत करूँगा | मैं तुम्हारे पाप अपने शरीर में उठा लुंगा | यदपि मैं विजेता हूँ तौ भी उसी समय निर्बल और पराजीत हो चूका हुआ दिखाई देता हूँ |” इस तरह मैं तुम्हें परमेश्वर के क्रोध से बचा लुंगा; आप आत्मिक लड़ाई में विजयी हुवे थे |

तुम एक सूरमा राजा चाहते हो जो केवल तलवार से विजय प्राप्त करता है | परन्तु मैं मेंमने के समान नम्र बन कर आया हूँ जिसमें कोई उग्रता नहीं | मैं ने अपनी इच्छा अपने पिता को सौंप दी है | तुम बगावत और विजय की अपेक्षा करते थे परन्तु मैं तुम्हें परमेश्वर के साथ मेल मिलाप,उद्धार शान्ति प्रदान करता हूँ | इस प्राणी की ओर देखो जिस पर मैं सवारी कर रहा हूँ | मैं घोड़े या ऊंट पर नहीं बल्कि गदहे पर सवार हूँ | मुझ से धन या सम्मान की अपेक्षा न करो क्योंकि मैं अनन्त जीवन लेकर आया हूँ और तुम्हारे लिये स्वर्ग के दरवाजे खोलता हूँ और इस तरह पश्चताप करने वाले का परमेश्वर से मिलाप कराता हूँ |

परन्तु वह भीड़ जिसमें चेले भी थे,यीशु के इस दृष्टांत का उद्देश न समझ पाये | आप के आस्मान पर परायण करने के बाद पवित्र आत्मा ने उनके मन खोले जिस के कारण वे मसीह की नम्रता और आप में परमेश्वर की महिमा समझ पाये |यह पूर्णत: मनुष्यों की राजनीतिक और भौतिक अभिलाषा के विरुध था | परन्तु पवित्र आत्मा ने इस से पहले कि मसीह के अनुयायी इस दृष्टान्त का अर्थ समझते और उसे पूरा होते हुए देखते, उन्हें आप के आगमन पर प्रशंसा करने और आनन्दित होने की प्रेरणा दी |

यूहन्ना 12:17-19
“ 17 तब भीड़ के उन लोगों ने गवाही दी, जो उस समय उस के साथ थे जब उसने लाज़र को कब्र में से बुलाकर मरे हुओं में से जिलाया था | 18 इसी कारण लोग उससे भेंट करने को आए थे क्योंकि उन्होंने सुना था कि उसने यह आश्चर्यकर्म दिखाया है | 19 तब फरीसियों ने आपस में कहा, ‘सोचो तो सही कि तुम से कुछ नहीं बन पड़ता | देखो,संसार उसके पीछे हो चला है |”

जो लोग यीशु के साथ बैतनिय्याह से निकले थे वो उस जुलूस से जो राजधानी से यीशु का स्वागत करने के लिये आ रहा था किद्रोन की घाटी में मिले | आप के साथियों ने ऊँची आवाज में कहा,”तुम ठीक कर रहे हो, जो यीशु का स्वागत करने आए हो क्योंकि आप ही मसीह हैं जिन्हों ने एक मरे हुए व्यक्ती को जिला कर अपने मसीह होने का सबूत दिया |” लाज़र का जिलाया जाना उस भीड़ के लिये वैसा ही ज्ञानप्रद था जैसा उस भीड़ के लिये था जो 5000 लोगों को 5 रोटीयों से पेट भर कर खाना खिलाने के बाद आप के पीछे हो ली थी | यहाँ दूसरी भीड़ थी जो आप के पीछे चली थी क्योंकि आप ने एक मरे हुए व्यक्ति को जिलाया था | दोनों घटनाओं में यीशु के लिये लोगों का प्रेम, धार्मिकता और पश्चताप पर नहीं परन्तु सांसारिक परिस्थितियों पर आधारित था |

प्रशंसा करने वाली भीड़ के साथ फरीसी और लोगों के नेता गुस्से में खड़े थे और यीशु से ईर्ष्या कर रहे थे और आप के शहर में प्रवेश करने की प्रतीक्षा कर रहे थे | वो काँप रहे थे और अपनी पराजय को स्वीकार कर रहे थे | यीशु को चुपके से उनके स्वाधीन करने का शर्यंत यशस्वी नहीं हुआ | आप ने विजयी जुलूस में सवारी करते हुए शहर मेंप्रवेश किया |

प्रार्थना : प्रभु यीशु, मैं अपना दिल और दिमाग आप के लिये खोल देता हूँ ताकि आप अपनी पवित्र आत्मा के द्वारा उस में प्रवेश करें और मुझ में ऐसा परिवर्तन लाएं जो आपके स्वरूप के अनुसार हो | मेरे पापों को क्षमा कीजिये क्योंकि मैं इस योग्य नहीं कि आप मेरे दिल मेंप्रवेश करें | परन्तु मेरे पापी होने पर भी आप दिल में आ जाते हैं | आप मुझ से प्रेम करते हैं और मेरा उद्धार करते हैं क्योंकि आप ने परमेश्वर से मेरा मिलाप करवाया है और मुझे आप की शांती के राज्य में लाया है | मैं उन सब लोगों के साथ उच्च स्वर में बोलता हूँ: “होशाना, धन्य है वो जो प्रभु के नाम से आता है |” आप मेरे राजा हैं, मैं आप की संपत्ति हूँ | आमीन |

प्रश्न:

81. यीशु का यरूशलेम में प्रवेश क्या जाहीर करता है?

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