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यूहन्ना रचित सुसमाचार – ज्योती अंध्कार में चमकती है।
पवित्र शास्त्र में लिखे हुए यूहन्ना के सुसमाचार पर आधारित पाठ्यक्रम
पहला भाग – दिव्य ज्योति चमकती है (यूहन्ना 1:1 - 4:54)
अ - प्रभु के वचन का यीशु में अवतारित होना (यूहन्ना 1:1-18)

1. अवतारित होने से पहले वचन का जौहर और काम (यूहन्ना 1:1-5)


यूहन्ना 1:5
5 और ज्योति अन्धकार में चमकती है और अन्धकार ने उसे ग्रहण न किया|

परमेश्वर की दृष्टी में हर चीज़ उज्ज्वल और शुद्ध होती है। वह दृष्टी के सामने होती है और सुन्दर भी होती है| उसके प्रभाव के क्षेत्र में अन्धकार नहीं होता| हर वस्तु साफ, ईमानदार, सत्यवादी और पवित्र होती है| अपवित्रता को उसके आस पास कोई जगह नहीं मिल सकती| पवित्र आत्मा शुद्ध है और प्रभु की ज्योती कठोरता से नहीं बल्की नम्रता से चमकती है और आराम पहुंचाती है और तन्दरुस्ती देती है|

मसीह के ज्योती की किरणें आकाश तक ही सीमित नहीं होतीं बल्की वो अन्धकार को चीरती हैं और मुक्ती दिलाती हैं| यह आश्चर्यजनक अनुग्रह है कि आज भी मसीह सारे अन्धकार के बीच में चमक रहे हैं| आप खोये हुए लोगों को त्याग नहीं करते परन्तु मुक्त करते और उनके दिमाग प्रकाशित करते हैं|

हमें ज्योती द्वारा चमकने वाली दुनिया के विरुध अन्धकार में पड़ी हुई दुनिया के अस्तित्व को मानना पड़ेगा| हम विस्त्रित्व रुप से नहीं जानते की अन्धकार कहां से आया| प्रचारक यूहन्ना ने भी यह भेद हम पर प्रगट नहीं किया| वे चाहते थे की हम ज्योती को जानें परन्तु अन्धकार की गहराई में न झांकें| सब लोग और प्राणी अन्धकार में उलझ गये और सारी दुनिया शैतान के प्रभाव में आ गयी|

हो सकता है कि तुम पूछो: अगर मसीह ने परमेश्वर के साथ विचार विनमय करके विश्व की उत्पत्ति की तो उसमें अन्धकार कैसे घुस पाया? परमेश्वर ने मानव जाती की अपने प्रतिरुप के अनुसार उत्पत्ति की फिर आज हम में उसकी महीमा क्यों नहीं पायी जाती?

यूहन्ना ने शैतान का नाम लेकर उसका वर्णन नहीं किया जिसने अपने प्रभु की आज्ञा नहीं मानी और उसकी ज्योती को बुझाने का प्रयत्न किया| उसने हमेशा मसीह का विरोध किया इस लिये उसने वह ज्योती खो दी जो उसे प्रदान की गई थी| वह घमंडी हो गया और उसने परमेश्वर के बिना अपने आप को महान बनाने की कोशिश की| वह परमेश्वर पर विजय पाने के लिये उस से ऊंचा स्थान प्राप्त करना चहता था| उसी समय वह अन्धकार का राजकुमार बन गया|

प्रिय भाई, आपके जीवन का उद्देश क्या है? क्या तुम परमेश्वर के बिना अपने लिये महानता, कीर्ति और संतोष की खोज में हो? अगर ऐसा है तो तुम भी उस शैतान की तरह उन लोगों में से हो जो अन्धकार में पड़े हैं| क्योंकी वह अकेला नहीं रहा बल्की लाखों लोगों को अपने साथ अन्धकार में घसीट कर ले गया| रास्ते में चलते हुए तुम्हारे पास से निकल जाने वाले लोगों के चेहरों को देखो| तुम को उनकी आँखों में क्या दिखाई देता है, ज्योती या अन्धकार? क्या उनके दिल परमेश्वर की खुशी प्रगट करते हैं या शैतान की उदासी?

शैतान परमेश्वर से नफ़रत करता है क्योंकी आपकी पवित्र ज्योती उसका न्याय करती है| वह नहीं चाहता की ज्योती उसकी कठोरता का परदा खोल दे| इस लिये वह अपने चहरे पर परदा डाल कर छिप जाता है और मसीह और आपकी ज्योती के पीछे चलने वालों पर विजय पाने का प्रयत्न करता है| यह धोकेबाज प्रभु की ज्योती को सहन नहीं कर सकता बल्की उस से नफ़रत करता है| वह जानबूझ कर अपना चेहरा ढांक लेता है ताकी ज्योती को महसूस ना कर सके| डर की बात यह है की लाखों लोग अपने पापों की अंधेरी रात में मसीह के चमकते हुए सूरज को देख नहीं पाते| हम जानते हैं की सूरज क्या है| इसे स्पष्ट करने की ज़रूरत नहीं है| वह स्वयं ऊगता है, चमकता है, साफ तौर पर दिखाई देता है और अपनी ऊष्णता को फैलाता है| हर छोटा बच्चा भी जनता है की वह जीवन का स्त्रोत्र है|

लेकिन ज़्यादातर लोग मसीह की महीमा और आप की शक्ती को महसूस नहीं करते क्योंकी वह उसको समझना नहीं चाहते| धोका देने वाले विचार उनकी आँखों को ढांक देते हैं जैसे उनपर कोई मोटा कम्बल डाला गया हो, इसलिये वो मसीह की दिव्यता के सत्य संदेश को ठुकरा देते हैं| दर असल वो स्वंय अपने पापों को जानना नहीं चाहते| वो ज्योती के नज़दीक आना नहीं चाहते बल्की अन्धकार में रहना पसन्द करते हैं| ना वो संयम से काम लेते हैं और ना अपने पापों को कबूल करते हैं| वो घमंडी बन जाते हैं| वो मसीह की ज्योती के अनुग्रह को देख नहीं पाते| अन्धकार ज्योती का विरोध करता है परन्तु ज्योती प्रेम से उस पर विजय पाती है| तो फिर आप कौन हैं? प्रभू की तरफ से ज्योती या शैतान की तरफ से अन्धकार?

प्रार्थना: हे प्रभू, आप जगत की ज्योती हो| हम विश्वास से आप के पीछे चलते हैं और आप के प्रेम में बने रहते हैं| हम अन्धकार में नहीं चलते बल्की हम ने जीवन की ज्योती पाई है| हम आप का धन्यवाद करते हैं क्योंकी आप ने हमें परमेश्वर के क्रोध के अंधकार में भयभीत होने के लिये अकेला नहीं छोडा बल्की आपने हमें अपनी साफ ज्योती की तरफ बुलाया| हमारे चारों तरफ बसे हुए अनगिनित लोगों के विचारों को प्रकाशित कीजिये| आप उनके चारों तरफ चमकते रहते हैं फिर भी उन्होंने आप को नहीं देखा| हमारे मन को प्रकाशित करने वाले प्रभू, हम पर दया कीजिए और हम को ज्योती प्रदान कीजिये|

प्रश्न:

8. आत्मिक दृष्टी से ज्योती और अन्धकार में क्या असमानता है|

जो लोग अंधकार में चल रहे थे उन्हों ने बड़ा उजियाला देखा;
और जो लोग घोर अन्धकार से भरे हुए मृत्यु के देश में रहते थे,
उन पर ज्योती चमकी|
(यशायाह 9:2)

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