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यूहन्ना रचित सुसमाचार – ज्योती अंध्कार में चमकती है।
पवित्र शास्त्र में लिखे हुए यूहन्ना के सुसमाचार पर आधारित पाठ्यक्रम
चौथा भाग - ज्योति अन्धकार पर विजय पाती है (यूहन्ना 18:1 - 21:25)
ब - मसीह का पुनरुत्थान और दर्शन देना (यूहन्ना 20:1 - 21:25)
5. यीशु झील के किनारे पर प्रगट होते हैं (यूहन्ना 21:1-25)

डी) यूहन्ना की गवाही और उन का सुसमाचार (यूहन्ना 21:24-25)


यूहन्ना 21:24
“24 यह वही चेला है जो इन बातों की गवाही देता है और जिस ने इन बातों को लिखा है, और हम जानते हैं कि उसकी गवाही सच्ची है |”

यहाँ हम चार महत्वपूर्ण सच्चाईयां पाते हैं :

जब उन का सुसमाचार प्रकाशित हुआ तब प्रचारक यूहन्ना जीवित थे और यूनानी भाषा बोलने वाली कलीसियाओं में प्रसिद्ध थे | बपतिस्मा देने वाले यूहन्ना के समय से मसीह के आस्मान पर उठाये जाने तक वे यीशु के चेले बने रहे |

यूहन्ना यीशु मसीह के आँखों देखे गवाह थे | उन्हों ने मसीह के वचन को सुना और लिखा और वैसे ही उन्हों ने आप के आश्चर्यकर्मों को भी लिखा | इस सुसमाचार को कलीसियाओं के किसी सदस्य ने नहीं लिखा बल्कि स्वय: यूहन्ना ने एक प्रिय चेले के समान इसे लिखा |

संभव है कि वे यूनानी भाषा में प्रभावपूर्ण न थे इस लिये उन्हों ने अपने उच्च विचार स्वय: अपने एक अनुयायी से लिखवाये जो अनेक भाषाओँ का एक प्रतिभाशाली तज्ञ था | इस सुसमाचार के अर्थ स्पष्ट हैं और सभी सच्चाईयों में कोई परिवर्तन नहीं किया गया | जिन लोगों ने इस सुसमाचार को प्रसारित किया उन्हों ने एक आवाज हो कर स्विकार किया कि यूहन्ना की गवाही पूर्णत: विश्वासनीय है | यह स्विकृति आवश्यक थी क्योंकि यूहन्ना लिखित सुसमाचार के विषय दूसरे तीन सुसमाचारों से अलग थे | हमें आनन्द होता है कि यीशु के प्रिय चेले द्वारा लिखित यह अनोखा सुसमाचार हमारे खजानों का एक महत्वपूर्ण भाग बन गया है |

जिन लोगों ने इस सूसमाचार को प्रकाशित किया उन्हों ने एक मत से मसीह की सच्चाई को स्वय: अपने जीवन में प्रगट किया है और आप के नाम पर विश्वास करके परमेश्वर की सन्तान बनने का अधिकार पाया है | उन पर पवित्र आत्मा उतरा और उस ने उन में वास किया और उन्हें दुष्ट आत्माओं को पहचानने में सहायता की | उन्हों ने सत्य को झूट से और बढा चढ़ा कर कहने का फरक जाना और शान्ति की आत्मा का अनुभव किया जो उन्हें सब सत्य जानने में मार्गदर्शन करता था |

यूहन्ना 21:25
“25 और भी बहुत से काम हैं, जो यीशु ने किए; यदि वे एक एक करके लिखे जाते, तो मैं समझता हूँ कि पुस्तकें जो लिखी जातीं वे संसार में भी न समातीं |

कुछ लोगों के लिये चार सुसमाचारों की एक ही समय पर उपस्थिति ठोकर खाने का कारण बन जाती है | यदि हम इन में प्रेरित पौलुस के पत्रों को मिला दें (जिन्हें उन्हों ने सुसमाचार ही घोषित किया था) तब हमारे पास पाँच सुसमाचार हो जाते हैं; ठीक उसी तरह जैसे एक सच्चे मसीही का जीवन स्वय: एक सुसमाचार ही होता है | यूहन्ना के सुसमाचार का लेखक स्विकार करता है कि उस ने यीशु के कई वचन और काम का वर्णन आप के चेलों के मुँह से सुना था परन्तु वह उन सब को इकठ्ठा न कर सका | यीशु में परमेश्वर की परिपूर्णता पाई जाती है | आज भी आप अपनी कलीसिया में वास करते हैं और जैसे वह आप के बताये हुए मार्ग पर चलती है, उस का मार्गदर्शन करते हैं | यदि हम यीशु के मृतकों में से जी उठने के बाद से आज तक के सभी काम लिखने का प्रयत्न करें तो दुनिया में जितनी पुस्तकें और विशाल ग्रन्थ हैं, पर्याप्त न होते | यदि मसीही मानवजाति के इतिहास में मसीह ने किये हुए कामों में आप के प्रगट किए हुए प्रेम की ऊंचाई, चौड़ाई, गहराई और लम्बाई को ग्रहण करने का प्रयत्न करें तो यह प्रयोग अनन्त काल तक पूरा न होगा |

हमारे जीवित प्रभु नये नियम में लिखित आप के वचन के अनुसार काम करते हैं | हम अपने आप को धन्य समझते हैं क्योंकि हम आप की आवाज सुनते हैं, आप के विचारों को समझते हैं और आप के अनुसार चलते हैं | यूहन्ना यीशु मसीह के प्रेम का वर्णन करते हैं ताकि सभी लोग स्विकार करें कि, “हम ने उसकी ऐसी महिमा देखी जैसी पिता के एकलौते की महिमा, अनुग्रह और सत्य से परिपूर्ण | उस की भरपूरी से हम सब ने पाया वरन अनुग्रह पर अनुग्रह पाया |”

प्रार्थना: ऐ प्रभु यीशु मसीह, हम आप का धन्यवाद करते हैं क्योंकि आप ने अपने सेवक, यूहन्ना को आप के प्रेम का सुसमाचार लिखने के लिये प्रेरित किया | आप उन के शब्दों के द्वारा हम से बात करते हैं | हम आप की दया, आप के वचन, काम, जीवन, मृत्यु और पुनरुत्थान के लिये आप का धन्यवाद करते हैं | आप ने स्वर्गिय पिता को हम पर प्रगट किया और हमारे पाप क्षमा कर दिये | आप ने हमें अपनी आत्मा के द्वारे नया जीवन दिया है |

प्रश्न:

134. जिन लोगों ने यूहन्ना के सुसमाचार को प्रकाशित किया उन्हों ने क्या गवाही दी ?

प्रश्नावली - भाग 7

प्रिय पढ़ने वाले भाई,
अगर तुम हमें इन 24 में से 20 प्रश्नों के सही उत्तर लिख कर भेजोगे तो हम तुम्हें इस अध्ययन माला का अगला भाग भेज देंगे |

111. हन्ना के सामने पूछ ताछ के समय, यीशु और पतरस में क्या संबन्ध था ?
112. यीशु कैसे और किस प्रकार से राजा हैं ?
113. मारे पीटे हुए और बैंजनी वस्त्र पहने हुए शरीर और काँटों का मुकुट पहने हुए यीशु के चित्र से हम क्या सीखते हैं ?
114. पिलातुस ने यीशु को सजा क्यों दी ?
115. क्रूस पर लटकाई हुई उपाधी का क्या अर्थ होता है ?
116. यीशु के तीन शब्द कौन से थे ?
117. मसीह की हड्डियां नहीं तोड़ी गईं इस सत्य से हम क्या सीखते हैं ?
118. मसीह का दफनाया जाना हमें क्या सिखाता है ?
119. मसीह के पुनरुत्थान के संबन्ध में तीन सबूत कौन से हैं ?
120. जब यूहन्ना खाली कब्र में थे तब उन्हों ने किस बात पर विश्वास किया ?
121. मरियम प्रभु यीशु के शव को उस समय तक क्यों ढ़ूड़ती रही जब तक कि आप ने उसे अपने दर्शन न दिये और उस का नाम ले कर न पुकारा ?
122. मरियम मगदलीनी के ओंठों पर हमारे लिये मसीह का कौन सा संदेश है?
123. अपने पुनरुत्थान के बाद यीशु ने जो पहला वचन अपने चेलों को सुनाया उस का क्या अर्थ है ?
124. चेले प्रसन्न क्यों हुए ?
125. चेलों को भेजने में अनोखी बात क्या है ?
126. पवित्र आत्मा कौन है ? यीशु के विषय में तुम्हारी गवाही के द्वारा वह क्या करता है ?
127. थोमा की स्वीकृती का क्या अर्थ है ?
128. यीशु अपने उन विश्वासियों को धन्य क्यों कहते हैं जिन्हों ने आप को नहीं देखा ?
129. अपने सुसमाचार के अन्त में यूहन्ना किन बातों को विस्तार से बताते हैं ?
130. अधिक मात्रा में मछलियों को पकड़ना चेलों के लिये लज्जा का कारण क्यों बना ?
131. यीशु और पतरस के बीच जो वार्तालाप हुई उससे तुम किस प्रकार प्रभावित हुए ?
132. पतरस ने परमेश्वर को किस प्रकार महामंडित किया ?
133. इस सुसमाचार में लिखित मसीह के अन्तिम शब्दों का क्या अर्थ होता है ?
134. जिन लोगों ने यूहन्ना के सुसमाचार को प्रकाशित किया उन्हों ने क्या गवाही दी ?

अपना नाम और पता साफ़ अक्षरों में केवल लिफाफे पर ही नहीं बल्कि उत्तरों की पर्ची पर भी लिख कर इस पते पर भेजिये :

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