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यूहन्ना रचित सुसमाचार – ज्योती अंध्कार में चमकती है।
पवित्र शास्त्र में लिखे हुए यूहन्ना के सुसमाचार पर आधारित पाठ्यक्रम
चौथा भाग - ज्योति अन्धकार पर विजय पाती है (यूहन्ना 18:1 - 21:25)
अ - गिरिफ्तारी से गाड़े जाने तक की घटनायें (यूहन्ना 18:1 - 19:42)
4. क्रूस और यीशु की मृत्यु (यूहन्ना 19:16-42)

5) यीशु की पसली का छेदा जाना (यूहन्ना 19:31-37)


यूहन्ना 19:31-37
“31 इसलिये कि वह तैयारी का दिन था, यहूदियों ने पिलातुस से विनती की कि उनकी टाँगें तोड़ दी जाएँ और वे उतारे जाएँ, ताकि सब्त के दिन वे क्रूस पर न रहें, क्योंकि वह सब्त का दिन बड़ा दिन था | 32 अत: सैनिकों ने आकर उन मनुष्यों में से पहले की टाँगें तोडीं तब दूसरे की भी, जो उस के साथ क्रूस पर चढ़ाये गये थे; 33 परन्तु जब यीशु के पास आकर देखा कि वह मर चुका है, तो उसकी टाँगें न तोडीं | 34 परन्तु सैनिकों में से एक ने बरछे से उसका पंजर बेधा, और उस में से तुरन्त लहू और पानी निकला | 35 जिस ने यह देखा, उस ने गवाही दी है, और उसकी गवाही सच्ची है; और वह जानता है कि वह सच कहता है कि तुम भी विश्वास करो | 36 यह बातें इस लिये हुईं कि पवित्रशास्त्र में जो कहा गया वह पूरा हो, ‘उस की कोई हड्डी तोड़ी न जाएगी |’ 37 फिर एक और स्थान पर यह लिखा है, ‘जिसे उन्हों ने बेधा है, उस पर वे दृष्टि करेंगे |’”

अपनी व्यवस्था का कट्टर पालन करने के कारण यहूदी सहानुभूती की भावना से वंचित थे | मूसा की व्यवस्था के अनुसार हत्या से मरे हुए लोगों के शव रात की शुरुआत से पहले हटाये जाने चाहिये थे | इसलिये यहूदियों ने यह नियम क्रूस पर चढ़ाये हुये तीन व्यक्तियों के लिये लगाया | वे अपने पर्व के समय ऐसे कुरूप दृश्य को देखने के लिये इच्छुक न थे | इसलिये उन्हों ने पिलातुस से आग्रह किया कि वह उन के पाँव की हड्डियां तुड़वाये ताकि उन तीनों की मृत्यु शीघ्र हो | क्रूस पर चढ़ाये हुए व्यक्ति कभी कभी तीन दिन तक भी जीते हैं | हाथ और पाँव में कीले ठोकने से हमेशा अधिक खून नहीं जाता | इस लिये फ़ौजी सिपाही ने उन के शरीर को विकृत करने के लिये उन के पाँव की हड्डियां तोड़ डालीं |

फौजी सिपाही यीशु के पास आकार रुक गये और देखा कि आप पहले से ही मर चुके थे | आप का कोमल शरीर कोड़े लगाने से कमजोर हो गया था और आप का प्राण हमारे पापों के बोझ और दुनिया पर परमेश्वर के क्रोध से अत्यंत पीड़ा में था | यीशु ने स्वय: अपनी इच्छा से प्राण दे दिए ताकि हमारा परमेश्वर से मिलाप हो | धार्मिक मामले में कोई विशेष संबंध न रखते हुए यहूदी उत्सुक थे कि यीशु जल्द मर जायें | एक सिपाही ने भाला ले कर उसे यीशु की छाती में आप के दिल के निकट भोंक दिया जिस के कारण खून और पानी बह निकला जिस से सिद्ध हुआ की आप गुड फ्राईडे के छटे घंटे से पहले ही दम तोड़ चुके थे |

यह घट्ना मसीहियों को बताती है कि परमेश्वर तीन दृष्टि से विजयी रहा | पहला यह कि शैतान ने यहूदियों को उकसाया कि वे यीशु की हड्डियां तुडवाने का प्रयत्न करे ताकि कोई व्यक्ति यह दावा न करे कि क्रूस पर चढ़ाया हुआ व्यक्ति दिव्य बलि था | फसह की रीती के अनुसार मेमने में कोई विकृति न हो और उस की कोई हड्डी टूटी हुई न हो (निर्गमन 12:46) | इस तरह परमेश्वर ने मृत्यु में भी अपने पुत्र को सुरक्षित रखा ताकि कोई यह न कहे कि आप परमेश्वर के नियुक्त मेमने न थे |

दूसरा यह कि सिपाही ने यीशु कि पसली में जो भाला भोंका उस का प्रमाण जकर्या 12:10 में पाया जाता है | जकर्या 11:13 में भविष्यवक्ता ने देखा कि पुराने नियम के लोग अपने चरवाहे का मूल्य चांदी के तीस सिक्कों से अधिक न समझते थे | इस अपमानजनक राशी के बावजूद दाउद के घराने और यरूशलेम के वासियों पर परमेश्वर के अनुग्रह और प्रार्थना का आत्मा उंडेला गया ताकि उन की आँखें खुल जायें और वे जानें कि क्रूस पर चढ़ाया हुआ व्यक्ति कौन है और उस के पिता की पहचान क्या है | इस सूचना के बगैर वे परमेश्वर को और उस के उद्धार को न जान सकेंगे | क्रूस पर चढ़ाया हुआ व्यक्ति ही परमेश्वर का आत्मा पाने का एक मात्र उपाय है, जैसा कि हम पढ़ते हैं, “वह उसे टकटकी बाँध कर देखेंगे जिसे उन्होंने छेदा था |

तीसरा यह कि जो चेला ईमानदारी से क्रूस के निकट खड़ा रहा वह सब घटनाओं और बातों का आँखों देखा गवाह था जो वहाँ घडीं और कही गईं | वह सिपाहियों को देख कर भाग न गया और न अपने प्रभु को आप की मृत्यु के बाद अकेला छोड़ कर गया | उस ने यीशु के सीने को छेदते हुए देखा और वह हमें परमेश्वर के पुत्र और पवित्र आत्मा के प्रेम की गवाही देता है ताकि हम पवित्र त्रिय की एकता और अनन्त जीवन पर विश्वास करें |

प्रार्थना: प्रभु यीशु मसीह, आप ने पाप, शैतान और अन्तिम निर्णय पर विजय पायी | आप जीवित परमेश्वर हैं और पिता और पवित्र आत्मा की एकता के साथ राजा हैं |

प्रश्न:

117. मसीह की हड्डियां नहीं तोड़ी गईं इस सत्य से हम क्या सीखते हैं ?

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