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यूहन्ना रचित सुसमाचार – ज्योती अंध्कार में चमकती है।
पवित्र शास्त्र में लिखे हुए यूहन्ना के सुसमाचार पर आधारित पाठ्यक्रम
चौथा भाग - ज्योति अन्धकार पर विजय पाती है (यूहन्ना 18:1 - 21:25)
ब - मसीह का पुनरुत्थान और दर्शन देना (यूहन्ना 20:1 - 21:25)

2. यीशु ऊपर के कमरे में चेलों पर प्रगट होते हैं (यूहन्ना 20:19-23)


यूहन्ना 20:22-23
“22 यह कह कर उस ने उन पर फूँका और उन से कहा, ‘पवित्र आत्मा लो | 23 जिन के पाप तुम क्षमा करो, वे उन के लिये क्षमा किए गए हैं; जिन के तुम रखो, वे रखे गए हैं |’”

जब यीशु ने कहा, “जैसे पिता ने मुझे भेजा है, वैसे ही मैं तुम्हें भेज रहा हूँ,” तब कदाचित चेले चौकन्ने हो गये थे | वह यहुदियों के डर से अब तक ताला लगाये हुए कमरे में बन्द थे | स्वय: उन में शक्ती ही न थी और हाल ही में उन्हें संपूर्ण असफलता का अनुभव हुआ था | इस लिये यीशु ने अपने चेलों में फूँका, ठीक उसी तरह जैसे परमेश्वर ने अपना जीवन दायक आत्मा आदम में फूँका था ताकि वे जीवित प्राणी बन जाते और जीने के लिये शक्ति पाते | इस फूँकने से यीशु ने अपना निर्माता होने की भूमिका प्रगट की, आप ने उन चेलों में एक नई उत्पत्ती का आरंभ किया और उन्हें आश्वासन दिया कि आप का आत्मा और शक्ति, अधिकार के साथ उन पर होंगे जिस से वे अपने जीवन में अपने स्वर्गिय पिता का अनुरूप प्रगट कर सकेंगे |

जब चेलों ने पवित्र आत्मा पाया तब मसीह ने वे शर्तें उन को सौंप दीं जिस के अनुसर लोग पापों की क्षमा पाने वाले थे | उन्हों ने उन सब लोगों के लिये क्षमा की घोषणा करनी थी जो उन शर्तों को स्विकार करते और उन लोगों से क्षमा की घोषणा रोकनी थी जो ऐसी शर्तें अस्विकार करते हैं |

उन्हें पापों की क्षमा की घोषणा प्रभु मसीह के प्रतिनिधि के तौर पर करनी थी | उन लोगों के पाप स्वीकरण के अनुसार उन का मसीह की कलीसिया में स्वागत करना था |

यीशु ने चेलों को क्षमा की केवल घोषणा करने का अधिकार दिया था न कि क्षमा करने का, केवल परमेश्वर ही क्षमा करता है (यशायाह 43:25) |

यीशु तुम्हें इस दुष्ट दुनिया में राजदूत बनने का नेवता देते हैं, आप अपनी उद्धार की शक्ति तुम्हारे द्वारा पेश करना चाहते हैं | तुम्हारी सीमित योग्यताओं के विषय में उत्साह के साथ जाकर भाषण न दो बल्कि अपने प्रभु के संपर्क में रहो, ठीक उसी तरह जैसे प्रत्येक राजदूत आम जीवन में अपने राजा या अध्यक्ष से प्रति दिन संपर्क बनाये रखता है और हिदायत व मार्गदर्शन पाता है और तब उन के अनुसार प्रति दिन काम करता है | तुम कोई छोटे देवता नहीं हो जो स्वतंत्र रूप से काम करता हो, परन्तु तुम प्रभु के दास हो | आप तुम्हारे द्वारा दूसरों का उद्धार करना चाहते हैं | यदि तुम आज आप की आवाज़ सुनो तो अपने दिल को कठोर न बनाओ बल्कि अपने मन और अन्तकरण खोल दो ताकि पवित्र आत्मा तुम्हें मसीह के निडर परन्तु विनम्र और समझदार गवाह बना दे |

प्रार्थना: प्रभु यीशु, मैं इस योग्य नहीं कि आप मेरे घर पधारें ; परन्तु आप ने कहा और अपना पवित्र आत्मा मुझे प्रदान किया जिस ने मुझे अलौकिक किया और मेरा नवीकरण हुआ | आप ने मुझे आप की ओर से मानव जाती को गवाही देने के लिये भेजा है | मैं आप का आभारी हूँ क्योंकि मेरी कमजोरी में आप की शक्ति पूर्ण हो जाती है | मुझे पाखंडी नहीं बल्कि विनम्र रहने दिजीये और मेरे अन्तकरण से सब स्वार्थी विचारों को धो डालिये ताकि मैं सदा आप की इच्छा के अनुसार चल सकूँ | तब आप की शान्ति बहुत लोगों तक पहुँच जायेगी |

प्रश्न:

126. पवित्र आत्मा कौन है ? यीशु के विषय में तुम्हारी गवाही के द्वारा वह क्या करता है ?

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