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यूहन्ना रचित सुसमाचार – ज्योती अंध्कार में चमकती है।
पवित्र शास्त्र में लिखे हुए यूहन्ना के सुसमाचार पर आधारित पाठ्यक्रम
पहला भाग – दिव्य ज्योति चमकती है (यूहन्ना 1:1 - 4:54)
क - मसीह का पहली बार यरूशलेम को चले आना (यूहन्ना 2:13–4:54) - सही उपासना क्या है?

3. दूल्हे यीशु के बारे में बपतिस्मा देने वाले यूहन्ना की गवाही (यूहन्ना 3:22–36)


बड़ी नम्रता के साथ गवाही देते हुए और मसीही आन्दोलन की प्रगती पर प्रसन्न होते हुए, यूहन्ना, मसीह की महानता और उनके सर्व श्रेष्ठ भाषणों की गवाही देते हुए कहते हैं:

यूहन्ना 3:31
“ 3 1 जो ऊपर से आता है वह सर्वोत्तम है; जो प्रथ्वी से आता है वह प्रथ्वी का है , और प्रथ्वी की ही बातें कहता है ; जो स्वर्ग से आता है, वह सब के ऊपर है |”

मनुष्य दुनियावी होते हैं और उन्हें नए सिरे से जन्म लेने की ज़रूरत होती है | सिर्फ मसीह ही आस्मानी थे, जो हमारे नज़दीक आये और हमें मुक्ती देने के लिए मनुष्य बने | यीशु नासरी सारे भविष्य वक्ताओं, तत्वज्ञानियों और नेताओं से श्रेष्ठ थे, ठीक उसी तरह जैसे आस्मान धरती से ऊंचा है| मनष्य के अविष्कार चकित करने वाले ज़रूर होते हैं परन्तु वे ऐसे पदार्थों से बनाये जाते हैं जिन्हें परमेश्वर ने बनाया है | पुत्र जीवन और ज्योती है और हमारे अस्तित्व का कारण है | आपमें और दूसरों में कोई तुलना नहीं है | पुत्र अनन्त काल से पिता से है |आप परिपूर्ण और सारे प्राणियों से श्रेष्ठ हैं |

यूहन्ना 3: 32-35
“32 जो कुछ उसने देखा और सुना है , उसी की गवाही देता है; और कोई उसकी गवाही ग्रहण नहीं करता | 33 जिसने उसकी गवाही ग्रहण कर ली उसने इस बात पर छाप लगा दी कि परमेश्वर सच्चा है | 34 क्योंकि जिसे परमेश्वर ने भेजा है , वह परमेश्वर की बातें कहता है ; क्योंकि वह आत्मा नाप नाप कर नहीं देता | 35 पिता पुत्र से प्रेम रखता है, और उसने सब वस्तुएँ उसके हाथ में दे दी हैं |”

यीशु जो मनुष्य बने, आस्मानी सच्चाईयों के आँखों देखे गवाह हैं | आप ने सच में परमेश्वर को देखा और उसके वचन को सुना है | आप उसके विचार और योजना जानते हैं |आप परमेश्वर का वचन हैं जो पिता की गोद से उतर आये |आप का प्रकाशित वचन संपूर्ण है | प्रकाशित वचन जो भविष्य वक्ताओं के साथ आया संपूर्ण नहीं है | यीशु परमेश्वर की इच्छा जो अंतिम और संपूर्ण है, प्रगट करते हैं | आप वफादार गवाह हैं जो उस गवाही के कारण शहीद हो गये | आप ने पिता की महीमा की | और स्वयं परमेश्वर का पुत्र होने की घोषणा की | परन्तु दुख इस बात का है कि आज भी लोग आप की गवाही कबूल नहीं करते | वो ऐसा परमेश्वर नहीं चाहते जो उनके नज़दीक हो कयोंकी उसके लिये उन्हें अपने जीवन में बदलाव लाना पड़ेगा | वो मसीह के पुत्र होने को अस्विकार करते हैं और परमेश्वर का पिता होने का खंडन करते हैं |

परमेश्वर की स्तुती करो कि सब लोग परमेश्वर और उसकी आत्मा से घृणा नहीं करते | एक चुना हुआ समुदाय है जो पुत्र में पिता को देखता है और उसके निर्दोष बलीदान को स्वीकार करता है | जो पुत्र के वचन और आप के द्वारा मिलने वाले उद्धार पर विशवास करता है वो परमेश्वर का सम्मान करता है | परमेश्वर झूठ नहीं बोलता और पुत्र सच्चाई है | पिता ने अपने विचार के तत्व का वर्णन किसी संविधान या पुस्तक में नहीं बल्की मसीह के व्यक्तित्व में किया | जो व्यक्ती आप के आत्मिक वचन को स्वीकार करता है, उसका नवीकरण हो जाता है | मसीह तुम को केवल सच बोलने के लिये नहीं बल्की उसके अनुसार जीने और कार्य करने के लिये बुलाते हैं | तब आपका सुसमाचार तुम में समां जायेगा |

यीशु ने किसी काल्पनिक वस्तु या अनिष्चित वचन या आशापूर्ण इच्छाओं का वर्णन नहीं किया बल्की आप का वचन उत्पादक शक्तीशाली और स्पष्ट है | परमेश्वर ने खुद अपने पुत्र के द्वारा कहा | आपके अन्दर असीम आत्मा है | पिता ने आप को ऐसी बुद्धी और अधिकार प्रदान किया जिसका कोई अन्त नहीं |

पिता पुत्र से प्रेम करता है और उसे सब कुछ सौंप दिया है| परमेश्वर का प्रेम उपहार है और पुत्र पिता का सम्मान करता है | प्रश्न यह नहीं है कि कौन बड़ा है, पिता या पुत्र? इस तरह के प्रश्न शैतान की तरफ से आते हैं | पवित्र त्रिय का हर व्यक्ती एक दूसरे कि प्रशंसा और सम्मान करता है | जो व्यक्ती इस सिद्धांत की उपेक्षा करता है वो प्रभु की उपेक्षा करता है | पिता को पुत्र की तरफ से अपनी सत्ता पर अधिकार जमा लेने का कोई डर न था क्योंकि परमेश्वर अपने पुत्र की नम्रता , आज्ञाकारी और पूर्ण समर्पण जानते थे | यीशु हर वस्तु पर शासन करते हैं, जैसा की आपने कहा, “मुझे आस्मान और पृथ्वी पर पूरा अधिकार दिया गया है |”

यूहन्ना 3: 36
“जो पुत्र पर विश्वास करता है, अनन्त जीवन उसका है; परन्तु जो पुत्र की नहीं मानता, वह जीवन को नहीं देखेगा, परन्तु परमेश्वर का क्रोध उस पर रहता है |”

प्रेरित यूहन्ना हमें उद्धार प्राप्त करने का तरीका बताते हैं | वो यह कि : “जो कोई पुत्र पर विश्वास करता है वो अनन्त जीवन पाता है |” इस छोटे से वाक्य में सारा सुसमाचार समाया हुआ है | जो व्यक्ती पिता और पुत्र के प्रेम की एकता कबूल करता है वो परमेश्वर के प्रेम के नज़दीक आता है जो क्रूस पर प्रगट हुआ | यह व्यक्ती परमेश्वर के मेमने पर यह जान कर विश्वास करता है कि इस मेमने ने हमें हमारे पापों से मुक्त किया है | मसीह के इस रिश्ते से हम आप के अनन्त प्रेम में आप की दया का अनुभव करते हैं | क्रूस पर चढ़ाये हुए पर विश्वास करने से आप का सत्य जीवन हम में प्रवेश करता है | अनन्त जीवन मृत्यु के बाद नहीं बल्की अभी शुरू होता है | पुत्र पर विश्वास करने वालों पर पवित्र आत्मा आता है | जो मनुष्य मसीह के वचन को, मसीह के पुत्र होने के दावे और क्रूस को अस्वीकार करता है वह पवित्र आत्मा को दुःख देता है | उसका अन्त:करण कभी चैन से ना रहेगा | जो मनुष्य अपने आपको मसीह को अर्पित नहीं करता वो परमेश्वर का विरोध करता है और वो आत्मिक मृत्यु की स्तिथी में जीता है | सभी धर्म जो पुत्र और उसके क्रूस के सिद्धांत का विरोध करते है, वो परमेश्वर की सच्चाई का अपमान करते हैं | जो मनुष्य मसीह के प्रेम को ठुकराता है, वो उसके क्रोध को चुनौती देता है|

प्रेरित पौलुस भी यूहन्ना के दृष्टिकोण का समर्थन करते हैं | परमेश्वर का क्रोध हर तरह के पाप और कुटिलता पर प्रकट होता है | क्योंकी सब ने पाप किया है और अपने अपराध के द्वारा सच्चाई का विरोध किया है | ऐसे लोगों को जान लेना चाहिए कि परमेश्वर का क्रोध जो नाश कर देता है मानव जाती पर उंडेला जायेगा |

जिस तरह जंगल में ऊंचे पर उठाया हुआ सांप एक चिन्ह बन गया था उसी तरह क्रूस पर अपना बलिदान करने वाले मसीह, परमेश्वर के क्रोध से उद्धार पाने का चिन्ह बन गए हैं | पुत्र ने अनुग्रह का मार्ग खोल दिया है | जो व्यक्ती क्रूस के द्वारा मिलने वाले अनुग्रह से मुह मोड़ लेता है वो जान बूझ कर न्याय की प्रतीक्षा करता है | ऐसे मनुष्य में शैतान अपने पांव जमा लेता है | मसीह के बगैर लोग अपराधी बन जाते हैं | तुम कब लोगों के लिए प्रार्थना करोगे ताकी वो पुत्र पर विश्वास करें और उद्धार पायें ? तुम कब अपने मित्रों के साथ धैर्य के साथ बातें करोगे ताकी वो तुम्हारी गवाही सुन कर परमेश्वर का प्रदान किया हुआ जीवन पायें?

प्रार्थना: प्रभु यीशु , हम आपके प्रेम और सच्चाई के लिए आप का धन्यवाद करते हैं | हम आपकी अराधना करते हैं और आप से विनंती करते हैं कि हमें आज्ञाकारी दिल दीजिए जो विश्वास में पक्का और पिता परमेश्वर का सम्मान करे | हम विश्वास के साथ घोषित करते हैं कि आप और पिता एक हैं | आप उन लोगों पर दया कीजिये जो अज्ञानता से आप को अस्वीकार करते हैं | उन्हें अपने वचन से सूचित कीजिये | जिन लोगों की तरफ आप हमें भेज रहे हैं उन्हें ढूंडने के लिये हमारी सहायता कीजिये ताकी हम उन्हें आप के और आप के हमारे लिये किये हुये कामों के विषय में बता सकें |

प्रश्न:

31. हम अनन्त जीवन किस तरह प्राप्त कर सकते हैं?

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