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यूहन्ना रचित सुसमाचार – ज्योती अंध्कार में चमकती है।
पवित्र शास्त्र में लिखे हुए यूहन्ना के सुसमाचार पर आधारित पाठ्यक्रम
पहला भाग – दिव्य ज्योति चमकती है (यूहन्ना 1:1 - 4:54)
क - मसीह का पहली बार यरूशलेम को चले आना (यूहन्ना 2:13–4:54) - सही उपासना क्या है?

1. मन्दिर की सफाई (यूहन्ना 2:13–22)


यूहन्ना 2:13–17
“13 यहूदियों का फसह का पर्ब्ब निकट था और यीशु यरूशलेम को गया | 14 और उस ने मन्दिर में बैल और भेड़ और कबूतर के बेचनेवालों और सर्राफों को बैठे हुए पाया | 15 और रस्सियों का कोड़ा बनाकर, सब भेड़ों और बैलों को मन्दिर से निकाल दिया और सर्राफों के पैसे बिथरा दिए, और पीढ़ों को उलट दिया | 16 और कबूतर बेचनेवालों से कहा ; इन्हें यहां से ले जाओ : मेरे पिता के भवन को ब्योपार का घर मत बनाओ | 17 तब उसके चेलों को स्मरण आया कि लिखा है, ‘तेरे घर के धुन मुझे खा जाएगी |”

यीशु फसह के अवसर पर यरूशलेम गये जहाँ सारी दुनिया से लाखों यहूदी इकठ्ठे होते थे और मेमनों का बलीदान करते थे जो उन्हें फसह के मेमने के बलीदान की याद दिलाता था जिस के कारण परमेश्वर का क्रोध उन पर से उठा लिया गया था | बगैर खून बहाये, पापों की क्षमा नहीं होती और बगैर मेल मिलाप के अराधना का कोई अर्थ नहीं होता | इस तरह यीशु ने दुनिया के पापों को उठा लिया और यर्दन नदी में बपतिस्मा लेकर इस सत्त्यापन की निशानी छोड़ दी |उनकी खातिर आप मृत्यु का बपतिस्मा भी लेने को तैयार हो गये थे जो परमेश्वर का क्रोध अपने ऊपर ले लेने की निशानी ठहरा | आप को पूरा भरोसा था की आप ही परमेश्वर के चुने हुए मेमने हैं |

जब आप ने शहर में प्रवेश किया और मन्दिर के आंगन में पहुंचे तब आप वहां की इमारत की शान और शौकत से प्रभावित नहीं हुए बल्की आप खुद के बलीदान के बारे में जो मानव जाती के उद्धार के लिये था, सोच रहे थे | लेकिन उस मन्दिर में अराधना के लिये शान्ति ना पाकर आप आश्चर्य में पड़ गये | इस के बदले आप ने वहां धूल, कोलाहल, गायों की आवाज़, व्यापारियों की सौदेबाजी और जानवरों का खून देखा | आप ने सर्राफों की चिल्लाहट भी सुनी जो विदेशी मुद्रा को यहूदी मुद्रा में बदल रहे थे ताकि तीर्थ यात्री योग्य लेन देन कर सकें |

मन्दिर में हो रहा शोर इस विश्वास को स्पष्ट कर रहा था कि धार्मिकता पैसों और खास कोशिशों से खरीदी जा सकती है | तीर्थ यात्रियों ने यह ग्रहण कर लिया था कि अनुग्रह और धार्मिकता कर्मकांड व् परंपरा के द्वारा और दान देकर खरीदी जा सकती है | लेकिन वो यह नहीं जानते थे कि उद्धार्ता अच्छे कामों से नहीं प्राप्त होती |

इस मौके पर यीशु का क्रोधित होना बिलकुल सही था | सही अराधना की लगन ने आपको मवेशियों के व्यापारियों को बाहर निकाल देने और उनकी पूंजी को ज़मीन पर बखेर देने पर मज़बूर कर दिया | हमें यह नहीं बताया गया कि आप ने किसी को मारा पीटा था लेकिन आप की ऊँची आवाज उन मुक्कों की तरफ इशारा कर रही थी जो परमेश्वर उन लोगों पर बरसाने वाला था जो उसकी महानता और शान के आगे नहीं झुकते | इस ज़मीन पर सिर्फ टूटे हुए दिलों के आत्मसमर्पण के सिवाय ऐसी कोई भक्ती नहीं है जो पवित्र परमेश्वर को प्रसन्न कर सके |

पवित्र परमेश्वर के प्रति मनुष्यों की अरुचि को देख कर यीशु को बहुत दुःख हुआ | तेरह सौ साल पहले व्यवस्था के दिये जाने पर भी जो असावधानी और अज्ञानता, दिखावटी धार्मिकता में दिखाई देती है वह उस अन्धकार को स्पष्ट करती है जो दिल और दिमाग को छिपा देती है | इस मौके पर यीशु ने अराधना के इस केंद्र को साफ करने में दिव्य क्रोध और पवित्र लगन दिखाई | यह केंद्र सारी जाती कि स्थिती प्रगट कर रहा था | आपने धर्म में बुनियादी विकास और परमेश्वर की और मनुष्य के स्वभाव में बुनियादी परिवर्तन का आग्रह किया |

यूहन्ना 2:18–22
“18 इस पर यहूदियों ने उस से कहा, तू जो यह करता है तो हमें कौन सा चिन्ह दिखाता है ? 19 यीशु ने उन को उत्तर दिया; कि इस मन्दिर को ढा दो, और मैं उसे तीन दिन में खड़ा कर दूंगा | 20 यहूदियों ने कहा ; इस मन्दिर के बनाने में छियालीस वर्ष लगे हैं, और क्या तू उसे तीन दिन में खड़ा कर देगा ? 21 परन्तु उस ने अपनी देह के मन्दिर के विषय में कहा था | 22 सो वह जब मुर्दों में से जी उठा तो उसके चेलों को स्मरण आया कि उस ने यह कहा था; और उन्हों ने पवित्र शास्त्र और उस वचन की जो यीशु ने कहा था, प्रतीति की |”

याजकों को जब मंदिर कि सफाई और व्यापारियों के रोने धोने कि खबर मिली तो वे तुरंत यीशु के पास गये और आप से पूछा, “आप को ऐसा करने का अधिकार किस ने दिया? आप को किस ने भेजा? हमें आपके अधिकार का पक्का सबूत दीजिये?” उन्हों ने मन्दिर कि सफाई का विरोध नहीं किया क्योंकी वो जानते थे कि यीशु ने गुस्से में आकार ऐसा नहीं किया परन्तु परमेश्वर के घर के सम्मान के लिये पवित्र लगन से ऐसा किया ताकी भीड़ में सच्चाई के साथ अराधना की आत्मा वापस आजाये | वे केवल यह जानना चाहते थे कि किन कारणों और उद्धेशों ने आपको ऐसा करने पर मजबूर किया? इस लिये यीशु उनकी नजर में दुश्मन ठहरे क्योंकि वे मन्दिर के शासन में उनकी याजकीय संस्था के प्रभाव के बिना परिवर्तन लाना चाहते थे |

यीशु ने उनकी बनावटी अराधना के लिये उन्हें डाँटा क्योंकी वे परमेश्वर की उपस्थिती की शान्ती से बढ़ कर अराधना करने वालों की कोलाहल और धन दौलत की शक्ती को ज्यादा पसंद करते थे | यीशु ने दूर अंदेशी से उनकी बनावटी अराधना और अज्ञानता के कारण मन्दिर का नाश होते देखा | धार्मिक कर्मकांड और पूर्व निर्धारित हरकतों से मनुष्य को उद्धार नहीं मिलता बल्की परमेश्वर की उद्धार देने वाली सच्चाई से दिलों के परिवर्तन से उद्धार प्राप्त होता है |

परमेश्वर की उद्धार देने वाली उपस्थिती अवतारित होकर उन के बीच में खड़ी थी | यीशु ही सच्चे मन्दिर हैं | परमेश्वर यीशु में उपस्थित था | जैसे यीशु कह रहें हों: “मेरे शरीर के मन्दिर को नाश कर दो क्योंकी तुम परमेश्वर के लिये मेरी लगन को सहन नहीं कर सकते | तुम असंभव को संभव बनाकर इस मन्दिर को नाश करोगे, परन्तू मैं इस शरीर को तीन दिन में खड़ा करूंगा | मैं कबर में से जी उठुंगा| तुम मेरी जान लोगे परन्तू मैं जीवित हूँ, क्योंकि मैं स्वंय जीवन हूँ, यानी देह धारी परमेश्वर | तुम मेरी जान नहीं ले सकते |” इस तरह यीशु ने स्पष्ट शब्दों में अपने मुर्दों में से जी उठने की घोषणा की | मुर्दों में से जी उठना आज तक आप का महान आश्चर्य कर्म रहा |

महा याजक के भेजे हुए प्रतिनिधी मन्दिर के विषय में इस दृष्टांत को समझ न पाये | वे संगे मर मर के खम्बों और सुनहरे गुंबद को ताकते रहे और इस नतीजे पर पहुंचे कि यीशु ने दिव्य निवास के विरुद्ध धर्मद्रोह किया है जिसे हेरोद राजा ने छ्यालीस साल में बनाया था | उन्हों ने पत्थरों के विषय में कहा परन्तु यीशु का मतलब अपनी देह से था | आपकी सेवा की शुरुआत की यह महत्त्व पूर्ण बहस एक बार फिर से उच्च न्यायालय के सामने आप की पेशी के समय हुई जिसे झूटे गवाहों की मदद से तोड़ मरोड़ कर पेश करने की कोशिश की गयी |

इस से साफ़ पता चलता है कि पुराने नियम के लोग यीशु के शुरू किये हुए नए धर्म को समझ न सके | यहां तक के चेले भी यीशु की मृत्यु और जीवित होने के बाद ही इस नए धर्म की गहराई तक पहुँच सके | तब वे समझ सके की किस तरह परमेश्वर के पुत्र ने उन को पापों से मुक्ती दिलाकर स्वंय मृतकों में से जी उठे |

आज आप हमारे साथ आत्मिक मन्दिर में हैं जिस के हम जीवित पत्थर हैं | पवित्र आत्मा ने चेलों को पुराने पवित्र शास्त्रों में यीशु के वचनों के अर्थ ढूंढने के लिये प्रोत्साहित किया | वे अपने विश्वास में अटल रहे और सब मिल कर परमेश्वर का पवित्र मन्दिर बन गये |

प्रार्थना: हे प्रभू यीशु, आप परमेश्वर का निवास स्थान हैं जहां परमेश्वर और पापियों की भेंट होती है | पश्चताप करने, अराधना करने और आपकी परिपूर्णता से परिपूर्ण होने के लिये हमारी सहायता कीजिये ताकी हम सब मिल कर पवित्र आत्मा के मन्दिर बन जायें और हर समय आसमानी पिता की प्रशंसा करें |

प्रश्न:

25. यीशु मन्दिर में क्यों गये और व्यापारियों को बाहर क्यों निकाल दिया ?

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