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रोमियो – प्रभु हमारी धार्मिकता है|
पवित्र शास्त्र में लिखित रोमियों के नाम पौलुस प्रेरित की पत्री पर आधारित पाठ्यक्रम
भाग 1: परमेश्वर की धार्मिकता सभी पापियों को दण्ड देती है और मसीह में विश्वासियों का न्याय करती है और पापों से मुक्त करती है। (रोमियों 1:18-8:39)
ब - विश्वास के द्वारा नई धार्मिकता सभी मनुष्यों के लिए खुली है (रोमियो 3:21 - 4:22)

2. यीशु मे विश्वास के द्वारा हम न्यायोचित ठहराये गए हैं (रोमियो 3:27-31)


रोमियो 3:27–28
27 तो घमंड करना कहाँ रहा? उस की तो जगह ही नहीं; कौन सी व्यवस्था से? नहीं, वरन विश्वास की व्यवस्था के कारन| 28 इस लिए हम इस परिणाम पर पहुँचते है, की मनुष्य व्यवस्था के कामों के बिना विश्वास के द्वारा धर्मी ठहरातो है|

जगत का न्यायीकरण, और परमेश्वर के साथ हमारा मेलमिलाप, सूली पर पूरा हो चुका है| यद्धपि. मनुष्य केवल विश्वास के द्वारा न्यायसंगत ठहराया गया| हमने यह शब्द “विश्वास” वचन 21 से 31 के बीच में नौ बार पढ़ा है, जहाँ उपदेशक ने प्रमाणित किया है कि तुम केवल तुम्हारे विश्वास द्वारा न्यायसंगत ठहराए गये हो| न्यायकरण में तुम किसी भी पात्र के रूप में नहीं हो| यह तुम्हारे लिए परमेश्वर के उपहार के रूप में तुम को मिला है| उन्होंने तुम्हे पूरी तरह से न्यायोचित ठहराया, तुम्हारी ईमानदारी और पवित्रता के कारणरी ईमानदारी और पवित्रता के कारन

सभी धर्मो और दर्शनों के विश्वास में परिवर्तन की ओर यह सिद्धांत संकेत करता है, क्योंकि परमेश्वर ने सभी मनुष्यों को बिना दण्ड दिए क्षमा कर दिया| तो इस जगत के कर्मठता, पुरुस्कार, अच्छे कार्य, और नियम का अवलोकन के सिद्धांत चूर चूर होगए क्यों कि परमेश्वर ने हमें मुफ्त में हमारे पापों से मुक्त करदिया, हमें अपने अनुग्रह की ओर ले गए, और हमें नियमों के श्राप से छुटकारा दिया| तुम अपने सभी उपवास करते हुए, दान देते हुए और ईश्वरभक्ति के साथ, अपराधी बने रह सकते हो जब तक कि तुम मसीह के लहू और पवित्रता को ईमानदारी और धन्यवाद के साथ स्वीकार नहीं करते हो| इस पवित्र न्यायकरण में तुम किसी भी पात्र के रूप में नहीं हो| यह तुम्हारे लिए परमेश्वर के उपहार के रूप में तुम को मिला है| उन्होंने तुम्हे पूरी तरह से न्यायोचित ठहराया, तुम्हारी ईमानदारी और पवित्रता के कारणरी ईमानदारी और पवित्रता के कारन तुम्हारे अन्तकरण के सभी भागों को स्वच्छ कर दिया| क्या आश्चर्यजनक अनुग्रह है|

इस अनुग्रह के लिए तुम्हारी स्वीकृति, इसके लिए तुम्हारी कृतज्ञता, और इसे देने वाले के साथ तुम्हारी एकजुटता का अर्थ है विश्वास| सूली पर चढाया हुआ, हम अपराधियों के लिए परमेश्वर का उपहार है| उनमे सृष्टिकर्ता स्वयं तुमतक एक न्यायोचित अपराधी तक आते है, स्वच्छ करते हैं और अपने आप को तुम्हे देते हैं| तो प्रार्थनाओं और ईमानदारी द्वारा मसीह को तुरंत पकड़ लो कि उनकी शक्तिशाली पवित्रता तुम्हारी शक्ति बन सके| अपने आपको उनको सौंप दो उनके प्रेम की आभार स्वीकृति में|

विश्वास अपराधी को न्यायोचित ठहराता है| यह मनुष्य की योग्यताओं के विचारों में परिवर्तन करता है, और सभी प्रकार की आत्म-पवित्रताओं, आत्म-उद्धार और अह्कारों को समाप्त करता है, क्योंकि मसीह में हम जानते हैं कि हम मूर्ख, द्रोही, भ्रष्ट, और नाशवान हैं| परमेश्वर के दयालु हाथ के आलावा यहाँ कोई उद्धार नहीं है| तुममे तुम्हारी विरासत से या सतही ज्ञान या सीमित राष्ट्रीयता से कुछ भी सुधार नहीं हुआ है, क्योंकि तुम तुम्हारी विरासत, उपाधि पत्रों या गुणों द्वारा बचाये नहीं गए हो बल्कि मसीह में तुम्हारे विश्वास द्वारा बचाये गए हो| तो अपने आप को परमेश्वर के पुत्र को समर्पित कर दो, और उनके नये समझौते में प्रवेश करो क्योंकि उनके बिना तुम्हारी जिंदगी अपराधों में मृतक बनी रहती है परन्तु उनमे तुम सच में उपयुक्त बन जाओगे और तुम्हारी पवित्रता हमेशा लगातार बनी रहेगी| निश्चय ही, यहाँ परमेश्वर को प्रसन्न करने का और कोई रास्ता नहीं है, मसीह के लहू को स्वीकार करने और उसमे लगातार बने रहने के सिवाय परमेश्वर अपने पवित्रता तुम पर डालते हैं तो उनमे विश्वास करो, क्योंकि केवल विश्वास मसीह की आशीषों की सारी शक्तियों और अधिकारों में तुम्हे एक भागीदार बनाते है|

रोमियो 3:29–31
29 क्या परमेश्वर केवल यहूदियों ही का है? क्या अन्यजातियों का नहीं? हाँ, अन्यजातियों का भी है| 30 क्यों कि एक ही परमेश्वर है, जो खतनावालों को विश्वास से और खतनारहितों को भी विश्वास के द्वारा धर्मी ठहराएगा| 31 तो क्या हम व्यवस्था को विश्वास के द्वारा व्यर्थ ठहराते हैं? कदापि नहीं; वरन व्यवस्था को स्थिर करते हैं|

पौलुस ने रोम की कलीसिया को यह पत्री सुस्पष्ट रूप से लिखी थी| जब आपने प्रभावशाली और संक्षिप्त रूप से इसका विवरण दिया था, आपने अपनी आत्मा में कुछ प्रतिवादों को सुना था|

यहूदियों ने कहा था: “यदि मसीह की मृत्यु ने, कानून के लोगों द्वारा किये गए उपेक्षित अपराधों को, अपनी पवित्रता में क्षमा करना, प्रमाणित किया था, तो सूली केवल उनके लिए है और हमें अलग कर दिया गया है”|

और पौलुस ने उन्हें उत्तर दिया था: “परन्तु परमेश्वर ने सभी लोगों के अपराधों को माफ़ किया है| यहाँ कोई एक परमेश्वर यहूदियों के लिए, और दूसरा परमेश्वर दूसरे लोगों के लिए नहीं है, क्योंकि परमेश्वर एक है और उन्होंने, सूली पर मसीह की मृत्यु से, दोनों को खतनासहितो और खतनारहितों को उनके विश्वास के बल पर न्यायोचित ठहराया”|

तब कुछ यहूदियों ने कहा था: “यह असंभव है! तो फिर, दूसरे राज्य बगैर खतना या नियमों के न्यायोचित माने गये जो कि परमेश्वर के विरोध में ईश्वरीय निन्दा है| पौलुस, तुमने परमेश्वर के रहस्य प्रकटीकरण को नीचे की ओर मोड दिया है”

पौलुस ने इन कट्टरपन्तियों को उतर दिया था “ कानून के रहस्यों के प्रकटीकरण में परिवर्तन मुझ से दूर रहे| हम, इसके विपरीत सूली के हमारे शुभ समाचार द्वारा कानून की पुष्टि करते हैं, और हम स्पष्ट करते हैं कि कानून परमेश्वर के बलिदान की प्रस्तावना है| सूली ने हमारे लिए कानून की सभी शर्तों को समाप्त कर दिया है|

उग्रवादी और उदारवादी दोनों दलो के साथ पौलुस के संघर्ष द्वारा, हम समझते हैं कि सभी विश्वासी परमेश्वर की पवित्रता और उसकी महानता को पहचान नहीं पाये, क्यों कि उन्हें इस शुभ समाचार से भय प्रतीत हुआ कि विश्वास से सभी मनुष्य न्यायोचित ठहराए गये| कुछ वे लोग हैं जो ईसाई स्वतंत्रता में आये, जोकि कानून, जातिवाद या किसी भी इंसानी वचन बद्धता में पाई जाती है| हमारा विश्वास, मसीह से हमारी प्रतिबद्धता, और उनमे हमारे विश्वास जोकि अनन्ता से हमसे प्रेम करता था, की ओर संकेत करता है|

प्रार्थना: ओ पिता, हम आपका धन्यवाद करते है क्योंकि आपने हमें हमारी आत्म पवित्रता से मुक्त किया और मसीह की शक्ति के साथ मे न्यायोचित ठहराया| जब हम अपने आप को देखते हैं तो हमें अपने आपको अपराधों से भरा हुआ पाते है, परन्तु जब हम आपके सूली पर चढाये गये पुत्र को देखते हैं, हम अपनी पवित्रता , जोकि हमें दी गई है, पाते हैं| हमें हमारी झूठी भक्ति से मुक्त करें कि हम हमारे मानवीय कार्यों में न्यायीकरण न ढूंढे, परन्तु हमारे लिए आपके पुत्र के कार्य के साथ संतुष्ट रहे| हम आपका धन्यवाद करते है, पूरी तरह से न्यायीकरण के लिए, उस स्वीकृति के लिए जिसमे हम अपने आपको हमेशा के लिए, पूरी तरह से आपको सौपते हैं|

प्रश्न:

29. हम क्यों केवल अपने विश्वास द्वारा न्यायोचित ठहराये गये, न कि हमारे अच्छे कार्यों द्वारा?

मनुष्य उसके विश्वास से ही न्यायोचित ठहराया गया नाकि उसके कानूनन अच्छे कार्यों द्वारा|
(रोम 3:28)

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