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यूहन्ना रचित सुसमाचार – ज्योती अंध्कार में चमकती है।
पवित्र शास्त्र में लिखे हुए यूहन्ना के सुसमाचार पर आधारित पाठ्यक्रम
चौथा भाग - ज्योति अन्धकार पर विजय पाती है (यूहन्ना 18:1 - 21:25)
ब - मसीह का पुनरुत्थान और दर्शन देना (यूहन्ना 20:1 - 21:25)
1. फसह के प्रात: काल की घटनायें (ईस्टर) (यूहन्ना 20:1-10)

क) यीशु मरियम मगदलीनी को दिखाई देते हैं (यूहन्ना 20:11-18)


यूहन्ना 20:11-13
“11 परन्तु मरियम रोती हुई कब्र के पास ही बाहर खड़ी रही, और रोते-रोते कब्र की ओर झुक कर 12 दो स्वर्गदूतों को उज्वल कपड़े पहिने हुए एक को सिरहाने और दूसरे को पैताने बैठा देखा, जहाँ यीशु का शव रखा गया था | 13 उन्हों ने उस से कहा, ‘हे नारी, तू क्यों रोती है?’ उस ने उन से कहा, ‘वे मेरे प्रभु को उठा ले गए और मैं नहीं जानती कि उसे कहाँ रखा है |’”

यह जानने के बाद कि कब्र खाली थी, वे दो चेले वापस लौटे | वहाँ रुके रहने में कोई लाभ न था |

तथापि मरियम मगदलीनी चेलों को खाली कब्र की सूचना देकर कब्र पर वापस लौटी | यधपि वे दो चेले वापस घर लौट गये परन्तु वह कब्र पर रुकी रही क्योंकि वह शव के केवल गायब हो जाने से सन्तुष्ट न थी | वह आप में बनी रही क्योंकि आप उस की शक्ति की आशा थे | शव उस की दृष्टि से गायब हो जाने से उस की आशा पर पानी फिर गया और जब वह शोक में डूबी हुई थी, यीशु ने दो दूत उस के पास भेजे जो दूसरी महिलाओं को भी दिखाई दिये | यहाँ उस ने उन को खाली कब्र में बैठे देखा और उन के सफ़ेद कपड़ों से वहाँ के अन्धकार में प्रकाश आ गया | परन्तु वे उसे सांत्वना न दे सके क्योंकि ऐसा केवल यीशु के देखने से ही होता | उस का दिल पुकार उठा : “मेरे प्रभु, आप कहाँ हैं ?”

यह खामोश बुलावा हमें सम्बोधित करता है | हम क्या चाहते हैं ? क्या हम मरियम मगदलीनी से सहमत हैं जो यीशु के दर्शन के सिवा और कुछ न चाहती थी ? क्या तुम्हारा दिल आप के दोबारा आने के लिये रोता है ?

यूहन्ना 20:14-16
“14 यह कह कर वह पीछे मुड़ी और यीशु को खड़े देखा,पर न पहचाना कि यह यीशु है | 15 यीशु ने उससे कहा, ‘हे नारी, तू क्यों रोती है? किस को ढ़ूंड़ती है ?’ उस ने माली समझ कर उस से कहा, ‘हे महाराज, यदि तू ने उसे उठा लिया है तो मुझे बता कि उसे कहाँ रखा है, और मैं उसे ले आऊँगी |’ 16 यीशु ने उससे कहा, ‘मरियम ! उस ने पीछे मुड़ कर इब्रानी में कहा, ‘रब्बूनी !’ अर्थात ‘हे गुरु’ |

यीशु ने उस की पुकार का उत्तर दिया | जहाँ दूसरे लोग खाली कब्र देख कर और दूतों की आवाज़ सुन कर सन्तुष्ट थे, मरियम मगदलीनी दृश्य देखने के लिये तरस रही थी, केवल आप को देखना चाहती थी | यीशु उसे दिखाई दिये, आप बगैर किसी तेजस्वी व्यक्तित्व के, एक साधारण मनुष्य के रूप में उस के सामने खड़े थे |

वह बहुत परेशान हुई क्योंकि उस ने यीशु की आवाज़ नहीं पहचानी, न दूतों को सुनाई दी | वह यीशु की केवल आवाज़ सुनना न चाहती थी बल्कि आप को प्रत्यक्ष देखना चाहती थी | फिर भी उस समय वह आप की उपस्थिति को महसूस न कर सकी क्योंकि दु:खी दिल मसीह की हमारे बीच में उपथिति को महसूस नहीं कर सकता और आप के कुलीन वचन को नहीं सुन सकता | इस प्रकार जो निर्माता परमेश्वर को ढ़ूंड़ते वह उसे नहीं पाते क्योंकि चरवाहे को ढ़ूंड़ने की बजाय केवल ढ़ूंड़ने और पूछने को अधिक प्रिय समझते हैं |

परन्तु यीशु को मरियम के प्रेम की जानकारी थी, और आप ने दयालु शब्दों से उस के कष्ट की दीवारें तोड़ दीं और उस का नाम ले कर उसे पुकारा, जिस से यह प्रगट हुआ कि आप मनुष्य से बढ़ कर हैं, बागबान नहीं | आप सर्वज्ञानी, बुद्धिमान और स्वय: प्रभु हैं | आप ने मरियम को ऐसे पुकारा जैसे एक चरवाहा अपनी भेड़ों को बुलाता है, जिन्हें वह उन के नामों से जानता है और अनन्त जीवन प्रदान करता है | जो व्यक्ति यीशु से प्रेम रखता है वह आप के प्रेम का अनुभव करता है और प्रभु उसे उस के नाम से पुकारते हैं, वह अपने पापों की क्षमा और पवित्र आत्मा की सांत्वना पाता है |

यीशु अब तुम्हें तुम्हारे नाम से पुकारते हैं | क्या तुम आप की आवाज़ सुनते हो, और अपनी सारी शंकायें और पाप छोड़ कर आप के पास आते हो ?

मरियम ने एक शब्द में उत्तर दिया : “स्वामी!” मरियम ने जिस इब्रानी शब्द का प्रयोग किया (रब्बोनी) उस का अर्थ है वह जो सब कुछ जानता है और सर्व शक्तिमान है | उसे आप के स्कूल में सीखने का विशेषाधिकार प्राप्त हुआ था | आप ने उस पर अपना ज्ञान, शक्ति, रक्षा और अनन्त जीवन प्रदान किया था | इस लिये उस का उत्तर उस घट्ना के समान है जब कलीसिया बहुत लम्बे समय तक प्रतिक्षा करने के बाद मसीह के दोबारा आने पर आप का हवा में स्वागत करेगी | तब मरियम भी एक लम्बी प्रतिक्षा के बाद अपने प्रभु को बादलों में आते हुए देखेगी, और समर्पण के साथ आप की आराधना करेगी और हालेलुजाह कह कर प्रशंसा करेगी |

प्रार्थना: प्रभु यीशु, हम आप के सामने नमन करते हैं क्योंकि आप ने मरियम की तीव्र इच्छा के कारण उसे दर्शन दिये | आप ने अपनी उपस्थिति के द्वारा उसे शान्ति दी | आप का वचन जीवन है | आप का वचन स्वीकार करने के लिये हमारे कान खोल दीजिये | हमें आज्ञाकारी बनाइये ताकि हम आप पर खुशी से विश्वास करें |

प्रश्न:

121. मरियम प्रभु यीशु के शव को उस समय तक क्यों ढ़ूड़ती रही जब तक कि आप ने उसे अपने दर्शन न दिये और उस का नाम ले कर न पुकारा ?

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