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रोमियो – प्रभु हमारी धार्मिकता है|
पवित्र शास्त्र में लिखित रोमियों के नाम पौलुस प्रेरित की पत्री पर आधारित पाठ्यक्रम
भाग 1: परमेश्वर की धार्मिकता सभी पापियों को दण्ड देती है और मसीह में विश्वासियों का न्याय करती है और पापों से मुक्त करती है। (रोमियों 1:18-8:39)
द - परमेश्वर की शक्ति हमें अपराध कि शक्ति से छुडाती है| (रोमियो 6:1 - 8:27)

1. विश्वासी अपने आप को पाप के लिए मृतक समझता है| (रोमियो 6:1-14)


रोमियो 6:1–4
1 सो हम क्या कहें? क्या हम पाप करते रहे, कि अनुग्रह बहुत हो ?2 कदापि नहीं, हम जब पाप के लिए मर गए तो फिर आगे को उस में क्योंकर जीवन बिताए?3 क्या तुम नहीं जानते, कि हम जितनों ने मसीह यीशु का बपतिस्मा लिया, तो उस की मृत्यु का बपतिस्मा लिया ?4 सो उस मृत्यु का बपतिस्मा पाने से हम उसके साथ गाडे गए, ताकि जैसे मसीह पिता की महिमा के द्वारा मरे हुओ में से जिलाया गया, वैसे ही हम भी नए जीवन की सी चाल चलें|

1 से 5 तक के अध्यायों में पौलुस हमें यह दर्शाते है कि वह जो मसीह में विश्वास करता है वीधिवत न्यायोचित ठहराया गया और परमेश्वर के क्रोध एवं दण्डों से छुडाया गया था| आप रोमवासियों को समझाते है कि यह न्यायीकरण परमेश्वर के साथ हमारी शांति की अवस्था में, और जगत के लिए प्रेम के साथ प्रस्तुत किया गया है|

इस आरंभिक प्रस्तुतीकरण के बाद, उपदेशक ने महत्वपूर्ण प्रश्न का उत्तर दिया है जो कि ईश्वरियनिन्दा करते हुए, मुफ्त धार्मिकता के दुश्मनों द्वारा पूछा गया है: क्या हम लगातार अपराध करते रहे कि हम पर भरपूर अनुग्रह बना रहे, और परमेश्वर की ईमानदारी दिखाई दे?

इस द्वेषपूर्ण प्रश्न के उत्तर में पौलुस उस पथ की ओर, जो हमारे जीवन में अपराधों पर अंतिम विजय की ओर ले जाता है खींचते है, कि कोई भी विश्वासी तब तक चंगा नहीं हो सकता जब तक कि वह इस अनुच्छेद को न पढे और अपने जीवन में उसका अभ्यास न करे| हमारी बहस एक आध्यात्मिक पाठ नहीं है, परन्तु पवित्रता में जीने का एक मार्गदर्शक है|

उपदेशक ने नहीं कहा कि, “तुम तुम्हारे जाने पहचाने हुए अपराधों के विरोध में संघर्ष करो और उन पर विजय पाओ”, क्योंकि वह जानते थे कि कोई भी अपनी स्वयं की शक्ति द्वारा अपने अपराधों पर विजय नहीं पा सकता है| वह तुम्हे स्वयं तुम्हारे विरोध में संघर्ष करने के लिए नहीं बुलाते हैं, परन्तु वह तुम्हे साक्षी के लिए बुलाते हैं कि यहाँ तम्हारे पुरातन पंथी और भ्रष्ट हाव भाव के लिए के लिए और कोई उपाय नहीं है परन्तु नैतिक रूप से “मरना” है|

अपराध की शक्ति से हम कैसे मरेंगे? पौलुस सहजता पूर्वक उत्तर देते है: “हम मर चुके, जैसे यदि यह बुराई का विनाश के लिए आसान है| आपने इस मृत्यु को भूतकाल में अभिव्यक्त किया है जैसे कि मृत्यु का कार्य समाप्त हो चुका है| यह हमारी कर्मठता पर निर्भर नहीं करता और न ही इसके लिए हमने कुछ भी संघर्ष किया है| अतः आप दर्शाते है कि हमारा बपतिस्मा स्वार्थीपन की मृत्यु और बुरे आदमी के दफनकी ओर संकेत करता है| ईसाई बपतिस्मा केवल एक बाहरी अनुष्ठान नहीं है, केवल एक बाहरी शुद्धिकरण नहीं है, न यह शरीर पर जल का केवल एक प्रयोग है| यह एक न्याय, मृत्यु और दफ़न है| तुम्हारे बपतिस्मे द्वारा तुम इस बात की गवाही देतेहो कि तुम्हारे परमेश्वर ने तुम्हे मृत्यु दण्ड दिया है, जिसका पालन तुम डूब कर और दीक्षा स्नान द्वारा करते हो| व्यव्हार में शारीरिक रूप से नहीं बल्कि आत्मिक रूप से शर्मिंदा होना, अपने पुराने विचारों को निकल देना, मसीह की प्रतिस्थानिक मृत्यु को स्वीकार करना| हमारा बपतिस्मा मसीह के साथ हमारे प्रसविंदा समझौते में अंतिम एकी करण, उनके प्रति हमारे प्रेम का खुला पन और उनके ईमानदार उदाहरण में लगा तार बने रहने की ओर संकेत करता है|

जब मसीह हमारे पापों को दूर लेगये, हम अपने घमंड से उन के साथ मर गए| अतः सूली का अर्थ है भ्रष्ट मनुष्य में एक छुरा भोंकना, वह जो विश्वास करता है, अपने आप को नकारता है और सूली को उठालेता है, स्वीकार ता है कि हरे एक दिन सभी मनुष्य विनाश के अधिकारी है| हमारी मृत्यु एक मनो वैज्ञानिक युद्ध द्वारा नहीं है| यह भूतकाल में होचुकी थी जब मसीह श्रापित पेड पर चिलाये थे, “यह समाप्त हुआ” यदि तुम विश्वास करते हो, तुम सुरक्षित और अपराधों की शक्ति से मुक्त रहोगे|

मसीह मर गए और दफनाए गए थे, अपनी मृत्यु और दफ़न द्वारा न केवल हम सबको एकत्रित करने के लिए बल्कि हमें अपने पुनर जीवन कि ओर खींचने और अनंत जीवन देनेके लिए वे मृतकों में से जी उठे| हमारा अपने आप को नकारने के साथ ही हम मसीह की, उनके जीवन की शक्ति के साथ एकत्रित हो जाते है| इसलिए हमारे विश्वास का अर्थ केवल ज्ञान और सिद्धांत ही नहीं है, बल्कि यह एक बढती हुई शक्ति है, वह बढती है, काम करती है, विजय प्राप्त करती है और हमारे शरीरों में बुराई के ऊपर जीतती है जैसे कि मसीह हममे जन्म ले चुके थे|

मृत्यु से पुनर्जीवन हमारे प्रभु यीशु मसीह के पिता की एक विशाल और महिमामयी विजय थी| उनके पुनर्जीवन द्वारा उन्होंने अपनी अन्नंत महिमा की और अपने पुत्र की संधि, मृत्यु पर उस की विजय और उन के पवित्र जीवन के पुनरुत्थान को स्वीकार करके उनकी दृढ धार्मिकता की घोषणा की थी| मसीह के पुनर जीवन में परमेश्वर की शक्ति स्पष्ट रूप से कार्य करती थी, और इस दैवीय जीवन की नवीनता उन विश्वासियों के जीवन में जो विश्वास द्वारा मसीह से बंध गए हैं, में कार्य करती है| ईसाई धर्म भय या मृत्यु का धर्म नहीं है| यह आशा, जीवन और शक्ति का धर्म है|

मसीह के लिए हमारी आराधना द्वारा, हम यह स्वीकार ते है कि वह हम से बहुत दूर, सितारों के ऊपर नहीं रहते, या ऐसा कि वे कदाचित ही हमारे बारे में सोचते हैं| इसके स्थान पर हम यह स्वीकार करते है कि वे हमारे साथ एक अटूट बंधन में बंध गए हैं, और यह कि वे हमारे साथ अपनी शक्ति की पूर्णता में जीते हैं, हमेशा हमारे साथ रहते हैं, और पवित्र आचरण की ओर हमें ले जाते हैं| अतः तुम्हारा बपतिस्मा मसीह के साथ तुम्हारी एकता, मृत्यु, जीवन और एक नए सौदे में तुम्हारा विश्वास है| वह जो स्वय मसीह से जुड़ता है, स्वीकार करता है कि वह सूली पर मसीह के साथ मरगया था और एक नए जीवन में उन के साथ जी उठा|

प्रार्थना: ओ प्रभु मसीह, आपने सूली पर मेरी मृत्यु को समाप्त करदिया, और अपने पुनरुत्थान में मेरे जीवन की घोषणा की| मैं उन सबके साथ जो आप में विश्वास करते हैं, आपकी आराधना करता हूँ, जो विश्वास में आपके साथ मरगए, और आत्मा में आपके साथ जी उठे| मैं आप की आराधना करता हूँ, महिमा के पिता, धन्यवाद करता हूँ आप के पुत्र के पुनरुत्थान द्वारा आप की अपनी महिमा का रहस्य प्रकटी करण के लिए, और हमें आप में जीवन देने के लिए| उन के अनुग्रह में हम लगातार बने रहे और उनके आदेशानुसार पवित्रता, संयम, सच्चाई, प्रेम और धैर्यता से चलते रहने के लिए हमारी मदद करे, जिससे आप का जीवन सभी विश्वासियों के सामने आसके|

प्रश्न:

37. बपतिस्मे का अर्थ क्या है?

मन फिराओ
और तुम में से हर एक
अपने अपने पापों की क्षमा के लिए यीशु मसीह के नाम से बपतिस्मा ले;
तो तुम पवित्र आत्मा का दान पाओगे|

(प्रेरितों के कम 2:38)

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