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यूहन्ना रचित सुसमाचार – ज्योती अंध्कार में चमकती है।
पवित्र शास्त्र में लिखे हुए यूहन्ना के सुसमाचार पर आधारित पाठ्यक्रम
पहला भाग – दिव्य ज्योति चमकती है (यूहन्ना 1:1 - 4:54)
अ - प्रभु के वचन का यीशु में अवतारित होना (यूहन्ना 1:1-18)

3. मसीह के अवतारन में परमेश्वर की परिपूर्णता | (यूहन्ना 1:14-18)


यूहन्ना 1:17-18
“17 इसलिए कि व्यवस्था तो मूसा के द्वारा दी गई ; परन्तु अनुग्रह और सच्चाई यीशु मसीह के द्वारा पहुंची | 18 परमेश्वर को किसी ने कभी नहीं देखा, एकलौता पुत्र जो पिता की गोद में है, उसी ने उसे प्रगट किया |”

पुराने और नये नियम में पाया जाने वाला फर्क व्यवस्था के द्वारा मिलने वाली धार्मिकता और अनुग्रह के द्वारा मिलने वाली धार्मिकता में तुलना करने से मिटाया जा सकता है | परमेश्वर ने मूसा को दस नियम दिये और खून बहा कर बलिदान करने के सम्बंध में और जिंदगी में अनुशासन लाने के लिये व्यवस्था दी | जिस किसी ने इन नियमों का पालन किया वो अपनी जिन्दगी को काबिल बना लेता लेकिन जो मनुष्य इन नियमों में से एक का भी उल्लंघन करता वह मृत्यु दंड के योग्य टहराया जाता | इस तरह व्यवस्था मृत्यु का कारण बनी क्योंकि कोई भी मनुष्य निष्पाप नहीं है | अत्युत्तम और सच्चरित्र लोगों के लिये भी व्यवस्था के सारे नियम का पालन असंभव था और वो पश्चताप करके और पच्छ्ता कर रह जाते | ऊपरी लोग अपने आप को नेक समझते गोया परमेश्वर उनकी ज़िन्दगी से खुश था | इस अहंकार ने उन्हें स्वार्थी और उग्रवादी बना दिया | वो प्रेम को भूल गये और अपने स्वार्थी कामों की धार्मिकता पर घमंड करने लगे | निस्संदेह, अत: व्यवस्था पवित्र है क्योंकि वह परमेश्वर की पवित्रता को प्रकाशीत करती है परन्तु उसके सामने हर एक मनुष्य दूषित दिखाई देता है | इस तरह व्यवस्था हमें दुख देती और मृत्यु के मुंह में ढकेल देती है |

मृत्यु की बदबू से भरे हुए इस पर्यावरण में, प्रेरित यूहन्ना पहली बार अपने सुसमाचार में यीशु मसीह का ज़िकर दुर्दशा से बचाने वाले और परमेश्वर के क्रोध से मुक्ती दिलाने वाले के तौर पर किया है | नासरत के व्यक्ती, यीशु ही प्रतिज्ञा के अनुसार मसीह हैं जिनका पवित्र आत्मा की परिपूर्णता से सामंत किया गया है | आप राजाओं के राजा, परमेश्वर का वचन और महा याजक हैं | आप आशा और उद्धार की सभी संभावनाओं का संक्षेप हैं |

मसीह हमारे बीच कोई नई व्यवस्था ले कर नहीं आये बल्की आप ने हमें व्यवस्था के श्राप से मुक्ती दी | अपने बहुमूल्य प्रेम के द्वारा आपने हमारी खातिर व्यवस्था की सारी मांगों को पूरा किया | आप ने हमारे पाप और सारी दुनिया की सजा अपने कंधों पर उठा ली और इस तरह हमारा परमेश्वर से मेल मिलाप करा दिया | अपने पापों के कारण अब परमेश्वर हमारा दुश्मन न रहा बल्की अपने प्रभु यीशु मसीह के द्वारा अब हम ने परमेश्वर के साथ शांती प्राप्त कर ली है | यीशु ने अपने आस्मानी पिता के पास वापस जाकर हम सब पर अपना पवित्र आत्मा उंडेल दिया है | हमारे अंत:करण की भावनाओं को पवित्र, सच और शुद्ध विचारों से परीपूर्ण करके अपनी व्यवस्था से हमारे दिलों को प्रभावित किया | अब हम पहली व्यवस्था के मातहत नहीं रहे बल्की मसीह हमारे अंदर हैं | इस तरह परमेश्वर ने हमें उसके प्रेम की सारी मांगों को पूरा करने की शक्ती दी है |

मसीह के आने से अनुग्रह का दौर शुरू हुआ और हम उसी दौर में जी रहे हैं | हमारी स्वरचित धार्मिकता को बल देने के लिये परमेश्वर हम से दान, सेवा या बलिदान नहीं चाहता बल्की उसने अपने बेटे को भेजा ताकी वे हमें दिव्य धार्मिकता प्रदान करें | जो व्यक्ती आप पर विश्वास करता है वो हर लिहाज़ से धार्मिक ठहराया जाता है | इस कारण हम उससे प्रेम करते हैं, धन्यवाद कहते हैं और अपना जीवित बलिदान उसे अर्पण करते हैं क्योंकि उसने हमें अभीषेक किया है |

मसीह हमें अनाथ नहीं छोड़ते बल्की आप हमारे साथ रहते हैं और अपने उपहार हम पर न्योछावर करते रहते हैं | हम अपने पापों की क्षमा और ना ही परमेश्वर की आत्मा की सहभागिता के योग्य हैं | ना ही किसी और उपहार या आशीर्वाद के योग्य हैं | हम जो कुछ परमेश्वर की तरफ से पाते हैं वो सिर्फ परमेश्वर का अनुग्रह है | निसंदेह हम क्रोध और तबाही के सिवाय किसी और चीज़ के योग्य ही नहीं हैं | परन्तु मसीह पर विश्वास लाकर आप के दास बनने के कारण हम परमेश्वर की सन्तान बन गये हैं जिन पर वह अपना अनुग्रह प्रदान करता है | क्या तुम पाप के गुलाम (दास) और अनुग्रह की सन्तान के बीच का फर्क जानते हो?

यह अनुग्रह पवित्र परमेश्वर के दिल में केवल भावपूर्ण संवेदना नहीं है बल्की यह वो प्रेम है जो न्यायपूर्वक अधिकारों पर आधारित होता है | परमेश्वर किसी व्यक्ति को भी अपनी इच्छा के अनुसार क्षमा नहीं कर सकता क्योंकि पापी के पाप का तकाज़ा है कि वह तुरंत जान से मार डाला जाये परन्तु हमारे बदले मसीह की क्रूस की मृत्यु ने धार्मिकता की सभी मांगें पूरी कर दी हैं | यह अनुग्रह हमारे लिये अधिकार और परमेश्वर की दया का तथ्य बन गई है जो अटल है | मसीह के द्वारा मिलने वाला अनुग्रह परमेश्वर के साथ हमारे जीवन का न्यायपूर्वक आधार है | तुम शायद यह प्रश्न पूछो कि यह परमेश्वर कौन है जो सब कर सकता है परन्तु अपने न्याय के बन्धन तोड़ नहीं सकता ? हम तुम्हें उत्तर देते हैं कि कई धर्मों ने गंभीरता से और बड़े कष्ट से परमेश्वर को समझने का प्रयत्न किया है लेकिन वो उन सीडियों की तरह हैं जो धरती पर रखी गई है लेकिन आस्मान तक नहीं पहुँच पाती परन्तु मसीह उस दिव्य सीड़ी की तरह हैं जो आस्मान से उतरती है और धरती पर मजबूती से टिकी हुई है |इसलिए मसीह के द्वारा हमारे परमेश्वर से मिलने में किसी को संदेह या निराशा नहीं होनी चाहिये |

किसी व्यक्ती ने अनन्त विधाता को नहीं देखा क्योंकी हमारे पाप हमें पवित्र परमेश्वर से अलग करते हैं | परमेश्वर के विषय में सभी बयान अस्पष्ट विचार के सिवा और कुछ नहीं हैं | परन्तु मसीह परमेश्वर के पुत्र थे जो अनन्त काल से उसके साथ थे और वे दिव्य त्रियता के एक सदस्य हैं | इस प्रकार पुत्र जानता था कि पिता कौन है | इस विषय में इस से पहले भविष्य वक्ताओं के द्वारा आये हुये सभी संदेश अपर्याप्त थे परन्तु मसीह परमेश्वर के परीपूर्ण वचन हैं और पूरी सच्चाई का संक्षेप हैं |

मसीह के संदेश का केन्द्र बिंदु क्या है?

आप ने हमें सिखाया कि प्रार्थना करते समय परमेश्वर का इस प्रकार अभीवादन करें : “हे हमारे पिता, तू जो स्वर्ग में है |” परमेश्वर का अभिवादन करने कि यह रीति बता कर आप ने हमें बताया कि परमेश्वर का असली गुण पितृत्व है | परमेश्वर कोई तानाशाह, विजेता या नष्ट करने वाला व्यक्ती नहीं है | ना ही वो सहानुभूतीहीन और लापरवाह है | जैसे एक पिता अपने बच्चे की फिकर रखता है उसी तरह वो भी हमारी फिकर रखता है | अगर यह बच्चा कीचड़ में गिर जाता है तो वो उसे उठा लेता है, उसे साफ करता है और उसे पाप कि दुनिया में खो जाने के लिये अकेला नहीं छोड़ता | अब जबकी हम जान चुके हैं कि परमेश्वर हमारा पिता है इसलिये चिंता और पापों कि वजह से होने वाली हमारी परेशानी दूर हो गई क्योंकी अपने पिता कि तरफ लौट आने से हमें शुद्धता प्राप्त हुई और हमारा स्वागत हुआ | अब हम अनन्त काल तक परमेश्वर के साथ रहेंगे | आप के नाम से जो धार्मिक क्रान्ती दुनिया में आई वो मसीह का लाया हुआ नया मसीही विचार है | यह (पित्र्य) नाम मसीह के वचनों और कामों का सारांश है |

अपने अवतारण से पहले मसीह अपने पिता के पास थे | यह कोमल चित्र, मसीह और परमेश्वर के बीच पाये जाने वाले प्रेमपूर्ण रिश्ते को स्पष्ट करता है | अपनी मृत्यु और उसके बाद मुर्दों में से जी उठने के बाद पुत्र अपने पिता के पास चला गया | वो केवल परमेश्वर के दाहिनी तरफ ही नहीं बल्की पिता की गोद में बैठे | इस का मतलब यह हुआ कि आप और पिता एक हैं और आप पिता में हैं |इस लिये परमेश्वर के बारे में मसीह के सभी वचन सत्य हैं | मसीह में हम सत्य परमेश्वर को देखते हैं | जैसा बेटा है वैसा ही पिता है और जैसा पिता है वैसा ही बेटा भी है |

प्रार्थना: ऐ हमारे पिता, तू जो आस्मान पर है, हम तेरी स्तूती करते हैं और आभार मानते हैं क्योंकी तू ने अपने प्यारे बेटे मसीह को हमारे पास भेजा | हम तेरे सामने झुकते हैं क्योंकी तूने हमें व्यवस्था की भयानक पकड़ से आज़ाद किया और हमें तेरी दिव्य धार्मिकता में स्थित किया | हम हर आत्मिक उपहार के लिये तेरा आभार मानते हैं और तेरे पितृत्व नाम में पाये हुए विशेषाधिकार के लिये तेरी स्तुति करते हैं |

प्रश्न:

14. मसीह दुनिया में कौनसा नया विचार ले कर आये ?

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