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यूहन्ना रचित सुसमाचार – ज्योती अंध्कार में चमकती है।
पवित्र शास्त्र में लिखे हुए यूहन्ना के सुसमाचार पर आधारित पाठ्यक्रम
दूसरा भाग – दिव्य ज्योती चमकती है (यूहन्ना 5:1–11:54)
ब - यीशु जीवन की रोटी हैं (यूहन्ना 6:1-71)

5. चेलों का छोड़ कर चले जाना (यूहन्ना 6:59-71)


यूहन्ना 6:59–60
“59 ये बातें उसने कफरनहूम के एक आराधनालय में उपदेश देते समय कहीं | 60 उसके चेलों में से बहुतों ने यह सुनकर कहा, ‘यह कठोर बात है; इसे कौन सुन सकता है ?’”

परमेश्वर की रोटी और यीशु के शरीर को खाने की वार्तालाप अलग अलग अवसर पर हुई | आप ने इस वार्तालाप के कुछ विषयों को दुहराया और धीरे धीरे उनके अर्थ की गहराई तक पहुँचे | यधपि प्रचारक यूहन्ना ने यह सब विचार विमर्श एक ही जगह लिख दिये | हम यीशु को कफरनहूम के आराधनालय में अपने अनुयाईयों को यह शिक्षा देते हुए देखते हैं कि आप मूसा से बेहतर हैं और यह की सब विश्वासी आप का शरीर खायें और लहू पियें |

ऐसा अनावरण आप के निष्ठावान शिष्यों की भी समझ से बाहर था | वे प्रश्न पूछने और संदेह करने लगे | उन्होंने निश्चय किया था कि वो परमेश्वर की आज्ञा मानेंगे और उसकी सेवा करेंगे परन्तु वो मांस खाने और लहू पीने के विचित्र विचार पर भ्रम में पड़ गये | जब आप के चेलों के मन अत्यन्त आश्चर्य में पड़ गये तब प्रभु ने दयापूर्वक अपने निष्ठावान चेलों के मन खोल दिये ताकी वो जीवन की रोटी के दृष्टान्त का अर्थ समझ सकें |

यूहन्ना 6:61–63
“61 यीशु ने अपने मन में यह जान कर कि मेरे चेले आपस में इस बात पर कुड़कुड़ाते हैं, उनसे पूछा, ‘क्या इस बात से तुम्हें ठोकर लगती है? 62 यदि तुम मनुष्य के पुत्र को जहाँ वो पहले था, वहाँ ऊपर जाते देखोगे, तो क्या होगा? 63 आत्मा तो जीवनदायक है, शरीर से कुछ लाभ नहीं; जो बातें मैं ने तुम से कही हैं वे आत्मा हैं, और जीवन भी हैं |”

यीशु ने अपने चेलों के विचारों को जान लिया परन्तु उनके प्रश्नों की निंदा नहीं की | उनके आरोप अविशवासियों की तरह भ्रष्टाचार के ना थे परन्तु इसलिये कि वे मसीह के दृष्टान्त को समझने में असमर्थ थे | परन्तु इससे पहले कि यीशु उन्हें कोई जानकारी दें वो इस दृष्टान्त की अस्पष्टता को दूर कर देते हैं और दुनिया के उद्धार की योजना को पूरी तरह से समझाते हैं |

आप उनके लिये केवल अपनी जान ना देंगे ताकी वो आप के शरीर को आत्मिक रूप से खा लें बल्की आप आस्मान पर अपने पिता के पास उठा लिये जायेंगे जहां से आप उतरे थे | यही वो व्यक्ती है जो आस्मान से आता है परन्तु हमारी दुनिया में ना रहेगा | उन्होंने आप को झील पर चलते हुए देखा था और अनुभव किया था कि आप अतिमानवीय व्यक्ती हैं | आप अपने पिता के पास इस लिये ऊपर जायेंगे ताकी अपना आत्मा अपने अनुयाईयों पर उंडेल दें | यही आप की मृत्यु का कारण और आने का उद्देश है | आप का वरदान अनुयाईयों के लिये मांस का तुकड़ा नहीं बल्की उनके दिलों में उतर जाना है | आप का शरीर हमारे दिलों में नहीं उतरता बल्की आप का पवित्र आत्मा उतरता है |

यीशु ने बताया कि शरीर से कोई लाभ नहीं होता | शुरू में हमारी उत्पत्ती पवित्र और साफ थी परन्तु बाद में हमारे विचार और अस्तित्व भ्रष्ट हो गये | हम अपने शरीर में सच्चा जीवन जीने की नहीं बल्की केवल पाप करने की शक्ती पाते हैं | स्वंय यीशु का शरीर निर्बलता कि ओर प्रवृत था इसलिये आप ने कहा , ‘जागते रहो और प्रार्थना करते रहो कि तुम परिक्षा में ना पड़ो | आत्मा तो तैयार है परन्तु शरीर दुर्बल है |’

परमेश्वर की स्तुती करो क्योंकी यीशु के शरीर में हमेशा पवित्र आत्मा रहता था | इस आत्मा का आप में उपस्थित रहना आपके अस्तित्व का रहस्य था | आप अपनी मृत्यु, पुनरुत्थान और स्वर्गारोहण के द्वारा हमें आत्मा और शरीर की एकता का वरदान देना चाहते थे और आप के पवित्र आत्मा के द्वारा हमारे दुर्बल शरीर में प्रवास करना चाहते थे | इस से पहले आप ने यूहन्ना के पानी से बपतिस्मा देने और पेंतेकुस्त के दिन आत्मा के बपतिस्मे की तरफ इशारा करते हुए निकुदेमुस को स्पष्ट रूप से बताया था कि पानी और आत्मा हमें परमेश्वर के राज्य में प्रवेश करने में सहायता करते हैं | जीवन की रोटी के प्रवचन के प्रसंग पर यीशु ने अपने चेलों को बताया कि जब वो प्रभु भोज लेते हैं तब आप उनके पास और उनके ऊपर आ जाया करेंगे | परन्तु शर्त यह है कि जब तक पवित्र आत्मा हम पर नहीं उतरता, इन चिन्हों का कोई लाभ नहीं होगा | पवित्र आत्मा हमें पुनर्जीवित करता है, शरीर से कोई लाभ नहीं होता | मसीह की आत्मा ही विश्वासियों में आपकी उपस्तिथी की गेरंटी है |

पवित्र आत्मा हम पर कैसे उतरता है ? यह उन लोगों के लिये मुख्य प्रश्न है जो मसीह के शरीर और लहू (प्रभु भोज) में सहभागी होने की तैयारी करते हैं ताकी आप के साथ परिपूर्ण एकता से आपके साथ जियें | यीशु ने केवल यह उत्तर दिया, “मेरा वचन सुनो और अपना दिल सुसमाचार के खजाने के लिये खोल दो |” मसीह परमेश्वर का वचन हैं | जो कोई आपका वचन सुनता है और आप पर विश्वास करता है वो पवित्र आत्मा से परिपूर्ण हो जाता है | पवित्र वचन के बहुत से पदों को याद करके अपनी ममता को परमेश्वर की शक्ती से भर लो | अगर तुम परमेश्वर के वचन पर स्थिर रहो और उन्हें थामे रहो तो तुम निर्माताओं और उनकी खोज से ज़्यादा शक्तीशाली बन जाओगे क्योंकी मसीह के उद्धार करने वाले वचन से सृष्टी का निर्माता तुम पर उतरेगा और तुम्हें अपना जीवन और अधिकार देगा |

यूहन्ना 6:64–65
परन्तु तुम में से कुछ ऐसे हैं जो विश्वास नहीं करते |’ क्योंकि यीशु पहले ही से जानता था कि जो विश्वास नहीं करते, वे कौन हैं; और कौन मुझे पकड़वाएगा | 65 और उसने कहा, ‘इसी लिये मैं ने तुम से कहा था कि जब तक किसी को पिता की ओर से यह वरदान न दिया जाए तब तक वह मेरे पास नहीं आ सकता |’ ”

यीशु के बहुत से अनुयायी जो इस महत्वपूर्ण संकेत को समझ ना सके, उन्हें छोड़ कर चले गये | आप का मांस खाने और लहू पीने की वार्तालाप गलील में आपकी सेवा का केन्द्र बिंदु बन गया और यही कारण था कि आप के अनुयायी आप को छोड़ कर चले गये | इस तरह इस वादविवाद के बाद चेलों की संख्या घट गई | इस तरह छोड़ कर जाने वालों के मन मनुष्य के दृष्टिकोण की हद पार करने के लिये तैयार ना थे ताकी वो यीशु पर बिना शर्त विश्वास करते | वो आपकी दिव्यता की सच्चाई जान ना सके और आप के बलीदान के आधार पर आप से समझौता ना कर सके |

यीशु ने अपने चेलों से कहा था कि उनमेसे कुछ आपकी आत्मा का विरोध करेंगे और उसे अपने अन्दर ना लेंगे | प्रभु उनमेसे प्रत्येक व्यक्ती को अपने मन की मनोकामना में देख सकते थे | आप यहूदा इस्केरिओत के विश्वासघात को जानते थे जो पहले से ही आपके चेलों के समुदाय में आ चुका था | यहूदा मसीह के प्रेम की आत्मा पाने के लिये पूरी तरह से अपना दिल खोलना ना चाहता था | जब यीशु अपनी मृत्यु के विषय में बोल रहे थे तब आप जानते थे कि इन उपस्थित लोगों में से एक आपको पकड़वायेगा |

अन्त में एक बार फिर यीशु ने दोहराया कि परमेश्वर की आत्मा मनुष्य के जीवन में काम किये बिना कोई व्यक्ती आप पर विश्वास नहीं कर सकता | पवित्र आत्मा के मार्गदर्शन के बिना कोई भी व्यक्ती यीशु को प्रभु नहीं कह सकता | हमारा धर्म केवल विश्वास ही नहीं परन्तु आत्मा के काम के द्वारा यीशु के साथ व्यक्तीगत एकता है | पिता जैसी आत्मा के आकर्षण के लिये अपनी अंतरात्मा को खोल दो और यीशु की किसी भी सच्चाई का विरोध ना करो तब तुम यीशु के अपने अन्दर आकर हमेशा रहने का अनुभव कर पाओगे | यीशु तुम्हारे लिये तैयार की गई जीवन की रोटी हैं |

प्रश्न:

50. जीवन देने वाली आत्मा मसीह के शरीर से कैसे जोड़ी गई?

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