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रोमियो – प्रभु हमारी धार्मिकता है|
पवित्र शास्त्र में लिखित रोमियों के नाम पौलुस प्रेरित की पत्री पर आधारित पाठ्यक्रम
भाग 1: परमेश्वर की धार्मिकता सभी पापियों को दण्ड देती है और मसीह में विश्वासियों का न्याय करती है और पापों से मुक्त करती है। (रोमियों 1:18-8:39)
ब - विश्वास के द्वारा नई धार्मिकता सभी मनुष्यों के लिए खुली है (रोमियो 3:21 - 4:22)

1. मसीह की क्षतिपूर्ति मृत्यु में परमेश्वर की धार्मिकता का पुनरुत्थान (रोमियो 3:21-26)


रोमियो 3: 21-24
21 पर अब बिना व्यवस्था परमेश्वर की वह धार्मिकता प्रगट हुई है, जिसकी गवाही व्यवस्था और भविष्यवक्ता देते है| 22 अर्थात परमेश्वर की वह धार्मिकता, जो यीशु मसीह पर विश्वास करने से सब विश्वास करने वालो के लिए है; क्योंकि कुछ भेद नहीं | 23 इस लिए कि सब ने पाप किया है और परमेश्वर की महिमा से रहित है| 24 परन्तु उसके अनुग्रह से उस छुटकारे के द्वारा जो मसीह यीशु में है, सेंत मेंत धर्मी ठहराए जाते हैं|

क्या तुम अपराधी हो? यह प्रश्न केवल उन अपराधियों से है जो अपने भूतकाल के कार्यों से दुख झेल चुके थे क्योंकि वे पहचान चुके थे कि उनके खून में बुराई है, और उनके ढंग अनुचित है|

आओ, और सुसमाचार सुनो जो परमेश्वर द्वारा संसार के न्याय के बीच में तुम से कहता है|

पौलुस ने सभी लोगों को यह सिद्ध किया है धार्मिक और अपराधी, चुने हुए और खोये हुए, सांस्कृतिक और साधारण, बूढ़े और जवान, प्राकृतिक और दैविक क़ानून के अंतर्गत, कि वे अपने महत्वहीन दिमागों के साथ अपराधी है|

तुम आशीर्वाद प्राप्त हो जो यह जानते हो कि तुम परमेश्वर की महिमा में अपूर्ण हो, जैसे सभी मनुष्य है| हमने परमेश्वर की छबी, जो हमारा निर्माण करते समय हमें दी गयी थी को खो दिया है| क्या तुम अपनी बेईमानी पर रोते हो?

परमेश्वर के पवित्र क़ानून पर दोष लगाने पर उनका उत्तर हमारे विरोध में क्या है? बुरी पापत्माओं की भीड़ के विरोध में दैविय न्याय क्या है? तुम्हारे और मेरे विरोध में उनका न्याय संगत न्याय क्या है?

शान्ति के मध्य में पराक्रमी शब्द स्वर्ग और पृथ्वी पर गिरे और मृतकों और जीवितों के शब्दों का दबदबा: सभी न्यायोचित ठहरे! हमारे दिमाग उठते है और कहते है “यह असंभव है|” और शैतान रोता है “नहीं:” परन्तु परमेश्वर की आत्मा तुम्हे राहत देती है, और परमेश्वर के मार दिया गये मेमने की ओर इशारा करती है जो इस जगत के पापों को ले गया| परमेश्वर ने अपराधियों के स्थान पर अपने पुत्र को दण्ड दिया| पवित्र परमेश्वर ने अपने पवित्र पुत्र को, भ्रष्ट लोगों को पापों से मुक्त करने के लिए नष्ट कर दिया था| मसीह ने तुम्हारे आत्मिक ऋणों को अपनी शारीरिक पीडाओं द्वारा चुका दिया कि तुम परमेश्वर के विस्तृत साम्राज्य में स्वतंत्रता से प्रवेश कर पाओ| तुम स्वतंत्र, उद्धार प्राप्त और मुक्त किये गये हो| ना पाप, नाहीं शैतान, नाहीं मृत्यु की शक्ति तुम पर हावी है| तुम निर्दोष हो, और परमेश्वर द्वारा हमेशा के लिया स्वीकार किये गये हो|

क्या तुम इस पर विश्वास करते हो, और क्या विश्वास के साथ मुक्ति के सुसमाचार को स्वीकार करते हो? यदि तुम आइने में देखते हो, तुम अपने आप को पहले के जैसे ही पाओगे, परंतु किसी नई बात की ओर ध्यान जाएगा| तुम कृतज्ञता के भाव और खुशी की चमक तुम्हारी आँखों में देखोगे, क्योंकि परमेश्वर तुम से प्रेम करते है और अपने इकलौते पुत्र की मृत्यु द्वारा तुम्हे तुम्हारे अपराधों से न्यायोचित ठहराते हैं| तुम या तो इस सच को स्वीकार करो या अस्वीकार करो| पूरे जगत का न्याय पूरा हो चुका है, और अब मसीह को दुबारा सूली पर अपने प्राण देने की आवश्यकता नहीं है| वह जो विश्वास करता है सुरक्षित है, और वह जो मुक्ति को शीघ्रता से पकड़ता है दण्डित नहीं होगा| तुम्हारे विश्वास ने तुम को बचाया है|

सभी बुरे और मृत्यु और नाश के लिए दण्डित है, परन्तु परमेश्वर ने उन्हें अपनी अनंत सेवकाई के लिया जिन्दा रहने की सुविधा देकर उन्हें न्यायोचित ठहराया| इस जगत के सभी धर्मो में यह सार्वजनिक अनुग्रह नहीं पाया जाता है| यह केवल सुसमाचार में पाया जाता है| परमेश्वर का प्रेम सारी मनुष्य जाति को सुरक्षित क करता है; वकीलों और खोए हुए, प्रमुख व्यक्तियों और अविश्वासियों, दार्शनिकों और साधारण, जवान और बच्चे| परमेश्वर ने सभी को न्यायसंगत ठराया| तुम उनके अनुग्रह को कब तक नहीं मानो गे? आओ, अपने मित्रों को बुलाओ और उनको कहो कि उनके कैद खाने का दरवाजा पूरा खुला है, और यह कि उन्हें भी स्वतंत्र होने का अधीकार है जैसा कि सुसमाचार में आदेश दिया गया था| जल्दी करो, और उन्हें परमेश्वर की नयी स्वतंत्रता दिखाओ|

प्रिय भाइयों, क्या तुमने व्यक्तिगत रूप से मसीह और उनके उद्धार को स्वीकार किया है? क्या तुम उन्हें अपने दयालू रक्षक के रूप में जानते हो? तो मुझे तुम्हे बधाई देने दो और यह सुझाव भी देने दो कि तुम मसीह को उनकी पीडाओं और मृत्यु के लिए धन्यवाद दो, क्योंकि अकेले उन्हों ने तुम्हे बचाया, स्वच्छ किया, और न्यायसंगत ठराया | तो अपने विश्वास के साथ उनका आदर करो, और निरंतर उनको धन्यवाद दो| तुम्हारी बची हुई जिंदगी मसीह की महिमामय अनुग्रह के लिए पूरी तरह से कृतज्ञता पूर्वक रहने दो|

प्रार्थना: ओ प्यारे प्रभु यीशु मसीह, हम आप को धन्य वाद करते है और आप से प्रेम करते है क्योंकि आपने हमारे लिए सूली पर अपने प्राण दिये| ओ दयालू पिता, हम आप की आराधना करते हैं क्योंकि आपने हमारे अपराधों को मसीह की क्षतिपूर्ति मृत्यु द्वारा क्षमा किया| ओ पवित्र आत्मा, हम आप को धन्य वाद करते है क्योंकि आपने हमें स्वतंत्र ज्ञान का अनुग्रह, पूरी तरह से न्याय संगत ठहराने में स्थापित करना, और सुनिश्चित क्षमा के लिए अनुमोदित किया| हम आप की महिमा करते है ओ पवित्र त्रयी क्योंकि आपने हमारी जिंदगी को एक अर्थ दिया| हमें हमेशा आप को धन्यवाद करना, और अपने जीवन को पापों से मुक्त रहना सिखाईये कि हमारे आचरण में आप के महान अनुग्रह के लिए कृतज्ञता चमके|

प्रश्न:

27. विश्वास के द्वारा हमारा न्याय करने के क्या प्रमुख विचार है?

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