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यूहन्ना रचित सुसमाचार – ज्योती अंध्कार में चमकती है।
पवित्र शास्त्र में लिखे हुए यूहन्ना के सुसमाचार पर आधारित पाठ्यक्रम
चौथा भाग - ज्योति अन्धकार पर विजय पाती है (यूहन्ना 18:1 - 21:25)
ब - मसीह का पुनरुत्थान और दर्शन देना (यूहन्ना 20:1 - 21:25)
1. फसह के प्रात: काल की घटनायें (ईस्टर) (यूहन्ना 20:1-10)

क) यीशु मरियम मगदलीनी को दिखाई देते हैं (यूहन्ना 20:11-18)


यूहन्ना 20:17-18
“17 यीशु ने उससे कहा, ‘मुझे मत छू, क्योंकि मैं अब तक पिता के पास ऊपर नहीं गया, परन्तु मेरे भाइयों के पास जाकर उन से कह दे, कि मैं अपने पिता और तुम्हारे पिता, और अपने परमेश्वर और तुम्हारे परमेश्वर के पास ऊपर जाता हूँ |’ 18 मरियम मगदलीनी ने जाकर चेलों को बताया, ‘मैं ने प्रभु को देखा, और उसने मुझ से ये बातें कहीं |’ ’’

मरियम श्रद्धा से यीशु के चरनों पर गिर पड़ी और आप के पैर चूमने और आप को छूने का प्रयत्न करने लगी, ताकि आप को थामे रहे और फिर कभी न छोड़े | यीशु ने उसे छूने से रोका क्योंकि आप का प्रेम आत्मिक है | आप ने उसे अपनी आवाज़ और उपस्थिति अर्पण की थी और चाहते थे कि वह पवित्र त्रिय के साथ एकता कायम करे ताकि उस का विश्वास बढ़ता जाये | कुछ समय पहले आप ने बिदाई संदेश में अपने चेलों के सामने यह विषय स्पष्ट किया था | आप को छूने या अपनी पकड़ में लेने से आप के साथ एकता कायम नहीं होती बल्कि आप के आत्मिक व्यक्तित्व में विश्वास, हमें आप से मिला देता है |

यीशु ने मरियम से कहा कि अपनी मृत्यु के बाद आप जमीन पर न रहेंगे; आप की यह उपस्थिति अंतरिम/कुछ समय के लिये है क्योंकि आप का अन्तिम निवास आस्मान पर है | आप का उद्देश आस्मान पर चले जाना और अपने पिता के पास लौटना था | क्रूस पर अपनी इच्छा से प्राण देने के बाद आप का परमेश्वर के पास वापस लौटने का मार्ग खुल गया था | इस महायाजक ने यह निर्णय कर लिया था कि वह स्वय: अपना खून पवित्र परमेश्वर को बलिदान करेगा | आप मरियम से कह रहे थे : “मुझे न छू क्योंकि मुझे सारी धार्मिकता पूरी करनी है; मैं तुम्हारे लिये मध्यस्ता करूँगा और तुम्हें आत्मा की शक्ति से परिपूर्ण करूँगा |

आप के इस वचन का यह अर्थ भी होता है कि आप केवल उसी के नहीं हैं बल्कि पूर्ण मानव जाती के लिये हैं | “तुम चेलों के पास चली जाओ और उन्हें मेरे अस्तित्व, उद्देशों और आस्मान पर चले जाने की जानकारी दो |”

मरियम के द्वारा चेलों को भेजे हुए इस संदेश से आप ने उन्हें सांत्वना दी | आप ने उन्हें भाई कह कर सम्बोधित किया | विश्वास के द्वारा आप के क्रूस, पुनरुत्थान और अनन्त जीवन के कारण हम आप के भाई और बहन बन जाते हैं | आप हमें भाई कहते हैं केवल प्रिय ही नहीं | उद्धार का काम पूरा हो चुका है और हम ने गोद लिये जाने का अधिकार पाया है | आप ने अपने खून से हमारे दिव्य सन्तान होने के घोषणापत्र पर हस्ताक्षर कर दिये हैं |

मरियम के द्वारा जो संदेश चेलों को पहुँचाना था उस का तत्व क्या था ? पहला यह कि आप जीवित थे | उस की आप के साथ भेंट एक एतिहासिक सत्य था | दूसरे यह कि आप का पिता हमारा पिता भी था, और इस वायदे के साथ यीशु अपने चेलों को परमेश्वर के साथ पूर्ण संगती में ले आये | आप ने परमेश्वर के विषय में यह नहीं कहा कि वह कोई ऐसा व्यक्ति है जो दूर है, सर्व शक्तिमान या न्यायाधीश है | बल्कि एक पिता समान जो प्रेमालू और निकट हो | वह केवल मसीह का पिता ही न था बल्कि हमारा पिता भी था | आप ने पिता को “मेरा परमेश्वर” कहा जैसे कि वह आप के लिये सब कुछ है | आप अपने पिता के संग ईमान्दार रहे जहाँ सारी उत्पत्ती पाप के कारण परमेश्वर से अलग हो गई है | हमारे पहले पाप के कारण वह अब हमारा शत्रु नहीं है बल्कि हम से प्रेम रखता है क्योंकि क्रूस पर मूल्य चुकाये जाने से हमें क्षमा किया गया है | जैसे आप पिता के साथ एक होकर जीते हैं उसी तरह आप अपना पवित्र आत्मा उंडेल कर यह चाहते हैं कि हम भी पवित्र त्रिय की एकता में जियें ताकि हम में से प्रेम का झरना बहता रहे |

इस प्रकार मसीह ने उस महिला के ओंठों पर पूर्ण संगती का वायदा रख दिया जिस ने आप को मृत्यु पर विजय पाने के बाद पहली बार देखा | वह आज्ञाकारी महिला थी, उस ने आप के चरनों में नमन करना छोड़ कर चेलों के पास दौड़ती हुई गई और यह घोषणा की कि अनुग्रह के द्वारा प्रभु हमारे भाई और परमेश्वर हमारा पिता बन कर अब वे दोनों हमारे साथ एकता में हो गये हैं | यह संदेश, आज भी, प्रसन्नता की तुरही की आवाज़ की तरह हमारे दु:खी दिलों को परिपूर्ण करता है | क्या परमेश्वर के साथ स्वीकार और तुम्हारे नवीकरण की प्रसन्नता तुम तक पहुंच चुकी है ? क्या तुम मरियम के संदेश पर विश्वास करते हो कि वह मसीह के जी उठने के समाचार की घोषणा करने वाली पहली व्यक्ति थी |

प्रार्थना: प्रभु यीशु जो मृतकों में से जी उठे और हमारे बीच में उपस्थित हैं, हम आप का धन्यवाद करते हैं क्योंकि आप ने हमें अपना भाई कहा | हम इस योग्य नहीं कि आप की घनिष्ट संगति में रहें | हमारे पाप क्षमा करने के कारण हम आप का धन्यवाद करते हैं | हमें उन लोगों के लिये जो आप को ढ़ूंड़ते हैं, खुशी के प्रेरित बनाइये |

प्रश्न:

122. मरियम मगदलीनी के ओंठों पर हमारे लिये मसीह का कौन सा संदेश है?

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