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Home -- Hindi -- John - 038 (Four witnesses to Christ's deity)
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यूहन्ना रचित सुसमाचार – ज्योती अंध्कार में चमकती है।
पवित्र शास्त्र में लिखे हुए यूहन्ना के सुसमाचार पर आधारित पाठ्यक्रम
दूसरा भाग – दिव्य ज्योती चमकती है (यूहन्ना 5:1–11:54)
अ – यरूशलेम की दूसरी यात्रा (यूहन्ना 5:1–47) –यीशु और यहूदियों के बीच शत्रुता का उभरना

4. मसीह की दिव्यता क्वे विषय में चार गवाह (यूहन्ना 5:31-40)


यूहन्ना 5:31–40
“31 यदि मैं आप ही अपनी गवाही दूँ , तो मेरी गवाही सच्ची नहीं | 32 एक और है जो मेरी गवाही देता है , और मैं जानता हूँ कि मेरी जो गवाही वह देता है , वह सच्ची है | 33 तुम ने यूहन्ना से पुछवाया और उस ने सच्चाई की गवाही दी है | 34 परन्तु मैं अपने विषय में मनुष्य की गवाही नहीं चाहता ; तौभी मैं ये बातें इसलिये कहता हूँ कि तुम्हें उद्धार मिले | 35 वह तो जलता और चमकता हुआ दीपक था, और तुम्हें कुछ देर तक उसकी ज्योति में मगन होना अच्छा लगा | 36 परन्तु मेरे पास जो गवाही है वह यूहन्ना की गवाही से बड़ी है ; क्योंकि जो काम पिता ने मुझे पूरा करने को सौंपा है अर्थात यही काम जो मैं करता हूँ, वे मेरे गवाह हैं कि पिता ने मुझे भेजा है | 37 और पिता जिस ने मुझे भेजा है , उसी ने मेरी गवाही दी है | तुम ने न कभी उसका शब्द सुना, और न उसका रूप देखा है ; 38 और उसके वचन को मन में स्थिर नहीं रखते, क्योंकि जिसे उस ने भेजा, तुम उसका विश्वास नहीं करते | 39 तुम पवित्रशास्त्र में ढूंढते हो , क्योंकि समझते हो कि उसमें अनन्त जीवन तुम्हें मिलता है ; और यह वही है जो मेरी गवाही देता है; 40 फिर भी तुम जीवन पाने के लिये मेरे पास आना नहीं चाहते |”

मसीह ने अपने शत्रुओं से कहा कि आप को प्रतिज्ञा किये मसीह के काम करने का अधिकार प्राप्त है | यहूदी अपने इस देशवासी से घ्रणा करते थे क्योंकी आप उनकी व्यवस्था और कानून में बाधा डाल रहे थे | उन्होंने आप से अपने दावे को सिद्ध करने के लिये गवाहियाँ मांगीं इस लिये यीशु उनकी याचना का उत्तर देने के लिये राज़ी हो गये | हम सब अपने आप को, हम जो कुछ हैं उस से भी बेहतर समझते हैं | यीशु ने अपने विषय में बिलकुल सच विवेचना दी जिस में झूठ का बिलकुल अंश ना था | आपकी गवाही बिलकुल सच थी यधपि कानून स्वंय अपने ही हक में मनुष्य की अपनी गवाही को महत्व नहीं देता | मसीह इस बात को स्वीकार करते हुए कहते हैं :” अगर मैं अपनी गवाही स्वंय दूँ तो मेरी गवाही सच नहीं |” आप को खुद अपने आप को बचाने की ज़रूरत नहीं थी क्योंकी किसी और ने आपके लिये गवाही दी थी और वो आपका आस्मानी पिता था जिसने चार निशानियों के द्वारा या चौगुने सबूत के साथ आप का समर्थन किया |

परमेश्वर ने बपतिस्मा देने वाले यूहन्ना को लोगों में मसीह की घोषणा करने के लिये भेजा | इस पुरोगंता ने मसीह और आप की सेवा की गवाही दी कि आप याजक हैं और आप का काम न्याय करना है | परन्तु यहुदियों के उच्च न्यायालय ने यूहन्ना पर सन्देह किया और यीशु के विषय में उनकी गवाही स्वीकार ना की (यूहन्ना 1:19-28) | यूहन्ना की गवाहियाँ यीशु कि ना तो महत्वकांक्षा थीं , ना ही उनका प्रोत्साहन आप के लिये ज़रुरी था बल्की यीशु वही थे जो अनन्त से हैं | लोगों के अज्ञान होने के कारण यीशु ने यूहन्ना की गवाही स्वीकार की जो आप की सच्चाई का और अधिक समर्थन करती थी | जब यूहन्ना ने यीशु को परमेश्वर का मेमना कहा जो दुनिया के पाप उठा लेजाता है तब उन्हों ने कुछ भी बढ़ा चढ़ा कर नहीं कहा |

यूहन्ना एक दीपक थे जो रात के समय जलाया जाता है| वो अपने अनुयायियों को अपने पास जमा कर के उन पर प्रकाश डाला करते थे| परन्तु जब यीशु के व्यक्ती में सूरज उदय हुआ तब दिये की आवयश्कता ना रही| यीशु एक मात्र दुनिया कि ज्योती हैं जिसकी शक्ति का कोई अन्त नहीं है | जिस तरह सूरज पृथ्वी पर जीवन और विकास लाता और पैदावार उगाता है उसी तरह यीशु आत्मिक जीवन और प्रेम प्रदान करते हैं| आप का चंगा करना और दुष्ट आत्माओं को निकालना आप की ज्योति का अंधकार पर विजय प्राप्त करना है | आप का तूफान को रोकना और मृत्कों को दोबारह ज़िन्दा करना आपकी दिव्यता को प्रगट करता है | आप के काम आप के पिता के कामों के साथ सर्वसहमत थे | आपने क्रूस पर अपनी सेवा पूरी की और फिर दोबारह ज़िन्दा होकर उन लोगों पर पवित्र आत्मा उंडेल दिया जो आप पर विश्वास करते थे | मृत्कों को जीवन देना और दुनिया का न्याय करना जैसे परमेश्वर के काम मसीह के दूसरी बार आने के बाद पूरे होंगे | पिता और पुत्र की गतिविधी में कोई अन्तर नहीं है | जिस तरह पिता काम करता है उसी तरह पुत्र भी करता है|

परमेश्वर ने अपनी ऊंची आवाज़ में हमारे लिये यह कहा: “यह मेरा प्रिय पुत्र है जिससे मैं अत्यन्त प्रसन्न हूँ|” (मत्ती 3: 17) यीशु के सिवाय और किसी के विषय में ऐसी गवाही नहीं दी गई क्योंकी आप परमेश्वर की खुशियों में जीते रहे| प्यारा पुत्र सच्चे प्रेम और पवित्रता से परिपूर्ण था|

यीशु ने यहुदियों से कहा कि वो परमेश्वर को नहीं जानते | वे व्यवस्था और भविष्यवक्ताओं की पुस्तकों से उसकी आवाज़ सुनने में असमर्थ रहे और उन्होंने उसका चेहरा ना दृश्य ना ही सपनों में देखा है | पहले सभी प्रकाशित पवित्र वचनों में कोई ना कोई कमी थी क्योंकी उनके पापों ने उन्हें पवित्र परमेश्वर से अलग कर दिया था, ठीक उसी तरह जब यशायाह भविष्यवक्ता ने मन्दिर में परमेश्वर की महीमा देखी तो चिल्ला कर कहा : “हाय ! हाय ! मैं नष्ट हुआ क्योंकी मैं अशुद्ध होंटोंवाला मनुष्य हूँ |” यहुदियों का परमेश्वर के अवतारित वचन यानी मसीह का इन्कार करना, उनके आत्मिक बहरापन और अज्ञानता का सबूत था | जो कोई यह सोचता है की वो परमेश्वर का वचन समझता है और फिर भी यीशु को जो परमेश्वर का वचन हैं, अस्विकार करता है, यह प्रमाणित करता है कि उसने स्वंय वचन नहीं पाया या उसे समझ ना सका|

पुराने नियम के लोग इस आशा से धर्मशास्त्र में ढूंढते थे कि उसके द्वारा उन्हें अनन्त जीवन प्राप्त होगा, परन्तु उसके बदले उन्हें व्यवस्था का बेजान वचन मिला | परन्तु उन्होंने उन प्रतिज्ञाओं में जो मसीह की तरफ संकेत करती थीं, ध्यान ना दिया जब की ऐसी बहुत सी भविष्यवाणियां पुराने नियम में पाई जाती हैं, फिर भी उन्होंने स्वंय अपने विचार,दृष्टिकोण और आदर्शों को पसन्द किया और यह ना जान सके कि मसीह परमेश्वर का अंतिम वचन था जो उनके पास था|

यीशु ने उन्हें उनके अस्वीकार करने का कारण बताया कि वो परमेश्वर को उसकी असलियत में देखना नहीं चाहते थे | वो यीशु से घ्रणा करते थे और इस तरह उन्होंने अनन्त जीवन खो दिया जो विश्वास और अनुग्रह का मुख्य उद्देश है|

प्रार्थना: ऐ प्रभु यीशु, हम आपका धन्यवाद करते हैं कि आप ने अपने शत्रुओं से प्रेम किया और उनके अविश्वास पर दुखी हुए | आप ने उन्हें अपनी दिव्यता के बारे में चार गवाहियाँ बतायीं | सुसमाचार और पवित्र शास्त्र में आपको देखने, आपकी दिव्यता को खोजने, आपके कामों पर विश्वास करने और अनन्त जीवन पाने में हमारी सहायता कीजिये | उन अतिशय बहरे लोगों के कान खोल दीजिये जो आज भी आप कि आवाज़ नहीं सुन पाते|

प्रश्न:

42. वो चार गवाह कौन हैं और वो किस के विषय में गवाही दे रहे हैं?

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