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यूहन्ना रचित सुसमाचार – ज्योती अंध्कार में चमकती है।
पवित्र शास्त्र में लिखे हुए यूहन्ना के सुसमाचार पर आधारित पाठ्यक्रम
तीसरा भाग - प्रेरितों के दल में ज्योती चमकती है (यूहन्ना 11:55 - 17:26)
द - गैतसमनी के मार्ग पर बिदाई (यूहन्ना 15:1 - 16:33)

2. हमारे स्वर्गीय पिता की संगती में बने रहने से हमारा आपस का प्रेम स्पष्ट होता है (यूहन्ना 15:9-17)


यूहन्ना 15:9
“ 9 जैसा पिता ने मुझ से प्रेम रखा, वैसा ही मैं ने तुम से प्रेम रखा; मेरे प्रेम में बने रहो |”

पिता ने पुत्र से ऐसा प्रेम किया कि उस ने यर्दन नदी में आपके बपतिस्मे के समय आस्मान को खोल दिया | पवित्र आत्मा कबूतर के रूप में आप पर उतरा और एक आवाज़ सुनाई दी: “यह मेरा प्रिय पुत्र है जिस से मैं अति प्रसन्न हूँ |” पवित्र त्रिय की यह घोषणा जब यीशु ने मानव जाति के पापों को बपतिस्मे की निशानी के नीचे उठाया तब परमेश्वर के मेमने के बलिदान के मार्ग पर यात्रा का आरंभ हुआ | पुत्र ने पिता की इच्छा पूरी की और हमारे पाप की मुक्ति के लिये अपने आप को खाली कर दिया | यह प्रेम पिता और पुत्र तक ही सीमित नहीं है, वो दोनों प्रेम में एक होकर इस भ्रष्ट दुनिया की पाप मुक्ति के लिये महान तैयारी में लगे हुए हैं |

यीशु हम से उतना ही प्रेम करते हैं जितना पिता आप से करता है परन्तु जैसे आप आज्ञाकारी थे वैसे हम नहीं हैं | हम में से एक व्यक्ति भी अनन्त काल से परमेश्वर का पुत्र न था | हुआ यह कि पुत्र ने हम पापियों को चुना और पवित्र कर दिया | आप ने पवित्र आत्मा के द्वारा हमें दूसरा जन्म दिया और अभिषिक्त किया | हम आप के हाथों में खिलौनों की तरह नहीं दिखाई देते जिन्हें अपनी इच्छा के अनुसार नीचे फ़ेंक दिया जाये | आप दिन भर हमारे बारे में सोचते रहते हैं और दिव्य चिंता से हमारा ध्यान रखते हैं | आप हमारी सिफारिश करते हैं और सुसमाचार में हमारे लिये प्रेम भरे पत्र लिखे हैं | आप हमें विश्वास रखने, प्रेम करने और आशा रखने के लिये प्रवृत करते हैं | अगर हम वह प्रेम जमा करें जो माता, पिता हर समय इस पृथ्वी पर अपनी सन्तान पर उंडेलते हैं और उस प्रेम को सारी अपवित्रता और मानवीय भ्रष्टाचार से पवित्र करें तो जो कुछ प्राप्त होगा वह मसीह के हमारे लिये प्रेम के सामने छोटा दिखाई देगा | क्योंकि आप का प्रेम कभी असफल नहीं होता |

यूहन्ना 15:10
“10 यदि तुम मेरी आज्ञाओं को मानोगे, तो मेरे प्रेम में बने रहोगे; जैसा कि मैं ने अपने पिता की आज्ञाओं को माना है, और उसके प्रेम में बना रहता हूँ |”

यीशु तुम्हें चेतावनी देते हैं, “मेरे प्रेम से अपने आप को वंचित न करो | मैं तुम से प्रेम करता हूँ और अपने लिये तुम्हारा प्रेम देखने के लिये इच्छुक हूँ | तुम्हारी प्राथनायें कहाँ हैं, क्या वह आस्मान से टेलीफ़ोन की तरह संपर्क किये हुए हैं ? उन ज़रूरतमंदों के लिये तुम क्या योगदान देते हो जो मेरे उद्धार के कार्य को स्वीकार करते हैं ? मैं तुम्हें वह करने की प्रेरणा देता हूँ जो दयालुता और पवित्रता के लिये उचित और प्रिय है | मेरे प्रेम में बने रहो | पवित्र आत्मा तुम्हें अच्छे काम करने की प्रेरणा देगा, ठीक उसी तरह जैसे परमेश्वर हमेशा अच्छे काम करता आया है |”

परमेश्वर के समान प्रेम न करना पाप है | मसीह हमें परमेश्वर के दया के स्तर तक उठाना चाहते हैं | “दयालु बनो, जैसे मैं और पिता दयालु हैं |” तुम्हें शायद यह महसूस हो कि यह असंभव है | तुम्हारा विचार सही है, यदि यह विषय मानवी विचारधारा तक ही सीमित हो | परन्तु तुम नहीं जानते की मसीह क्या चाहते हैं; आप तुम में क्या कर सकते हैं ? आप अपना आत्मा तुम में उंडेल देते हैं ताकि तुम आप की तरह ही प्रेम कर सको | इस आत्मा से प्रेरित हो कर पौलुस कहते हैं, “मैं मसीह के द्वारा सब कुछ कर सकता हूँ जो मुझे शक्तिशाली बनाते हैं | (फिलिप्पियों 4:13).

यीशु ने गवाही दी कि आप ने ऐसे कुछ भी नहीं किया जो पिता की इच्छा के अनुकूल न था, बल्कि आप हमेशा परमेश्वर के प्रेम में बने रहते थे | मसीह परमेश्वर की शान्ति, आत्मा में प्रार्थना करना और प्रिय सेवा हम में डालते हैं |

यूहन्ना 15:11
“11 मैं ने यह बातें तुम से इसलिये कही हैं, कि मेरा आनन्द तुम में बना रहे, और तुम्हारा आनन्द पूरा हो जाए |”

जब तक मनुष्य परमेश्वर से दूर रहता है तब तक प्यास उस के दिल का हाल जानती है | मसीह जो अपने पिता के प्रेम में बने रहते थे, आनंद और आत्मिक परमानंद से परिपूर्ण थे | आप का अंतकरण सदा गीत गता और प्रशंसा करता रहता था | आप अपने उद्धार के साथ साथ अन्दरूनी प्रेम का सागर प्रदान करना चाहते हैं | परमेश्वर सुखदाई और आनंद प्रदान करने वाला परमेश्वर है |

आत्मिक फल की सूचि में प्रेम के बाद आनंद का दूसरे फल के तौर पर उल्लेख किया गया है | जब पाप का निषेध होता है तो शरीर में आनंद व्याप्त होता है | मसीह हम में उद्धार के आनंद को शक्तिशाली बनाना चाहते हैं ताकि वह दूसरों तक पहुंच जाये | आनन्दित व्यक्ति अपना आनंद स्वय: अपने आप तक ही सीमित नहीं रख सकता बल्कि चाहता है कि दूसरों को भी बचा कर पापों की क्षमा के आनंद और परमेश्वर में आनंद के विश्वास में शामिल कर ले | और जब बहुत से लोग उद्धार पायेंगे तब हमारा आनंद परिपूर्ण हो जाएगा | जैसा कि प्रेरित ने कहा है : “परमेश्वर चाहता है कि सब लोग उद्धार पायें और सत्य की पहचान तक पहुंचें |” सुसमाचार सुनना संघर्ष और पीड़ा के बीच में आनंद का सोता बन जाता है |

यूहन्ना 15:12-13
“12 “मेरी आज्ञा यह है, कि जैसा मैं ने तुम से प्रेम रखा, वैसा ही तुम भी एक दूसरे से प्रेम रखो | 13 इस से बड़ा प्रेम किसी का नहीं कि कोई अपने मित्रों के लिये अपना प्राण दे |”

यीशु हम से प्रेम करते हैं; आप हमारे नाम, चरित्र और हमारे बीते हुये दिनों को जानते हैं | हमारी यातना और समस्यायों का आप को अहसास है | हमारे भविष्य को संवारने के लिये आप के पास योजना और सहायता मौजूद है | प्रार्थना के समय हमारे साथ वार्तालाप करने के लिये आप हमेशा तैयार रहते हैं; आप हमारे पाप क्षमा करते हैं और हमें सत्य और शुद्धता के साथ पवित्र जीवन जीने की प्रेरणा देते हैं |

जैसे यीशु हम से प्रेम करते हैं वैसे ही आप चाहते हैं कि हम एक दूसरे से प्रेम करें | हम अपने रिश्तेदारों और मित्रों के अधिक नज़दीक आजाते हैं और उनकी परिस्तिथी और यातनाओं को महसूस करते हैं | हम उनके उद्देशों और उनके व्यक्तित्व को समझने लगते हैं | हम उनकी समस्यायों का समाधान ढूंड निकालते हैं और उन्हें योग्य सहायता प्रदान करते हैं और उनके साथ कुछ समय बिताते हैं | अगर वो कोई भूल कर बैठते हैं तो हम उन्हें क्षमा करते हैं और उन के साथ सहानुभूती पूर्वक व्यवहार करते हैं और उनकी कमज़ोरियों और गलतियों की उनसे चर्चा भी नहीं करते |

यीशु ने अपने जीवन में प्रेम के शिखर का उद्धरण पेश किया | आप ने केवल बातों और सहायता से ही काम न लिया बल्कि पापियों के लिये अपना बलीदान दिया | आप हमारे लिये केवल जीये ही नहीं बल्कि हमारे बदले अपने प्राण भी दे दिये | क्रूस प्रेम का मुकुट है जो हमें परमेश्वर के प्रेम का अर्थ स्पष्ट करता है | आप यह चाहते हैं कि हम उद्धार का समाचार दूसरों तक पहुंचायें और उसके लिये अपना समय और संपत्ति का बलीदान दें | अगर आप हमें सुसमाचार का वचन दूसरों तक पहुचाने के लिये और आप ने हमारे लिये जो कुछ किया उसे स्पष्ट करने के लिये बुलाते हैं तो आप हम से यह आशा रखेंगे कि हम अपने आप को, हमारी संपत्ति और शक्ति को अर्पण करें | जो आप के साथ बुरा व्यवहार करते हैं उन के लिये आप प्रार्थना करते हैं, उनके साथ अपने मित्र समान व्यवहार करते हैं | आप ने अपने शत्रुओं के लिये प्रार्थना की: “ऐ पिता! उन्हें क्षमा कर क्योंकि वह नहीं जानते कि क्या कर रहे हैं !” आप ने उन्हें केवल भाई या परमेश्वर की सन्तान ही नहीं कहा बल्कि “प्रिय” कहा! जो लोग आप के प्रेम के पात्र न थे उन की पाप मुक्ति के लिये आप ने प्राण दिये |

यूहन्ना 15:14-15
“14 जो आज्ञा मैं तुम्हे देता हूँ, यदि उसे मानो तो तुम मेरे मित्र हो | 15 अब से मैं तुम्हें दास न कहूँगा,क्योंकि दास नहीं जानता कि उसका स्वामी क्या करता है; परन्तु मैं ने तुम्हें मित्र कहा है,क्योंकि मैं ने जो बातें अपने पिता से सुनीं, वे सब तुम्हें बता दीं |”

परमेश्वर ने तुम को प्रिय कह कर संभोदित किया | वह हर एक को स्वय: इसी तरह संभोदित करता है | यदि तुम बिलकुल अलग थलग हो चुके हों और ऐसा कोई नहीं जिस की ओर सहायता के लिये हाथ बढा सको | ऐसे समय यीशु की तरफ देखो जिन्हों ने तुम्हारे लिये अपने प्राण दिये और अब तुम्न्हारे लिये जी रहे हैं | वे तुन्हारे सब से अच्छे मित्र हैं जो सहायता करने के लिये सदा तैयार रहते हैं | आप तुम्हारे विचारों को जानते हैं और आप की प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा करते हैं |” आप की मित्रता मे बने रहने के लिये एक शर्त है वह यह कि हम सब से वैसा ही प्रेम करें जैसा आप ने उनसे किया | ऐसे दो व्यक्ति जो यह दावा करते हैं कि वे मसीह से प्रेम करते हैं, एक दूसरे से असमानता नहीं रख सकते | आप से मित्रता यह चाहती है कि हम एक दूसरे से प्रेम करें | आप ने हमें अपने प्रिय कहा | हम आप के इस लिये हैं कि आप ने हमारी उत्पत्ति की और आप को यह अधिकार है कि हमारे साथ दास जैसा व्यवहार करें | आप ने हमें दासता के जुये से मुक्त करके उठा लिया है | आप हमें अपने दिव्य कामों की सुचना देते हैं | आप हमें अनजान नहीं रखते बल्कि पिता का नाम, क्रूस की शक्ती, और पवित्र आत्मा के प्रेम का ज्ञान देते हैं | पवित्र त्रिय का राज बताकर आप ने हम पर अनन्त परमेश्वर के छिपे हुए सत्य को भी प्रगट कर दिया | पिता ने यह सब बातें आप के हाथों में सोंप दीं ताकि आप उन्हें हमें बतते | आप की मित्रता इतनी महान है कि आप हमें अपने काम, महरबानी, सम्मान, शक्ति और जीवन में सहभागी कर लेते हैं | आप ने दत्तक-ग्रहण या पुत्र होने के अधिकार को भी अपने अधीन नहीं रखा बल्कि हमें अपने नजदीक लिया ताकि हम परमेश्वर की सन्तान बन जायें |

यूहन्ना 15:16-17
16 तुम ने मुझे नहीं चुना परन्तु मैं ने तुम्हें चुना है और तुम्हें नियुक्त किया कि तुम जाकर फल लाओ और तुम्हारा फल बना रहे, कि तुम मेरे नाम से जो कुछ पिता से मांगो, वह तुम्हें दे | 17 इन बातों की आज्ञा मैं तुम्हें इसलिये देता हूँ कि तुम एक दूसरे से प्रेम रखो |”

यीशु के साथ तुम्हारा रिश्ता प्रथमत: तुम्हारी इच्छा, अभिलाषा या अनुभव पर नहीं बल्कि आप के प्रेम, चुनाव और बुलावे पर निर्भर करता है | तुम शैतान की मुठ्ठी में अपने पाप के दास थे और मृत्यु के अधिकार में थे | तुम बंदीग्रह से बाहर न निकल सकते थे परन्तु यीशु ने तुम्हें अनन्त काल से चुन लिया और अपने बहुमूल्य रक्त से मुक्त किया | आप ने तुम्हें अपना मित्र बनाया और पुत्र बनने के अधीकार का वारिस बना लिया | आप का चुन लेना पूर्णतया अनुग्रह के कारण होता है | तुम्हारा केवल यही कर्तव्य बनता है कि या तो आप को चुन लो या अस्विकार करो | यीशु ने क्रूस पर जब तुम्हारे पापों का प्रायश्चित किया तब सब लोगों को चुन लिया |सब लोग आप के बुलावे की आवाज नहीं सुनते परन्तु पाप के दलदल में फसे रहना पसंद करते हैं | वो परमेश्वर की सन्तान की स्वतंत्रता को नहीं जानते | मसीह ने तुम को पाप से मुक्ती और दिव्य संगती के लिये बुलाया है | प्रेम से प्रशिक्षण लो | तुम्हारी स्वतंत्रता का एक ही उद्देश है, वह यह की अपने प्रभु और मानव जाति की स्वेच्छा से सेवा करना | दासों के समान तुम्हारे साथ कोई जबरदस्ती नहीं की जा रही है | यीशु प्रेम के कारण स्वच्छा से सेवक बने | आप हमारा नमूना हैं जो स्वय: परवाह नहीं करते परन्तु आप को अपने प्रियों की चिंता लगी रहती थी |

इस लिये आप कि यह तीव्र इच्छा है कि तुम अपने मित्रों की चिनता करो जैसे एक चरवाहा अपनी भेड़ों की चिंता करता है | क्योंकि हमारी योग्यतायें सीमित होती हैं, एक मनुष्य दूसरे को पाप की दास्ता से मुक्त नहीं कर सकता | यीशु हमें प्रोत्साहित करते हैं कि हम आप के नाम में प्रार्थना करें | यदि हम यीशु से प्रार्थना करें कि आप पाप की दस्ता से मुक्त हो चुके हुए लोगों का मार्गदर्शन करें, और उनको नैतिक और आत्मिक दृष्टी से उत्तेजीत/प्रोत्साहित करें और उनके शरीर, प्राण और आत्मा की हर आव्यश्कता पूरी करें तो प्रभु अपनी प्रसन्नता से इस प्रार्थना का उत्तर देंगे | प्रार्थना का उत्तर पाने का रहस्य, प्रेम है | यदि तुम अपने मित्रों के लिये इस आत्मिक नीती से प्रार्थना करो तो यीशु तुम्हारे आकस्मिक पाप बता देंगे और तुम्हें बुद्धिमान और उपयोगी जीवन बिताने, सच्ची प्रार्थना करने, टूटे हुए दिल और नम्रता की ओर मार्गदर्शन करेंगे | अगर तुम प्रार्थना करो कि उद्धर और पवित्रता तुम्हारे मित्रों तक पहुँचे तो प्रभु उसका उत्तर देंगे | हम तुम्हें हमेशा प्रार्थना करते रहने कि सलाह देते हैं | यीशु तुम्हें ऐसे परिणाम का वचन नहिं देते जो फीका पड जाये बल्कि ऐसे फल का जो हमेशा बने रहें | जो कोइ तुम्हारी प्रार्थनाओं और गवाही के कारण विश्वास करता है वह अनन्त काल तक जीवित रहेगा और मृत्यु से जीवन में प्रवेश करेगा |

विश्वास, प्रार्थनायें और गवाही के सिवाय यीशु तुम को आज्ञा देते हैं कि अपने मित्रों को दिल से प्रेम करो जो पवित्र हो | उनके टेढे व्यवहार के बावजूद उनके साथ धीरज से व्यवहार करो | उन के साथ धीरज से व्यवहार करो जैसा परमेश्वर तुम्हारे साथ व्यवहार करता है | परमेश्वर के प्रेम की चमक से इस भ्रष्ट और बिगड़ी हुई दुनिया को उज्वलित करो | अपने आप को सेवा करने, बलीदान देने, सुनने और उत्तर देने के लिये प्रशिक्ष्ण दो | मसीह का प्रेम तुम में से चमकता रहे |

प्रार्थना: ऐ प्रभु यिशु, हम आप का धन्यवाद करते हैं क्योंकि आप ने हमें पाप की दस्ता से मुक्त कर लिया है और हमें आप के प्रिय बना लिया है | हम चाहते हैं कि सब से प्रेम करें जैसे आपने हम से प्रेम किया | हम आप की आराधना करते हैं और अपने आप को आप को सौंप देते हैं | हमें आज्ञाकारी बनना सिखाईये ताकि हम प्रेम के फल अधिक मात्रा में लायें |

प्रश्न:

96. यीशु ने उन लोगों को अपने प्रिय कैसे बनाया जो पाप की दस्ता में थे ?

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