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यूहन्ना रचित सुसमाचार – ज्योती अंध्कार में चमकती है।
पवित्र शास्त्र में लिखे हुए यूहन्ना के सुसमाचार पर आधारित पाठ्यक्रम

पहला भाग – दिव्य ज्योति चमकती है (यूहन्ना 1:1 - 4:54)
ब - मसीह अपने चेलों को पश्चताप के घेरे से निकाल कर शादी की खुशी में ले जाते हैं (यूहन्ना 1:19 - 2:12)

4 - काना में एक शादी के दौरान यीशु का पहला आश्चर्यकर्म (यूहन्ना 2:1-12)


यूहन्ना 2:1-10
“1 फिर तीसरे दिन गलील के काना में किसी का ब्याह था, और यीशु की माता भी वहाँ थी | 2 और यीशु और उसके चेले भी उस ब्याह में नेवते गए थे | 3 जब दाखरस घट गया, तो यीशु की माता नेउस से कहा, कि उन के पास दाखरस नहीं रहा | 4 यीशु ने उससे कहा, हे महिला मुझे तुझ से क्या काम ? अभी मेरा समय नहीं आया | 5 उसकी माता ने सेवकों से कहा, जो कुछ वह तुम से कहे, वही करना | 6 वहां यहूदियों के शुद्ध करने की रीति के अनुसार पत्थर के छ: मटके धरे थे, जिन में दो दो, तीन तीन मन समाता था | 7 यीशु ने उन से कहा, मटकों में पानी भर दो : सो उन्हों ने उन्हें मुंहामुंह भर दिया | 8 तब उस ने उन से कहा, अब निकालकर भोज के प्रधान के पास ले जाओ | 9 वे ले गए. जब भोज के प्रधान ने वह पानी चखा, जो दाखरस बन गया था , और नहीं जानता था, कि वह कहां से आया है, (परन्तु जिन सेवकों ने पानी निकाला था, वे जानते थे ) तो भोज के प्रधान ने दुल्हे को बुलाकर उस से कहा | 10 हर एक मनुष्य पाहिले अच्छा दाखरस देता है और जब लोग पीकर छक जाते हैं, तब मध्यम देता है; परन्तु तू ने अच्छा दाखरस अब तक रख छोड़ा है |”

यीशु अपने चेलों को यर्दन नदी की घाटी में बपतिस्मा देने वाले यूहन्ना की पश्चताप की घाटी से निकाल कर गलील की पहाड़ियों में एक शादी के समारोह का आनंद लेने के लिये ले गये | सौ किलोमीटर की यह यात्रा दो नियमों में बुनयादी परिवर्तन की ओर हमारा ध्यान आकर्षित करती है | अब विश्वासी व्यवस्था की छाया में नहीं बल्की यीशु के साथ, जो ऊगते हुए सूरज की तरह उज्वलित और शान्ती देने वाले हैं, धार्मिकता की खुशी में रहेंगे |

यीशु बपतिस्मा देने वाले यूहन्ना की तरह सन्यासी नहीं थे | इस कारण मसीह का अपने चेलों के साथ किसी साधारण समारोह में जाना, अपने आप में एक आश्चर्यकर्म है | आपने शराब पीना मना नहीं किया क्योंकि आपकी शिक्षा के अनुसार जो चीज़ मनुष्य के अन्दर जाती है, उसे अपवित्र नहीं करती बल्की जो अपवित्र विचार उसके दिल से निकलते हैं वही उसको अपवित्र कर देते हैं | यीशु ने सन्यास और तपस्या को अस्विकार नहीं किया बल्की यह सिखाया की इस तरह की जिंदगी कम उपयोगी होती है | हमारे भ्रष्ट दिलों को नये चरित्र और नये जन्म की ज़रुरत है | पवित्र शास्त्र सिर्फ ज़्यादा शराब पीने की अनुमती नहीं देता |

चेले यीशु के साथ समारोह में भाग लेने के लिये रवाना हुए जब की नतनएल खुद काना का नागरिक था (यूहन्ना 21:2) | ऐसा लगता है कि यीशु की मां दुल्हे के घराने को जानती थीं और यह भी पूर्वधारणा थी कि उनके पति युसूफ की मृत्यु हो चुकी थी | मरियम विधवा हो चुकी थीं | और यीशु पह्लौटे की हैसियत से घराने की ज़िम्मेदारी संभाल रहे थे |

इस प्रकार अपने रिश्तेदारों की ज़रूरत पूरी करने की गरज़ से मरियम ने मसीह से सहायता माँगी | यर्दन से वापस आने के बाद मसीह साधारण व्यक्ती नहीं रहे बल्की पवित्र आत्मा ने आप में ऐसी बदलाहट लाई थी जिस से अब आप दुनियावी ज़िम्मेदारियों से अलग हो कर परमेश्वर की सेवा में लग गये | यह एक ऐसा चरित्र था जिसके पीछे आपके चेलों को चलना था |

मरियम को अपने बेटे पर विश्वास था, क्योंकी वे आपकी चिंता और प्रेम को जानती थीं | मरियम के प्रेम ने यीशु के हाथों से पहला आश्चर्यकर्म करवाया | मसीह के प्रेम में विश्वास करने से परमेश्वर का हाथ गती में आ जाता है | आप की मां ने सेवकों से कहा “ जो कुछ वो तुम से कहे, कर देना |” उन्हें विश्वास था कि किसी ना किसी तरह आप ज़रूर सहायता करेंगे | सेवकों को उनके कहे गये शब्द, “जो कुछ वो तुम से कहे, कर देना,” सारी कलीसियाओं के लिये नीतिवाक्य बन गये | इस कारण सिर्फ मसीह की आज्ञा का पालन करो | मसीह के वचन के पालन से बहुत से आश्चर्यकर्म होते हैं |

वहाँ यहूदियों की रीती के अनुसार शुद्धिकरण करने के लिये बड़े बड़े खाली मटके रखे हुए थे जिन में 600 लीटर पानी समाता था. उन्हें पानी से भर दिया गया | इस का मतलब यह हुआ कि महमानों ने शुद्धिकरण के लिये काफी मात्रा में पानी का प्रयोग किया था | यीशु कि उपस्थिती में एक अलग तरह के शुद्धीकरण की आवश्कता होती है | जब तक कोई व्यक्ती हर तरह से पवित्र ना हो, मेमने की शादी में सहभागी नहीं हो सकता |

परन्तु पवित्रता मसीह की तुरन्त चिन्ता नहीं थी | शादी का समारोह चालु रहना था | यीशु ने बड़ी शान्ति के साथ शुद्धीकरण के पानी को उत्तम मीठे दाखरस में बदल दिया | हम नहीं जानते कि यह कैसे किया गया लेकिन इस घटना से हम इतना जानते हैं कि मेमने की शादी में सहभागी होने के लिये, सभी लोगों के लिये आप का बहाया हुआ खून काफी है | इस पर मदहोशी का प्रभाव नहीं पड़ता | पवित्र आत्मा मदहोश के आचरण की आज्ञा नहीं देती | परन्तु भरपूर मात्रा में उपलब्ध की हुई दाखरस इस बात का चिन्ह है कि मानव जाती के पापों की क्षमा के लिये मसीह की क्षमा भी असीमित है | क्या ही अच्छा होता जो उन आस्मानी खुशियों में सब लोग हिस्सा लेते ! सब धन्यवाद करते हुए प्रभु भोज में रोटी और दाखरस प्राप्त करते जो मसीह की उपस्थिती का चिन्ह है – जहां हम आपकी खुशियों में शामिल होकर क्षमा प्राप्त करते हैं |

यूहन्ना 2:11-12
“11 यीशु ने गलील के काना में अपना यह पहिला चिन्ह दिखाकर अपनी महिमा प्रगट की और उसके चेलों ने उस पर विश्वास किया | 12 इस के बाद वह और उस की माता और उस के भाई और उस के चेले कफरनहूम को गए और वहां कुछ दिन रहे ||”

चेले यीशु की उत्पन्न करने की क्षमता देख कर हैरान थे और उन्हों ने महसूस किया कि आप प्राक्रतिक असाधारण घटना पर अधिकार रखते हैं | उन्हों ने आपकी महिमा देखी और विश्वास किया कि आप को परमेश्वर ने भेजा है | इस कारण वे आप पर भरोसा करने लगे | विश्वास बढ़ने के लिये समय, और आज्ञाकारी बनने के लिये समझ की ज़रूरत होती है | अगर तुम यीशु के कामों का अध्ययन करोगे और आपकी शिक्षा की गहराई तक पहुंचने की कोशिश करोगे तो तुम्हें आपके व्यक्तित्व की महानता का अनुभव होगा |

यीशु ने अपने परिवार से नाता तोड़ दिया और सांसारिक कर्तव्यों से मुक्त हो कर परमेश्वर की सेवा में लग गये; लेकिन अपनी मां और भाईयों से आपका रिश्ता बना रहा | कुछ समय तक वो आपके चेलों के साथ यात्रा करते रहे | आपके भाई आप के साथ कफरनहूंम गये जो ताय्बेरियस झील के किनारे बसा हुआ मुख्य शहर था | चेले खुद आप पर विश्वास करते थे, इस लिये नहीं की काना में आप ने आश्चर्यकर्म दिखाया था, बल्की वे हमेशा के लिये आप से जुड़े रहे |

प्रार्थना: प्रभु यीशु हम आपका धन्यवाद करते हैं कि आपने हमें शादी का न्योता दिया और आपकी संगती की खुशियों में शामिल किया | हमारे पापों को क्षमा कीजिये और आपकी पवित्र आत्मा से हमें परिपूर्ण कीजिये | हम आपके पीछे चलेंगे और धार्मिकता और शुद्धता में जीवित रहेंगे, ठीक उसी तरह जैसे आपने किया और बहुतों के लिये अपने प्राण दे दिये |

प्रश्न:

24. यीशु अपने चेलों को शादी में क्यों ले गये?

प्रश्नावली - भाग 1

प्रिय पढ़ने वाले भाई,
अगर तुम हमें इन 24 में से 20 प्रश्नों के सही उत्तर लिख कर भेजोगे तो हम तुम्हें इस अध्ययन माला का अगला भाग भेज देंगे |

1. इस चौथे सुसमाचार का लेखक कौन है?
2. चौथे सुसमाचार और पहले तीन सुसमाचारों के बीच में क्या सम्बन्ध है?
3. यूहन्ना के सुसमाचार का क्या उद्देश है?
4. यह अनोखा सुसमाचार किस के लिए लिखा गया था?
5. इस सुसमाचार की विषयों के अनुसार सूची बनाना कैसे मुमकिन हो सकता है?
6. यूहन्ना के सुसमाचार के पहले वचन में कौन सा शब्द बार बार दुहराया गया है और उसका अर्थ क्या है?
7. यीशु के वे छ गुण क्या हैं जिन्हें यूहन्ना ने अपने सुसमाचार के शुरू में प्रदर्शित किया है?
8. आत्मिक दृष्टी से ज्योती और अन्धकार में क्या असमानता है?
9. यूहन्ना बपतिस्मा देने वाले की सेवा के मुख्य उद्देश क्या हैं?
10. मसीह की ज्योती और अन्धकार की दुनिया के बीच क्या सम्बंध है?
11. मसीह को स्वीकार करने वालों को क्या अनुभव होता है?
12. यीशु के अवतारण का क्या मतलब है?
13. मसीह की परिपूर्णता का क्या अर्थ है?
14. मसीह दुनिया में कौनसा नया विचार ले कर आये ?
15. यहुदियों के बड़े न्यायालय के प्रतिनिधी मंडल के पूछे हुए प्रश्नों का उद्देश क्या है?
16. बपतिस्मा देने वाले यूहन्ना ने प्रभु का मार्ग तैयार करने के लिये लोगों को किस तरह प्रवृत किया?
17. बपतिस्मा देने वाले यूहन्ना ने यहूदियों की अदालत के प्रतिनिधियों के सामने मसीह के विषय में दी हुई गवाही का शिखर क्या है?
18. “परमेश्वर के मेम्ने” का क्या अर्थ है?
19. यीशु पवित्र आत्मा प्रदान करने वाले क्यों बने ?
20. यूहन्ना के दो चेले यीशु के पीछे क्यों हो लिए?
21. पहले चेलों ने यीशु के नाम को कैसे घोषित किया?
22. पहले चेलों ने लोगों में मसीह के नाम की घोषणा कैसे की ?
23. “परमेश्वर के पुत्र” और “मनुष्य के पुत्र” इन दो उपाधियों में क्या संबंध है ?
24. यीशु अपने चेलों को शादी में क्यों ले गये?

अपना नाम और पता साफ़ अक्षरों में लिख कर अपने उत्तरों के साथ इस पते पर भेजिये |

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