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यूहन्ना रचित सुसमाचार – ज्योती अंध्कार में चमकती है।
पवित्र शास्त्र में लिखे हुए यूहन्ना के सुसमाचार पर आधारित पाठ्यक्रम
चौथा भाग - ज्योति अन्धकार पर विजय पाती है (यूहन्ना 18:1 - 21:25)
ब - मसीह का पुनरुत्थान और दर्शन देना (यूहन्ना 20:1 - 21:25)
5. यीशु झील के किनारे पर प्रगट होते हैं (यूहन्ना 21:1-25)

क) यीशु की भविष्यवाणियां (यूहन्ना 21:20-23)


यूहन्ना 21:20-22
“20 पतरस ने मुडकर उस चेले को पीछे आते देखा, जिस से यीशु प्रेम रखता था, और जिस ने भोजन के समय उस की छाती की ओर झुक कर पूछा था, ‘हे प्रभु, तेरा पकड़वाने वाला कौन है ?’ 21 उसे देख कर पतरस ने यीशु से कहा, ‘हे प्रभु, इस का क्या हाल होगा ?’ 22 यीशु ने उस से कहा, ‘यदि मैं चाहूँ कि वह मेरे आने तक ठहरा रहे, तो तुझे इस से क्या ? तू मेरे पीछे हो ले |’”
पतरस ने अपने स्वामी के मेमनों और भेड़ों का चरवाहा बनने के बुलावे को स्विकार किया | यधपि यूहन्ना चेलों में सब से कम आयु के सदस्य थे इस लिये पतरस को उन के बारे में यीशु का इरादा जानने की चिंता लगी हुई थी | क्या आप उन की कम आयु के कारण उन्हें उन के घर भेजेंगे या उन्हें इस विवाद में सेनापति नियुक्त करेंगे ?

हो सकता है कि पतरस के शब्दों में कुछ अंश ईर्ष्या का हो क्योंकि यीशु यूहन्ना को दूसरे चेलों से अधिक चाहते थे और उन से ज़्यादा प्रेम रखते थे | प्रभु भोज के समय पतरस ने यूहन्ना को इशारा किया था कि वे वहाँ की परेशान स्थिति को शांत करने के लिये यीशु से आप को पकड़वाने वाले का नाम पूछें |

यूहन्ना, यीशु के इतने निकट आ गये थे कि आप के शत्रुओं के सामने अपने प्राण को खतरे में डाल कर वे क्रूस के पास खड़े रहे | प्रभु के मृतकों में से जी उठने पर विश्वास करने वाले वह पहले व्यक्ति थे और झील पर मछलियाँ पकड़ते समय किनारे पर खड़े व्यक्ति को पहचानने वाले भी वही पहले व्यक्ति थे | जब पतरस को अनुयायी बनने के लिये बुलाया जा रहा था, उस से पहले से ही यूहन्ना यीशु के अनुयायी बन चुके थे | उन का दिल मसीह से जुडा़ हुआ था | वे सब चेलों से अधिक प्रभु से घनिष्ठ संबन्ध रखते थे |

संभव है पतरस ने यीशु से पूछा हो कि क्या यूहन्ना भी भविष्य में वैसे ही कष्ट उठायें गे जैसी भविष्वाणी उन के विषय में की गई है या वह सम्मान केवल उन ही के लिये है | यीशु ने मुख्य चेले को उत्तर दिया कि आप ने उन्हें दूसरों पर प्रभुता करने के लिये नहीं परन्तु अपने बराबर के लोगों का भाई बनने के लिये नियुक्त किया है | यूहन्ना के भविष्य की उन्हें कोई चिन्ता न होनी चाहिये जिन का प्रभु से परस्पर संबन्ध है परन्तु पतरस प्रेरितों के प्रवक्ता थे | यूहन्ना खामोश रहे और प्रार्थना और संयम के द्वारा कलीसिया में आये हुए सिद्धांतिक विकास का समर्थन कर रहे थे और प्रार्थना की शक्ति के द्वारा प्रभावित कर रहे थे (प्रेरितों 3:6; 8:14; गलातियों 2:9) |

यीशु ने यूहन्ना की जिस सेवा के लिये पहले से नियुक्ति की थी उस से यह स्पष्ट होता है कि इस का कोई महत्व नहीं कि हम मसीह की सेवा करते हुए लम्बे समय तक जीते रहें या आप के कारण जल्दी मर जायें | आप के लिये हमारी निष्ठा और आज्ञाकारिता अतिआवश्यक हैं | यीशु अपने चेलों के साथ ऐसा व्यवहार नहीं करते मानो वे एक ही ढाँचे में बने हुए हों बल्कि हर एक के लिये विशेष मार्ग तैयार करते हैं ताकि वे अपने स्वामी को महामंडित करें | यूहन्ना की मृत्यु के विषय में हम कुछ नहीं जानते, हो सकता है कि वे साधारण मृत्यु से मरे हों |

यीशु पतरस को आज्ञा देते हैं कि वे केवल अपनी चिन्ता करें और दूसरे चेलों के मामले में न झाँकें | इस का यह अर्थ हुआ कि हम दूसरे मसीहियों के व्यवसाय से परेशान न हों बल्कि हम स्वय: अपने जीवन में परमेश्वर की इच्छा जानने का प्रयत्न करें और तुरन्त बिना शर्त उस का पालन करें | निष्ठावान अनुगमन करना हर मसीही का कर्तव्य है |

आप ने अपने चेलों से अपने दोबारा आने के विषय में भी बात की |वह आगमन दुनिया के इतिहास का उद्देश है | सभी चेलों के विचार इस भविष्य की घट्ना की ओर आकर्षित हुए थे | लोगों के बीच में परमेश्वर की उपस्थिति से सभी पीढ़ीयों की इच्छा पूरी हो जायेगी | यीशु बड़ी महिमा के साथ आयेंगे | क्या तुम आप के आने की प्रतिक्षा कर रहे हो और प्रार्थना, सेवा, पवित्र गीतों और अपनी पवित्र गवाही से तैयारी कर रहे हो ? आप की उपस्थिति में हम कई विश्वासियों को देख सकेंगे जो विश्वास के कारण केवल आप के अनुयायी बने थे, किसी और के नहीं |

यूहन्ना 21:23
“23 इस लिये भाइयों में यह बात फैल गई कि वह चेला न मरेगा; तौ भी यीशु ने उस से यह नहीं कहा कि वह न मरेगा, परन्तु यह कि ‘यदि मैं चाहूँ कि वह मेरे आने तक ठहरा रहे, तो तुझे इससे क्या ?’”

संतुलित मत के अनुसार यूहन्ना वृद्धावस्था तक जीते रहे और मसीह के आने की प्रतिक्षा करने वाली कलीसियाओं में एक चिन्ह बन गये थे | उन के विषय में यह मशहूर हो गया था कि प्रभु के दोबारा लौट आने तक वे न मरेंगे | पौलुस भी प्रभु के जल्द आने की प्रतिक्षा कर रहे थे और यह कि वे शायद न मरें बल्कि अचानक परिवर्तित हो कर आस्मान पर उठाये जायेंगे | परन्तु यूहन्ना व्यावहारिक व्यक्ति थे और उन्हों ने स्पष्ट रूप से बताया कि मसीह के वायदे का यह अर्थ नहीं होता कि वे उस समय तक न मरेंगे जब तक कि आस्मान खुल न जाये और वैभवशाली प्रभु लौट न आयें | उन का लक्ष्य और निश्चय पतरस की इच्छा के अनुसार न थे | प्रभु अच्छे चरवाहे हैं जो अपने चेलों का उन के विशेष मार्ग पर मार्गदर्शन करते हैं |

प्रार्थना: प्रभु यीशु, आप वैभवशाली उद्धारकरता और निष्ठावान चरवाहे हैं | हम आप का धन्यवाद करते हैं कि आप ने पतरस और यूहन्ना का इस प्रकार मार्गदर्शन किया जो उन के लिये व्यक्तिगत रूप से योग्य था | ताकि वे अपने जीवन और मृत्यु द्वारा आप को महामंडित करते | हमें केवल आप ही के अनुयायी बने रहने का विशेष अधिकार दीजिये | हमारे रिश्तेदारों और मित्रों को आप के आने की महत्वाकांक्षा की ओर प्रेरित कीजिये ताकि वे आनन्दित हो कर आप के आने की तय्यारी करें जो घट्ना जल्द ही घटने वाली है |

प्रश्न:

133. इस सुसमाचार में लिखित मसीह के अन्तिम शब्दों का क्या अर्थ होता है ?

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