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रोमियो – प्रभु हमारी धार्मिकता है|
पवित्र शास्त्र में लिखित रोमियों के नाम पौलुस प्रेरित की पत्री पर आधारित पाठ्यक्रम
भाग 1: परमेश्वर की धार्मिकता सभी पापियों को दण्ड देती है और मसीह में विश्वासियों का न्याय करती है और पापों से मुक्त करती है। (रोमियों 1:18-8:39)
ब - विश्वास के द्वारा नई धार्मिकता सभी मनुष्यों के लिए खुली है (रोमियो 3:21 - 4:22)
3. विश्वास द्वारा न्यायोचित ठहराए गए, उदहारण के रूप में अब्राहम और दाऊद (रोमियो 4:1-24)

अ) अब्राहम का विश्वास ही उनकी धार्मिकता का विवरण था (रोमियो 4:1-8)


रोमियो 4:1–8
1 सो हम क्या कहें, कि हमारे शारीरिक पिता इब्राहीम को क्या प्राप्त हुआ? 2 क्योंकि यदि इब्राहीम कामों से धर्मी ठहराया जाता, तो उसे घमंड करने की जगह होती, परन्तु परमेश्वर के निकट नहीं | 3 पवित्र शास्त्र क्या कहता है? यह कि इब्राहीम ने परमेश्वर पर विश्वास किया, और यह उस के लिए धार्मिकता गिना गया| 4 काम करनेवाले कि मजदूरी देना दान नहीं, परन्तु हक्क समझा जाता है| 5 परन्तु जो काम नहीं करता वरन भक्ति हीन के धर्मी ठहराने वाले पर विश्वास करता है, उस का विश्वास उस के लिए धार्मिकता गिना जाता है| 6 जिसे परमेश्वर बिना कर्मों के धर्मी ठहराता है, उसे दाउद भी धन्य कहता है| 7 कि धन्य वे हैं, जिन के अधर्म क्षमा हुए, और जिनके पाप ढांपे गए| 8 धन्य है वह मनुष्य जिसे परमेश्वर पापी न ठहराए|

पौलुस ने रोम में यहूदी मूल के विश्वासियों को नए नियम के स्तर पर सच्चे विश्वास की ओर मार्ग दर्शन करने के लिए ढूंडा| उदाहरण के रूप में आप ने इब्राहीम, उनके पिता, और दाउद उपदेशक को लिया| ऐसा करके आप ने यह सिद्ध किया कि उन्होंने उन की क्षमा और धार्मिकता उन के अपने विश्वास के द्वारा प्राप्त की, न कि उन के कार्यों द्वारा|

इब्राहीम किसी भी दूसरे मनुष्य के समान रहे, वह दूसरे मनुष्यों से न तो बहुत अच्छे और न ही बहुत बुरे थे| परमेश्वर उनके बहुत सारे पापों और भृष्ट ह्रदय को जानते थे परन्तु उन्हों ने इब्राहीम की लालसा में आत्मिक आज्ञा पालन को पाया था| परमेश्वर ने प्रत्यक्ष रूप से बात की और उन को बुलाया, और इस रेगिस्तान में भटके हुए बूढ़े ने उन के बुलावे पर विश्वास किया था| वह परमेश्वर के वादों को उनकी गहराई और अर्थों के साथ नहीं समझ सके थे, परन्तु वे स्वयं परमेश्वर में विश्वास करते थे, कि उनका वचन सच्चाई भरा है, और यह कि वह अपने वादों को पूरा करने में ईमानदार हैं| इस विश्वास के साथ इब्राहीम परमेश्वर का आदर करते थे, और परमेश्वर के नाम की महिमा करते थे| इब्राहीम ने अपनी शक्ति, या अपनी स्पष्ट शक्ति हीनता के बारेमे नहीं सोचा था, वरन परमेश्वर और उनकी असीमित क्षमताओं में उन का मजबूत विश्वास था| उन के विश्वास और विश्वसनीय वचन बध्दता ने उन के ह्रदय की तीव्र लालसा को तृप्त किया था|

यह अटल, पूर्ण और सुनिश्चित विश्वास, उन की धार्मिकता का कारण था न कि उनकी सिद्धांत सम्बन्धी जानकारी| इब्राहीम स्वयं धार्मिक नहीं थे, परन्तु उनकी धार्मिकता का श्रेय उन के विश्वास को जाता है| वह हमारे समान ही अपराधी थे, परन्तु उन्हों ने परमेश्वर की इच्छा की दिशामे अनुक्रिया की, उन के वचन को ध्यान पूर्वक सुना, उन के आश्वासन को स्वीकार किया और उसे अपनी लालसा पूर्ण आत्मा में रखा|

अध्याय 4 में हमें कई बार पढ़ा कि इस प्रकार का विश्वास “उनकी धार्मिकता का हिसाब” था| यह वाक्य सुधार का प्रतिक बन गया था| वह जो परमेश्वर का सम्मान विश्वास के साथ करता है, सूली के सुसमाचार को बिना किसी शर्त के स्वीकारता है और मसीह पर अपने जीवन का निर्माण करता है, बिना कानून के किसी कार्य के और बिना व्यक्तिगत कर्मठता के, पूरी तरह से न्योचित है|

क्या तुमने परमेश्वर के वचन को तुम्हे तुम्हारे झूठ, मलिनता, और लघु प्रेम के सम्बन्ध में बतलाते हुए सुना है? क्या तुम विश्वास करते हो कि तुम्हारा न्याय होगा? क्या तुम खिन्न और पश्चातापी हो, और क्या तुम परमेश्वर से क्षमा की बिनती करते हो? यदि तुम अपने अक्खड पन से टूट चुके हो, पवित्र आत्मा परमेश्वर के सूलीपर चढाए पुत्र को तुम्हारी आँखों के सामने ले आयेगी अपने हाथों को फैलाते हुए और तुम से कहते हुए: “मैंने तुम्हे तुम्हारे अपराधों से क्षमा किया| तुम अपने आप से धार्मिक नहीं हो, परन्तु मैंने तुम्हे धार्मिक बनाया है| तुम स्वछ नहीं हो, परन्तु मै तुम्हे पूर्णतः मुक्त करता हूँ|”

क्या तुम ने परमेश्वर का वचन सुना था? क्या यह तुम्हारे पथरीले दिमाग और ह्रदय, और तुम्हारी उथली आत्मा की गहराई तक पहुँच गया है? तुम्हारे परमेश्वर के वचन को स्वीकार करो, उद्धार के सुसमाचार में विश्वास करो, और तुरंत सूली को पकड़ लो कि परमेश्वर तुम्हे सच्चे धार्मिक के रूप में सोच सके| सूली पर चढ़ाये गए का विश्वास के साथ सम्मान करो, और तुम उनके साथ तुम्हारी सह भागिता में पवित्र कर दिए जाओगे|

राजा दाऊद भजन संहिता के प्रेरणा दायक लेखक, जो कि अपराधी थे, ने स्वयं दैविय न्यायी करण के रहस्य को अनुभव किया था| उन्हों ने अपनी आश्चर्य जनक भजन संहिता के लिए कभी गर्व नहीं किया, ना ही उन्हें उनकी महान विजयों के लिए न्यायोचित माना गया, ना उन्होंने अपनी प्रभावशाली प्रार्थनाओ पर घमंड किया, या उदारता पूर्वक उनके द्वारा दिए गए दानों पर घमंड किया| इसके स्थान पर उन्होंने उस मनुष्य को भी प्रसन्न किया था जिसे उनके प्रभु के अनुग्रह से उसके अपराधों के लिए क्षमा मिली| मसीह में तुम्हे दी गई धार्मिकता, परमेश्वर का अति महान उपहार है|

प्रार्थना: ओ पवित्र परमेश्वर, हम आपका धन्यवाद करते हैं, कि आपने हमें अपना वचन अपने पुत्र के अवतार में दिया और उनकी सूली में अपने न्यायिक अनुग्रह के बारेमे आप ने हम से कहा| हमारे कानो को खोलिए कि हम आप के वादों को सुन पाएं, उनको समझ पाएं, और आप पर विश्वास करें| हम आप का धन्यवाद करते हैं कि आपने बिना किसी मुल्यके हमें न्यायोचित ठहराया, सभी स्थानों के उन लोगों के साथ जो आप पर विश्वास करते हैं| हमारे मित्रों कि मदद कीजिये इस बुलावे को स्वीकार करने के लिए कि वे सूली पर आपके पुत्र की शक्ति का अनुभव कर सकें|

प्रश्न:

30. इब्राहीम और दाऊद किस तरह से न्यायोचित ठहरे?

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