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यूहन्ना रचित सुसमाचार – ज्योती अंध्कार में चमकती है।
पवित्र शास्त्र में लिखे हुए यूहन्ना के सुसमाचार पर आधारित पाठ्यक्रम
चौथा भाग - ज्योति अन्धकार पर विजय पाती है (यूहन्ना 18:1 - 21:25)
ब - मसीह का पुनरुत्थान और दर्शन देना (यूहन्ना 20:1 - 21:25)

3. थोमा की उपस्थिति में यीशु का चेलों पर प्रगट होना (यूहन्ना 20:24-29)


यूहन्ना 20:29
“29 यीशु ने उस से कहा, ‘तू ने मुझे देखा है, क्या इस लिये विश्वास किया है? धन्य वे हैं जिन्हों ने बिना देखे विश्वास किया |’”

हम यह नहीं जानते कि थोमा ने यीशु के घावों को छुआ भी था या वह उन्हें देख कर ही सन्तुष्ट हो गया था | हो सकता है कि वह अपने अविश्वास पर लज्जित हो गया था और उस में निर्भीकता ही न थी | यीशु ने थोमा के विश्वास को आँखों देखे गवाह के आधार पर धर्म स्वीकृत पाप स्वीकरण कहा; परन्तु प्रभु चाहते थे कि हम में इस से भी ऊँचे स्तर का विश्वास निर्माण हो जो आप को बगैर देखे हुए भी आप पर विश्वास और आप के वचन पर आत्मविश्वास करने से निर्माण होता है | जो व्यक्ति अपने विश्वास की पुष्टि को दृढ़ बनाने के लिये यीशु को स्वप्नों,दृष्टी या प्रगटन के द्वारे देखना चाहता है वह प्रारंभिक परिस्थिति में होता है, जो न अपने विश्वास में विकसित होता है और न ही ठीक तौर से स्थापित हो चुका होता है | फिर भी यीशु अपने चेलों पर कई बार प्रगट हुए ताकि संकट काल में उन का विश्वास शक्तिशाली बने |

जो लोग यीशु को बगैर देखे आप पर विश्वास करते हैं, उन्हें आप आशीष देते हैं और वे आनन्दित होते हैं | सच्चा विश्वास हम में दृष्य से अधिक शक्ति निर्माण करता है क्योंकि दृष्य द्वारा निर्माण हुई शक्ति परिवर्तित होती है | मनुष्य का परमेश्वर के वचन पर विश्वास न दिखाई देने वाले प्रवक्ता को आदर देने के समान होता है |

जब की मसीह के कई बार प्रगट होने के बाद सुसमाचारकों और प्ररितों ने सुसमाचार और प्रेरितों के पत्रों के अनुसार हमें शिक्षा देना आरंभ किया | यीशु का पुनरुत्थान एक नये दौर का एलान है जिस में परमेश्वर का जीवन विश्वासियों के दिलों पर प्रभावित होता है | हमारा विश्वास केवल धर्म स्वीकृत मत या विचार नहीं है बल्कि वह जीवन और मृतकों में से जी उठे हुए मसीह से संबंध होना होता है | यह हमारे दौर का आश्चर्यकर्म है, क्योंकि लाखों लोग यीशु को देखे बिना आप पर विश्वास करते हैं क्योंकि विश्वास के द्वारा उन्हों ने अनन्त जीवन की शक्ति का अनुभव किया है | कई मसीही अपना माल, रिश्तेदार और उन का जीवन खोने को थे | उन्हें मसीह के वचन में विश्वास करने के कारण सत्य प्राप्त हुआ | यह विश्वास तर्कशास्त्र के कक्ष के बाहर था | यीशु ऐसे विश्वास को अपने वचन और अपना जीवन विश्वासी में लाकर उसे पुरुस्कार देते हैं | हमारा विश्वास हमारे सम्पूर्ण अस्तित्व का आलिंगन करता है और हमें अपने उद्धारकर्ता, यीशु से जोड़ देता है |

प्रार्थना: प्रभु यीशु, आप हमारे विश्वास के निर्माण कर्ता और परिपूर्ण कर्ता हैं | आप हम से प्रेम करते हैं और आप का सत्य आप के वचन के द्वारा हम तक पहुँचता है | अब मैं विश्वास करता हूँ कि आप मेरा और मेरे कई मित्रों का उद्धार करेंगे; आप उनका नवीकरण करेंगे और उन्हें अपने नाम में जीवित विश्वास में स्थापित करेंगे ताकि उन्हें अनन्त जीवन और बड़ी प्रसन्नता प्राप्त हो |

प्रश्न:

128. यीशु अपने उन विश्वासियों को धन्य क्यों कहते हैं जिन्हों ने आप को नहीं देखा ?

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