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यूहन्ना रचित सुसमाचार – ज्योती अंध्कार में चमकती है।
पवित्र शास्त्र में लिखे हुए यूहन्ना के सुसमाचार पर आधारित पाठ्यक्रम
पहला भाग – दिव्य ज्योति चमकती है (यूहन्ना 1:1 - 4:54)
अ - प्रभु के वचन का यीशु में अवतारित होना (यूहन्ना 1:1-18)

2. बपतिस्मा देने वाला यूहन्ना, मसीह का रास्ता तैयार करता है (यूहन्ना 1:6-13)


यूहन्ना 1:11-13
“11 वह अपने घर आया और उसके अपनों ने उसे ग्रहण नहीं किया | 12 परन्तु जितनों ने उसे ग्रहण किया, उस ने उन्हें परमेश्वर के सन्तान होने का अधिकार दिया, अर्थात उन्हें जो उसके नाम पर विश्वास रखते हैं | 13 वे न तो लोहू से, न शरीर की इच्छा से, न मनुष्य की इच्छा से,परन्तु परमेश्वर से उत्पन्न हुए हैं |”

पुराने नियम के लोग परमेश्वर के अपने थे क्योंकी प्रभु ने इन पापियों को पवित्र कर के एक वाचा के द्वारा खुद को इनसे बान्ध लिया था | उसने सैकडो साल तक उनका मार्गदर्शन किया, व्यवस्था के हल से उनके दिलों को जोता और सुसमाचार का बीज बोने के लिये तैयार किया | इस प्रकार इब्राहीम के वंश का ध्यान मसीह के आने की तरफ निदेशित किया | पुराने नियम का उद्देश और मतलब मसीह के प्रगट होने से था |

यह अनोखा सत्य है कि जो लोग प्रभु यीशु का स्वागत करने के लिये चुने गये थे उन्होंने आपको अस्वीकार किया और आप की ज्योती को स्वीकार नहीं किया | उन्होंने व्यवस्था के अन्धकार में जीना पसन्द किया और सज़ा पाने में जल्दबाज़ी की | इस प्रकार उन्होंने अनुग्रह को पूरी तरह से खो दिया और मसीह में पापों से उद्धार पाने के बदले अपने कामों को ज्यादा पसन्द किया | उन्होंने पश्चताप नहीं किया परन्तु सच्चाई की आत्मा के विरुद्ध अपने दिलों को कठोर बना लिया |

सिर्फ पुराने नियम के लोग परमेश्वर की संपत्ति नहीं थे परन्तु पूरी मानव जाती भी आप ही की थी क्योंकी सर्वशक्तीमान परमेश्वर ने पत्थर, पेड़, पौधे, जानवर और मानव जाती की भी रचना की थी | इस कारण दुनिया के सब लोग भी पुराने नियम के लोगों की तरह उत्तरदायित्व हैं | हमारा निर्माता और मालिक हमारे दिलों और घरों में प्रवेश करना चाहता है | इस लिये कौन उसका स्वागत करेगा? आप परमेश्वर के अपने हैं | क्या आपने अपने आप को प्रभु को सोंप दिया है? दुर्भाग्य की बात यह है कि आज भी बहुत से राष्ट्र मसीह की ज्योती को अपनाने के लिये तैयार नहीं हैं | वो नहीं चाहते की आपकी मित्रता की किरणें उनके कठोर अन्धकार पर पड़ें | इस प्रकार एक बार फिर वे इस जीवन काल में परमेश्वर के बेटे को मानने से इन्कार करते हैं |

इब्राहीम के वंश का या कोई और मानव जाती का मनुष्य मसीह के लिये अपना दिल खोल देता है और अपने आप को सर्व शक्तिमान उद्धारकर्ता के हाथों में सौंप देता है वो एक बड़े आश्चर्यक्रम का अनुभव करता है क्योंकि आस्मानी ज्योती उसे दिव्य ज्योती से सूचित करेगी और अन्धकार जो हमारे दिलों में निवास करता है उसे पराजित करेगी | परमेश्वर की शक्ती भी उसके दिल में प्रवेश करेगी और उसके अंत:करण को बदल देगी |मसीह तुम्हें पाप की गुलामी से मुक्ती देते हैं | आप, तुम्हें परमेश्वर के आज़ाद सन्तानों में बदल देंगे |अगर तुम मसीह से प्रेम करते हो तो पवित्र आत्मा तुम में निवास करेगा और तुम्हारे जीवन में उद्धार के काम शुरू करेगा |

अब प्रचारक यूहन्ना यह नहीं कहते हैं कि हम परमेश्वर के सन्तान बनेंगे या बन गये हैं परन्तु यह कि आत्मिक विकास से उसके सन्तान बन जायेंगे |इन शब्दों के बीच हम बड़ी असमानता पाते हैं क्योंकि जो मसीह पर विश्वास करेगा वह नये अस्तित्व में प्रवेश करेगा | साथ ही साथ वह उसके आत्मिक जीवन का और परिपूर्णता से विकास करता रहेगा | प्रभु की शक्ती ने नया जीवन दिया और यही शक्ती हमारा पवित्रीकरण करेगी और हमें परिपूर्णता प्रदान करेगी |

हम सिर्फ गोद लिये जाने से ही परमेश्वर की सन्तान नहीं बने परन्तु हम आत्मिक जन्म के द्वारा सन्तान बने | मसीह की आत्मा का हमारे दिलों में समाने का मतलब यह है कि हम प्रभु के अधिकार से परिपूर्ण हुए | विश्वासियों पर इस दिव्य अधिकार का उंडेला जाना इस तथ्य का संकेत देता है कि इस दुनिया में या अन्तकाल में कोई शक्ती उन्हें दिव्य नैतिक गुणों में परिपूर्ण होने से नहीं रोक सकती | मसीह विश्वास के संस्थापक और उसके परिपूर्ण करने वाले हैं |

परमेश्वर की सन्तान और दुनिया के बच्चों की एक दूसरे से तुलना नहीं की जा सकती | हम अपने माता पिता से पैदा हुए जिन्होंने हमें अपने स्वभाविक प्रयास और पूर्व निरधारित योजना के अनुसार जन्म दिया | हो सकता है कि उन्होंने आत्मा के मार्गदर्शन के अनुसार इकट्ठे प्रार्थना की होगी, परन्तु हमारे माता पिता से मिल ने वाली सब आत्मिक, मानसिक और शारीरिक विरासत का परमेश्वर की तरफ से मिलने वाले नये जन्म से कोई सम्बंध नहीं है क्योंकि आत्मिक नविकरण शुरू से ही पवित्र होता है और वह परमेश्वर से आता है जिसके द्वारा प्रत्येक मसीही सीधा पैदा होता है क्योंकि वही हमारा सच्चा आत्मिक पिता है |

कोई भी बच्चा अपने आप जन्म नहीं ले सकता | उसे जन्म दिया जाता है और इस तरह हमारी आत्मिक पैदाइश शुद्ध अनुग्रह है | मसीह हमारे दिलों में सुसमाचार के बीज बोते हैं | जिस किसी को इन बीजों से प्रेम होता है वह इन्हें स्वीकार करता है और इन्हें संभाल कर रखता है | उस व्यक्ती में परमेश्वर का अनंत जीवन उन्नती पाता है | धन्य हैं वो जो परमेश्वर का वचन सुनते हैं और उसका पालन करते हैं |

मसीही परिवार में पैदा होने या मसीहियों से सम्पर्क रखने से हम परमेश्वर की सन्तान नहीं बनते परन्तु सिर्फ मसीह के नाम पर विश्वास करने से ही बनते हैं | इस विश्वास का मतलब है कि आप के नजदीक आना, आप के गुणों में डूब जाना, आपकी कोमलता को समझना और आप की शक्ती के बल पर बढ़ना | यह विकास उस समय तक होता रहता है जब तक हम अपने आप को मसीह के हाथों में सोंपे रहते हैं और विश्वास करते हैं कि आप हमारा उद्धार करते हैं और हमें अपने रूप में बदल देते हैं | मसीह में विश्वास, हमारे और आपके बीच एक सम्बंध और अनन्त वाचा है | इस विश्वास के बिना हमारा आत्मिक जन्म पूरा न होगा बल्की हम यह कह सकते हैं कि नया जन्म लेना विश्वास से बढ़ कर या उससे ज़्यादा मुशकिल नहीं है | ठीक उसी तरह जैसे विश्वास, नवीकरन से कम या उससे आसान नहीं होता | ये एक जैसे हैं |

प्रचारक यूहन्ना ने इस अध्याय के लिखने तक अपने सुसमाचार में यीशु के नाम का वर्णन नहीं किया बल्की उन्हों ने मसीह के व्यक्तित्व को अनेक राष्ट्रों के विश्वासियों के सामने खुद उनके अपने विचारों के अनुसार शब्द प्रयोग करके प्रगट किया | क्या तुम मसीह के इन गुणों के वे छ अर्थ समझ पाए जो प्रचारक ने अपनी कलीसिया के सामने रखे? क्या तुमने अपना दिल इन गुणों की शक्ती के लिये खोला और उनके आगे झुके | तब तुम अवश्य परमेश्वर की सन्तान बन जाओगे |

प्रार्थना: हे प्रभु यीशु ख्रीष्ट, मैं आप के आगे झुकता हूँ और आपसे प्रेम करता हूँ और अपना दिल आपके लिये खोलता हूँ | मेरे पापी होने पर भी आप मेरे पास आइये, आप मुझे मेरे सब अपराधों से पवित्र कीजिए और अपने पवित्र आत्मा के द्वारा मुझ में निवास कीजिये | हे प्रभु मैं ने आपके लिये अपने दिल के दरवाजे खोल दिए हैं |

प्रश्न:

11. मसीह को स्वीकार करने वालों को क्या अनुभव होता है?

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