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Home -- Hindi -- The Ten Commandments -- 03 First Commandment: You Shall Have no Other Gods Before Me

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विषय ६: दस आज्ञाएँ - परमेश्वर की सुरक्षा करने वाली दीवार जो मनुष्य को गिरने से बचाती हैं|
सुसमाचार की रोशनी में निर्गमन २० में दस आज्ञाओं का स्पष्टीकरण

III. पहली आज्ञा: तू किसी और देवता की पूजा ना करना



निर्गमन २०:३
तुम्हे मेरे अतिरिक्त किसी अन्य देवता को, नहीं मानना चाहिए|


०३.१ -- आज मूर्तियों की आराधना

यदि हम एक औद्योगिक देश में रहते हैं, हमें ऐसे बहुत कम लोग मिलेंगे जो लकड़ी, पत्थर या सोने की मूर्तियों की पूजा करते हो| यदि हम एशिया या अफ्रीका की यात्रा करे हम पाएंगे कि बहुत सी मूर्तियों के पीछे बहुत से लोग भाग रहे हैं जो वास्तव में भयभीत होकर स्तुति करते हैं|

एक “इंडियन एअर लाईन्स ” पत्रिका में, युद्ध की देवी दुर्गा, उसकी छ: भुजाओं के साथ जो किसी भी आक्रामक को मार डालती है, का चित्र था| कई मानवीय सिर दुर्गा के आस पास बिखरे पड़े हुए थे| ऐसी बहदुरी जैसे वह युद्ध में हो, कोई भी उनके निकट गया होगा वह उनके मुँह से आती हुई आग में भस्म हो गया होगा| और जब वह अपने दुश्मनों को मार डालती थी, वह मुस्कुराती थी|

तुम्हे भारत में नक्काशी करके बनाये गये हाथियों की मूर्तियाँ जो भगवान गणहती का प्रतिनिधित्व करती हैं,मिलेंगी | समय समय पर हिंदू लोग सुगंधित फूलों को उन मूर्तियों के सामने डालते हैं| विशेष पर्वों पर प्लास्टिक के हाथियों को जो लगभग दो या तीन मंजिल ऊंचे होते हैं फूलों की मालाओं से सजाया जाता है| इन मूर्तियों को लोगों की भीड़ सड़कों पर लेकर चलती है जब तक कि उनको किसी नदी या समुद्र में इस आशा के साथ नहीं फेंक देते कि उन्हें अच्छी मछलियाँ पकड़ में आएँगी और वह स्थान तबाही मचाने वाली वार्षिक बाढों से बचा रहेगा|

एक विशेष पर्व के दौरान हजारों की संख्या में गायों को मंदिरों में लाया जाता है और उन पर पवित्र पानी छिड़का जाता है जिससे वे स्वस्थ रहे| तब उनके सींगों को शोख रंगों से, समर्पित करने के चिन्ह के रूप में रंगा जाता है|

यदि हम लद्दाख खाडी की सैर करे जो हिमालय पर्वतों से आगे है या किसी बुद्धह धर्म मानने वाले देश की यात्रा करें तो हम बहुत बड़े सोने के, मुस्कुराते हुए बुद्ध की प्रतिमा और लोगों को उसके सामने पूर्ण श्रद्धा के साथ साष्टांग प्रणाम करते हुए देख पाएंगे| एक तिहाई मनुष्य अब तक मूर्ति पूजा करते हैं और पहली आज्ञा को तोड़ते हैं| यह मूर्तिपूजा करने वाले इन मूर्तियों की शक्ति और पुनर्जन्म में विश्वास करते हैं| अफ्रीका और इंडोनेशिया के बहुत बड़े भाग के लोग अब तक कुछ रीती रिवाजों के आध्यात्मिक बंधनों में बंधे हुए है| कुछ लोग उनके पूर्वजों की आराधना करते हैं| यदि इन लोगो को यीशु की सत्ता का अनुभव हुआ था, वे किसी भी प्रकार के आत्मा के भय और मूर्तिपूजा एवं भविष्यवाणी से छूट गये होंगे| तब उन्हें जादुई सम्मोहनो या नीले मोतियों की आवश्यकता और अधिक समय तक नहीं पडी होंगी और उन्होंने मृत मूर्तियों को ठुकरा दिया होगा क्योंकि अब प्रत्येक बुरी आत्मा के प्रभाव से बचने के लिए उनको एक ढाल मिल गई होंगी|

हमारे स्वर्गीय पिता ने हमें सभी प्रकार के भय से, यहाँ तक जिन्न के आधिपत्य से छुडाया है, और पूरी तरह से हमें जादू टोने के प्रभाव मुक्त किया है| यीशु मसीह, परमेश्वर के पुत्र का लहू, सभी बुरी शक्तियों से हमारी सुरक्षा का एक मात्र कवच है| प्रभु यीशु के अनुयायी के विरोध में, अन्य शक्तियों के नाम में चाहे जो लिखा गया या कहा गया या श्राप दिया गया परमेश्वर के नाम में चकनाचूर हो जायेगा| वह उन सभी के लिए जो उनकी ओर मुड़ते है, मजबूत मोर्चेबंद किले के समान बने रहे हैं|


०३.२ -- आधुनिक युग की मूर्तियां

अप्रत्याशितरूपसे औद्योगिक देशों में, एक नये प्रकार की मूर्तिपूजा के साधनों को अनुमति मिल चुकी है, जहाँ मूर्तियों का स्थान, कार , दूरदर्शन और प्रसिद्धिप्राप्त कलाकारों ने ले लिया है| मनुष्य आधुनिक तकनीकी पर जीवित प्रभु की अपेक्षा अधिक विश्वास करता है| वह कार मे बैठता है और तारकोल की हुई सड़क पर बहुत तेजी से चलाता है | आधुनिक युग के लोगों के लिए कार एक मूर्ति बन गई है| वे इसमें प्रवेश करके अपने आप को इसकी शक्ति के हवाले कर देते हैं| जैसे इस्राइली लोग प्राचीन काल में सोने के बछड़े के आसपास नाचते थे, आधुनिक लोग नये नमूने की कार के आस पास घूमते हैं| कार का मालिक उसकी कार रक्षा और उसके लिए त्याग करता है; वह इसे साफ करता है, पॉलिश करता है और इसके इंजिन की आवाज को अपने आसपास के लोगों की आवाज से ज्यादा सुनता है| वह पर्याप्त मात्रा में अपना समय और धन इस पर खर्च करता है जितना वह गरीबों के लिए करता है उससे बहुत अधिक मात्रा में करता है| क्या मानव आधुनिक तकनीक का एक दास बन गया है? लोगों का जमघट खेल के मैदानों में कार रेसिंग और खेलकूद की क्रियाओं को देखने के लिए, बाढ़ के समान जाता है | परंतु गिरजाघरों की लंबी बेंच पर बहुत थोड़े से बैठते हैं और सार्वजानिक आराधनाओं में हिस्सा लेते हैं|

यीशु ने हमें विशेषरूप से धन के प्रति मोह के विरोध में चेतावनी दी है| उन्होंने कहा था, “कोई भी मनुष्य परमेश्वर और धन की एक साथ सेवा नहीं कर सकता, क्योंकि वह या तो एक से प्रेम और दूसरे से नफरत करेगा , या तो वह परमेश्वर को ठुकरायेगा और धन को गले लगायेगा|” |धन से प्रेम सारी बुराईयों की जड़ है|” समाजवाद और पूंजीवादी का एक ही लक्ष्य है, क्योंकि जब पूंजीवादी अमीर थे, समाजवादी किसी भी प्रकार से तिकडम लगा कर और आंतक फैला कर अमीर बनना चाहते थे | यहाँ तक कि आज भी लोग सोने के बछड़े के आसपास नाचते है| किसी के बहकावे में मत आओ, परमेश्वर उपहास नहीं कर सकते| कोई भी इन्सान परमेश्वर और धन की सेवा एकसाथ नहीं कर सकता| यीशु गरीब थे परंतु संतुष्ट थे| उन्होंने अपने अनुयायियों को धन के विरोध में जोर देकर सतर्क किया है, “किन्तु वे जो धनवान बनना चाहते है, प्रलोभनों में पड़कर जाल में फंस जाते हैं” (१ तीमुथियुस ६:९, मती ६:२४, १९:२४)|

अब तक प्रबल मूर्तिपूजा जो सभी संस्कृतियों और धर्मों के ऊपर शासन करती है हमारा महा-अहम है| प्रत्येक व्यक्ति की यही सोचने की प्रवृति है कि वह सबसे उत्तम है, और सभी लोगो से अत्यधिक सुंदर और महत्वपूर्ण है| यदि वे वास्तव में इसके बारे में नहीं सोचते हैं,परन्तु अचेतन रूप से वे ऐसा चाहते हैं| प्रत्येक सोचता है कि वह इस दुनिया का केन्द्र है| एक तीन वर्षीय लड़की को पूछा गया कि, “तुम क्या बनना चाहोगी?” “एक मूर्ति!” उसने उत्तर दिया “क्यों” “तो प्रत्येक व्यक्ति को मुझे देखना पड़ेगा|” घमंड और स्वार्थीपन हमारे लहू में बहता है| यह विनम्र मसीह की आत्मा के एकदम विपरीत है| यीशु ने कहा था “तुम कैसे इस बात का विश्वास कर सकते हो कि, जो एक दूसरे से सम्मान प्राप्त करता है, और उस सम्मान को नहीं ढूंढता जो केवल परमेश्वर से आता है?”( यूहन्ना ५:४४ )| “मुझसे सीखो, क्योंकि मै हृदय से सौम्य और विनम्र हूँ, और तुम तुम्हारी आत्माओं के लिए सुख पाओगे|” क्योंकि मेरा जुआ आसान है और मेरा बोझ हल्का है|” “क्योंकि जो कोई भी अपने जीवन को बचाने की इच्छा रखता है, इसे खोयेगा, परन्तु जो कोई भी मेरे लिए इसे खोता है, इसे पायेगा” “क्या तुम्हे विशाल चीजों को तुम्हारे लिए ढूँढना चाहिए? उन्हें मत ढूंढो” (यूहन्ना ५:४४, मती ११:२९-३०, १६:२५-२६; यिर्मयाह ४५:५)


०३.३ -- मूर्तिपूजा पर विजय

अन्य देवताओं की पूजा करने की अनुमती क्यों नहीं देना चाहिए, साथ ही यह परमेश्वर की पहली आज्ञा है? वास्तव में परमेश्वर एक ही है| सभी प्रसिद्धिप्राप्त इस संसार में अस्थायी हैं | परमेश्वर अकेले ही हमेशा जीवित हैं| उन्होंने हमारी रचना की थी, तो उनके प्रति हमारे मन में उनकी महिमा और आदर है| वह इस पूरी सृष्टि के केन्द्र हैं| प्रत्येक दिन हमारा स्वार्थीपन टूटता जब तक कि हम आनंदपूर्वक अपराधों को स्वीकार और परमेश्वर की सेवा नहीं करते है| हमें अपने आपको परमेश्वर के हाथों सौंप देने की आवश्यकता है| ना बैंक में हमारा जमा धन, हमारा स्वास्थ्य, ना ही हमारे विशेष गुण, हमारे जीवन का आधार होना चाहिए|

इब्राहीम, इसहाक से, उसका कानूनन वारिस और बहुत प्रतीक्षा के बाद होने वाले पुत्र से बहुत प्रेम करता था| वह अपने पुत्र के साथ ऐसा तल्लीन था कि ऐसा प्रतीत होता था कि वह उसके लिए परमेश्वर से अधिक महत्वपूर्ण है| तब प्रभु ने उसके हृदय की परीक्षा ली थी| उन्होंने उसे अपने प्रिय पुत्र को जलाकर बलि चढाने का आदेश दिया था| इब्राहीम वो करना चाहता था जो कि असंभव प्रतीत हो रहा था, केवल परमेश्वर की महिमा के लिए अपने एकमात्र पुत्र का बलिदान करना चाहता था| इस समय परमेश्वर ने उस अन्तिम क्षण में यह नामंजूर कर दिया कि इब्राहीम वादे के अनुसार प्राप्त किये गये अपने पुत्र को मार डाले, और उसके स्थान पर एक भेड प्रदान किया गया था| इस भीतरी खलबली की अवस्था में, परमेश्वर महिमामयी हुए थे जब इब्राहीम ने स्वयं अपने पुत्र से अलग होने का अन्तिम निर्णय ले लिया था| उसने सिद्ध कर दिया था कि वह पुत्र की अपेक्षा परमेश्वर से अधिक प्रेम करता था|

हमें अपने आपको समय समय पर परखना चाहिए और देखना चाहिए कि कहीं कोई छोटी या बड़ी मूर्ति हमारे और परमेश्वर के बीच में खडी तो नहीं है| वे किताबों, जेवर, तस्वीर, यादें, रुचियों, आदतों, धन, मकान और ऐसा ही और कुछ भी हो सकता है| यहाँ तक कि कभी कभी लोग हमारे दिलों पर अधिकार कर लेते हैं|

मूर्तिपूजा का आकर्षण लोगों में ऐसा बढा कि वे अपने शासकों को देवतास्वरूप मानकर उनकी पूजा करने लगे| सभी लोग नेपोलियन, अलातुर्क, हिट्लर, नस्सेर, खोमिनी और अन्य शासकों के अधिकार में थे| यद्यपि उनकी पुस्तके और स्मास्क प्रायः ही उनकी मृत्यु के बाद जला या नष्ट कर दी गई| पैगम्बर (उपदेशक) यिर्मयाह ने लोगों को किसी भी व्यक्ति से आसक्ति या मानवीय सहायता पर विश्वास करने के विरुद्ध चेतावनी दी है “यहोवा यह सब कहता है, “जो लोग केवल दूसरे लोगों में विश्वास करते हैं उनका बुरा होगा| जो शक्ति के लिये केवल दूसरों के सहारे रहते हैं उनका बुरा होगा| क्यों? क्योंकि उन लोगों ने यहोवा पर विश्वास करना छोड़ दिया है|” (यिर्मयाह १७:५)

प्राय ही लोग सिनेमा कलाकारों और खेलकूद में उत्कृष व्यक्तियों को इस प्रकार से पूजने लगते है जैसे वे ईश्वर हैं | वे बड़े खेल के मैदानों में संगीत सभा में मंत्रमुग्ध होकर जनसाधारण की उन्मादता में परिवर्तित हो जाते हैं| हमें बहुत अधिक सतर्क रहने की आवश्यकता है| हम नहीं कहते कि लोगों की सेवा या आदर करना अपराध है| परंतु परमेश्वर से अधिक किसी इन्सान से प्रेम करना या उस पर विश्वास करना एक आध्यात्मिक विश्वासघात है| क्या परमेश्वर हमारे साथ एक अनंत समझौते के साथ जुड नहीं चुके हैं? कोई आश्चर्य की बात नहीं मसीह लोगों को “एक बुरी एवं व्यभिचारिक पीढ़ी” कहते हैं, क्योंकि वे लोग परमेश्वर से अपने हृदय की पूर्णता से प्रेम, गहराई से उनका आदर या केवल उन पर ही विश्वास नहीं करते हैं|

परमेश्वर से दूर जाने के कारण रिक्त स्थान निर्मित हो चुका है जिस के परिणाम स्वरुप आज मूर्तिपूजा के कई प्रकार अस्तित्व में आ चुके है| परमेश्वर एक जलनशील परमेश्वर है, और हमारे हृदयों पर वे केवल उनका अधिकार चाहते हैं| वह हमारे प्रेम और आज्ञाकारिता का कुछ या अधिक भाग के साथ संतुष्ट नहीं हैं| वह पूरी तरह से और अनंतता से हम पर अधिकार चाहते हैं| इसलिए हमारे जीवनों से प्राचीन और आधुनिक मूर्तियां अदृश्य हो जाना चाहिए, और हमें हमारे स्वर्गीय पिता के साथ अपनी वचनबद्धता को फिर से नविन कर लेना चाहिए| अपने आप से पूछो, तुम्हारे जीवन में कितनी छिपी हुई मूर्तियां हैं और उनको हमेशा के लिए नष्ट करने के लिए तुम्हे क्या करना चाहिए?


०३.४ -- क्या पहली आज्ञा के साथ ईसाई विश्वास की अनबन है?

यहूदी और मुस्लिम दस आज्ञाओं के इस बिंदु की ईसाई व्याख्या पर एक मत हो सकते हैं| यद्यपि वे उनके मत द्वारा ईसाईयों पर पहली आज्ञा का उल्लंघन करने का आरोप लगाते हैं| “वे दलील देते है “तुम ईसाई वास्तव में नास्तिक हो”, “क्योंकि तुम पहली और सबसे महत्वपूर्ण आज्ञा को तोड़ते हो| तुम यह दावा करके कि यहाँ तीन ईश्वर है, और उनमे से एक सूली पर मर गये थे ईश्वरीय निंदा करते हो|” यहूदी और मुस्लिम ईसाईयों पर ईश्वरीयनिंदा करने का आरोप लगाते है क्योंकि वे पवित्र आत्मा की एकता में विश्वास करते हैं|

यीशु ने किस प्रकार से ऐसे आरोप का उत्तर दिया था? यीशु को कठोर हृदय लोगों द्वारा किये गये ऐसे आक्रमणों का प्रतिदिन ही सामना करना पड़ता था| यीशु ने परमेश्वर के साथ उनकी एकता की विशद व्याख्या बहुत स्पष्टता से की थी “मै और पिता एक है” (यूहन्ना १०:३०)| ऐसा उन्होंने कभी नहीं कहा “मै और पिता दो हैं” परंतु एक हैं| इसके बाद उन्होंने कहा, “मै पिता में हूँ और पिता मुझमे है|” पकडे जाने से पहले उन्होंने अपने अनुयायियों के लिए प्रार्थना की थी, “ताकि वे भी वैसे ही एक हो सकें जैसे हम एक हैं ” (यूहन्ना १७:२२) यह शब्द पवित्र त्रयी की एकता को सिद्ध करते हैं| यह अनेक वचन यहाँ एक वचन के रूप में समझा गया है| यीशु ने पिता के साथ उनकी परिपूर्ण एकता की साक्षी दी| गणित के अनुसार यहसत्य समझा नहीं जा सकता है|”इसलिए मैं तुम्हे चितौनी देता हूँ कि जो कोई परमेश्वर की अगुआई से बोलता है, वह नहीं कहता कि यीशु श्रापित हैं; और न कोई पवित्र आत्मा के बिना कह सकता है कि , “यीशु प्रभु है|” (१ कुरिन्थियों १२:३) यह एक अनंत आद्यात्मिक सत्य है| यदि हम परमेश्वर की आत्मा के लिए अपनों मनों को नहीं खोलेंगे हम आध्यात्मिक वास्तविकताओं को समझ नहीं सकेंगे|

यीशु ने कहा था “यदि कोई मुझमें प्रेम रखता है तो वह मेरे वचन का पालन करेगा| और उससे मेरा परम पिता प्रेम करेगा| और हम उसके पास आयेंगे और उसके साथ निवास करेंगे|” (यूहन्ना १४:२३) यीशु ने अपने अनुयायियों से वादा किया था कि पवित्र आत्मा उनमे निवास करेगा| इसी के साथ उन्होंने स्वर्गीय पिता के साथ उनकी परिपूर्ण एकता का आश्वासन उनको दिया था, और यह भी कि वे दोनों अपने अनुयायियों के हृदयों में निवास कर चुके होंगे|

ईसाई लोग तीन अलग अलग ईश्वरों में विश्वास नहीं करते, परंतु एक ही परमेश्वर में विश्वास करते हैं जो अपने आप को पिता, पुत्र और पवित्र आत्मा के रूप में प्रकट करते हैं| त्रयी की एकता को स्वीकार करके हम पहली आज्ञा को तोड़ नहीं रहे है परंतु इसके स्थान पर उसे पूरा कर रहे हैं| यीशु मसीह की मृत्यु में परमेश्वर के साथ हमारी संधि के परिणामस्वरूप परमेश्वर की आत्मा हमारे हृदयों पर उंडेल दी गई है| विश्वसनीय आत्मा हमें प्रोत्साहित करता है कि हम हमारे पिता परमेश्वर को बुलाए और उनके पितामयी नाम को पवित्र करें| हम इसी के समान बराबर मात्रा में यीशु पर विश्वास करते हैं और अपने संपूर्ण हृदय से उनसे प्रेम करते हैं क्योंकि “पवित्र आत्मा के द्वारा, जो हमें दिया गया है, परमेश्वर का प्रेम हमारे हृदय में उंडेल दिया गया है|” (रोमियों ५:५) हमें यह जानना चाहिए कि पवित्र त्रयी की एकता प्रत्येक उस व्यक्ति से छिपा कर रखी गई है जो वापस से पवित्र आत्मा द्वारा उत्पन्न नहीं हुआ है और इसके महिमा मयी सत्य की खोज नहीं करता है|

वास्तव में कुरान त्रयी ईसाईयों के विश्वास पर प्रहार नहीं करते है| इसके स्थान पर यह संप्रदायवादी त्रयी पर प्रहार करते है जिस पर सभी ईसाई कलीसियाएं विरोध एवं प्रहार करते हैं| कुरान पिता, माता एवं पुत्र के त्रयी के विरोध में लड़ाई करते हैं (सूरा अल-मैदा ५:११६)| कुरान इस विश्वास का भी विरोध करती है यीशु, मरियम का पुत्र परमेश्वर है (सूरा-अल-मैदा ५:१७,७२) या एक मात्र तीन का तीसरा है (सूरा-अल-मैदा ५:७३)| निश्चय ही बाईबिल में पवित्र त्रयी को स्पष्ट रूप से समझना यह है, कि परमेश्वर, एकता, अनंत एकरूपता, पिता के त्रयी रूप जो अपने शब्द द्वारा बात करते हैं और अपनी आत्मा द्वारा कार्य करते हैं सम्मिलित हैं| हम जीवविज्ञान संबधी पिता, माता और पुत्र के त्रयी को ठुकराते है वैसे ही जैसे हम यह दावा करते हैं कि परमेश्वर , मरियम के पुत्र यीशु हैं| हम स्वीकारते हैं, परमेश्वर पिता, परमेश्वर पुत्र, और परमेश्वर पवित्र आत्मा एक और केवल एक परमेश्वर के समान हैं|


०३.५ -- पुराना नियम पवित्र त्रयी के बारे में क्या कहता है?

पुराने नियम में पवित्र त्रयी की एकता के कुछ ऐसे प्रभावशाली प्रमाण शामिल हैं| यहाँ तक कि कुरान भी इसे नकार नहीं सकती है|

भजन संहिता २:७,१२, में हमने परमेश्वर का यीशु के बारे में, यीशु के जन्म से हजारों वर्ष पूर्व रहस्य प्रकटीकरण के बारे में पढ़ा था, “तू मेरा पुत्र है, आज तू मुझ से उत्पन्न हुआ” उन्होंने लोगों को चेतावनी दी “पुत्र को चूमो ऐसा न हो कि वह क्रोध करे, और तुम मार्ग ही में नाश हो जाओ|”

यशायाह ७:१४ मसीह के जन्म के ७०० वर्ष पूर्व अभिव्यक्त करता है “इस कारण प्रभु आप ही तुम को एक चिन्ह देगा: सुनो, एक कुमारी गर्भवती होगी और पुत्र जनेगी, और उसका नाम इम्मानुएल रखेगी (अर्थात : ईश्वर हमारे संग है)|

यशायाह ९:६ में महान वादा शामिल है, “क्योंकि हमारे लिए एक बालक उत्पन्न हुआ, हमें एक पुत्र दिया गया है; और प्रभुता उसके कंधे पर होगी, और उसका नाम अद्भुत युक्ति करनेवाला पराक्रमी परमेश्वर, अनंत काल का पिता और शांति का राजकुमार रखा जायेगा|” पुराने नियम के यह दैवीय वचन यीशु के ईश्वरीय रूप और पिता के साथ उनकी परिपूर्ण एकता का प्रमाण देते हैं|

शमूएल २ के ७:१२-१४ वचन के अनुसार, राजा दाउद से वादा किया गया था कि उसके पुत्रों में से एक “जो उसके शरीर से आता है उसी परमेश्वर का पुत्र होगा| तब से मसीह या दाउद के पुत्र के लिए दूसरा नाम परमेश्वर का पुत्र हो चुका है|

भजन संहिता ११०:१ में हमने पढ़ा, “मेरे प्रभु से यहोवा की वाणी यह है, कि तू मेरे दाहिने हाथ बैठ, जब तक कि मै तेरे शत्रुओं को तेरे चरणों की चौकी न कर दूँ|” क्या वहाँ दो प्रभु है? कभी नहीं, यह वचन, पिता परमेश्वर पुत्र और पवित्र आत्मा के बीच परिपूर्ण एकता को प्रस्तुत करते हैं|

आरंभ से परमेश्वर अनेक वचन में कहते आये हैं, “हम मनुष्य को अपने स्वरूप के अनुसार अपनी समानता में बनाएँ|” (उत्पति १:२६)

यह दर्शाता है कि पवित्र आत्मा की एकता की गवाही कोई ईसाईयों द्वारा बनायी गई कहानी नहीं है| निश्चित ही यह एक सत्य है जो कि यीशु के जन्म के हजारों वर्षों पूर्व ही परमेश्वर ने प्रकट किया था| परमेश्वर के रहस्य प्रकटीकरण के विरोध में कौन खड़ा रह सकता है?


०३.६ -- यीशु के देवतत्व की ओर कुरानी प्रमाण

केवल पेंतातयूच, भजन संहिता और उपदेशक ही पिता परमेश्वर, पुत्र और पवित्र आत्मा की एकता की गवाही नहीं देते, परंतु कुरान में भी ऐसे वचन शामिल हैं जो ईसाई गवाही को संपुष्ट करते हैं| यदि प्रत्येक मुस्लिम ने कुरान को खुले दिमाग के साथ पढ़ा होगा उसने उन वचनों पर विश्वास किया होगा जो, मरियम एक कुवांरी द्वारा यीशु के जन्म को बताते हैं| यीशु अल्लाह के शब्द के रूप में, बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के पैदा हुए थे| अल्लाह ने अपनी आत्मा कुंवारी मरियम के अंदर फूंक दी थी इसीलिए यीशु का जन्म हुआ था (सुरस- अल- अंबिया २१:९१ और अल-तःरिम ६६:१२)|

सुरस अल-इमरान ३:४५, अल्निसा ४:१७१ और मरयम १९:४३ विशेष रूप से जोर देते है कि यीशु अल्लाह के शब्द का अवतार और उनकी एक आत्मा है| यह वचन यूहन्ना रचित सुसमाचार की इस्लामिक गूंज है “उस आदि शब्द ने देह धारण कर हमारे बीच निवास किया| हमने परम पिता के एकमात्र पुत्र के रूप में उसकी महिमा का दर्शन किया|” (यूहन्ना १:१४)

सुरस अल बकार २:८७,३५२ और अल-मैदा ५:११० में, हमने पढा कि मसीह, को पवित्र आत्मा द्वारा शक्ति दी गई है ताकि वे कीचड से चिड़िया के समान जीव बना सके होंगे एवं उसे फूंक कर जीवन दे सके होंगे| उन्होंने अल्लाह की अनुमति द्वारा अन्धों को, कोडियों को चंगा, एवं मृतकों को जीवित किया था| अल्लाह, मसीह और पवित्र आत्मा के बीच कार्यों में समन्वयता, कुरान में स्पष्ट रूप से प्रकट हुई थी| मुस्लिम लोग क्यों परमेश्वर और उनके मसीह के विरोध में विद्रोह करते हैं?

सूरा-मरयम १९:२१ में हम पढ़ सकते है, “हम उस को लोगों के लिए हमारी दया का एक चिन्ह बनाते हैं |” यह हमेशा आश्चर्यजनक रहा है कि कुरान में अल्लाह बहुवचन में कहते हैं और मसीह को दयावान की दया कह कर बुलाते है| यह इसलिए है कि उनमे दैवीय सत्व के ही कण हैं| पुराने नियम और कुरान में कुछ स्थानों पर पवित्र त्रयी की एकता को सचमुच दृढतापूर्वक बताया गया है| देवदूतों के साथ परमेश्वर की अतिप्रशंसा करने के लिए हम प्रोत्साहित किये गये हैं, “पवित्र, पवित्र, पवित्र, सर्वशक्तिशाली यहोवा परम पवित्र है! यहोवा की महिमा सारी धरती पर फैली है|” (यशायाह ६:३) पवित्र शब्द को तीन बार दोहराना संकेत करता है कि पिता पवित्र है, पुत्र पवित्र है और पवित्र आत्मा पवित्र है, वे कुल मिलकर पवित्रता में एक हैं|


०३.७ -- ईसाई विश्वास मसीह के देवत्व में है

यह कोई अतिरंजना नहीं थी जब मसीह के उपदेशकों ने एकमत होकर उनके देवत्व की गवाही दी थी| मौत से डरने के स्थान पर, पौलुस ने खुलकर घोषणा की थी “वह अदृश्य परमेश्वर का दृश्य रूप है|”(कुलुस्सियों १:१५ ) यूहन्ना जोड़ते है “उस आदि शब्द ने देह धारण कर हमारे बीच निवास किया| हमने परम पिता के एकमात्र पुत्र के रूप में उसकी महिमा का दर्शन किया| वह करुणा और सत्य से पूर्ण था|”( यूहन्ना १: १४ ) उपदेशक पतरस गवाही देते है “तू मसीह है, साक्षात परमेश्वर का पुत्र|” (मत्ती १६:१६)

निकाएया की परिषद ने ईसाई विश्वास का सारांश दिया था, “मसीह ईश्वर का ईश्वर, रोशनी की रोशनी, उसी ईश्वर के वही ईश्वर, इकलौता, बनाया हुआ नहीं पिता के साथ एक सूत्र में बंधा हुआ|”

मुस्लिम और यहूदियों ने उनके कठोर सिद्धांतों के साथ परमेश्वर की सर्वसमर्थता की सीमाएं तय कर दी हैं| कौन परमेश्वर के स्वयं के रहस्य प्रकटीकरण जो वो हैं, को ठुकरा सकता है? किस के पास यह अधिकार है जो सर्वशक्तिमान को एक पुत्र होने और संसार को बचाने के लिए उसका बलिदान करने से रोक पाये? परमेश्वर स्वतंत्र हैं! मसीह सृष्टि के निर्माण से पहले आये थे| वह परमेश्वर से संसार की संधि करने के लिए और स्वर्गीय शांति को बनाये रखने के लिए मनुष्य बने थे| मसीह दुनिया को बचाने के लिए मनुष्य बने| वह अपराधरहित बने रहे थे ताकि वे संसार के अपराधों को दूर ले जा सके| यूहन्ना बपतिस्मा देने वाले इस दैवीय बुलावे का उल्लेख करते हैं “परमेश्वर के मेमने को देखो जो जगत के पाप को हर ले जाता है|” (यूहन्ना १:२९) इसके परिणामस्वरूप हम गोद लिये जा चुके हैं, और परमेश्वर को स्वर्ग में हमारे पिता कह कर बुलाते है, तब से जब से हमारे अपराध क्षमा किये गये हैं| मसीह ने केवल ईसाईयों के लिए ही नहीं, सभी लोगों के लिए एक विशाल उद्धार की स्थापना की थी| उनका उद्धार हिंदुओं, बुद्धों, यहूदियों, मुस्लिमों और नास्तिकों के लिए है| उन्होंने अनंत जीवन की अनुमति प्रत्येक उस व्यक्ति को दी है जो उन पर पूर्णरूप से विश्वास करता है और उनको अपना प्रभु और रक्षक के रूप में स्वीकार करता है| पुत्र हमें पिता की ओर ले जाते हैं और पिता हमें पुत्र से खिंच लेते हैं| परमेश्वर ने स्वयं को यरदन नदी पर यीशु के बपतिस्मे के समय प्रकट किया था, “यह मेरा प्रिय पुत्र है| जिससे मैं अति प्रसन्न हूँ|” (मत्ती ३:१७) जो स्वर्ग से आती हुई आवाज को रोक सकता है|


०३.८ -- पहली आज्ञा का उद्देश्य क्या है?

पहली आज्ञा का उद्देश्य साधारणतया परमेश्वर से प्रेम करना है| मूसा को सबसे महत्वपूर्ण आज्ञा को कहने का विशेषाधिकार मिला “और तुम्हे यहोवा, अपने परमेश्वर से अपने सम्पूर्ण हृदय, आत्मा और शक्ति से प्रेम करना चाहिए|” (व्यवस्थाविवरण ६:५) हम या तो परमेश्वर से प्रेम करें और उनकी आत्मा के साथ समरसता में रहें या उनसे घृणा करें और उनकी इच्छा के विरोध में रहें| यदि हम परमेश्वर से प्रेम करते हैं, हम उनके बारे में सोचते हैं, उनको सुनते हैं, वह काम करे जो उनको पसंद हो, उनके लिए जिएं और उनकी चाह करें जैसे एक दुल्हन अपने दुल्हे को चाहती है और उसके पत्रों को पढती है और बार बार पढती है| परंतु वह जो अपने घमंड में स्थिर रहते हैं, और स्वयं अपने आपको देवतुल्य समान देखते है, वास्तविक परमेश्वर की ओर अपनी पीठ करते हैं सचमुच उनके वचन को भूल चुके है, और परिणामस्वरूप उनके हृदयों की कठोरता परमेश्वर के क्रोध के तले गिरती है|

फिरभी जो मसीह से प्रेम करते हैं परमेश्वर की आत्मा के प्रति खुले हैं| वे उनके सभी अपराधों के लिए क्षमा प्राप्त करते हैं और पवित्र आत्मा की शक्ति में चलते हैं| वे अपने पिता की छबि में बदल चुके हैं तब जब से वे यह प्रार्थना करते है कि पिता का नाम उनके जीवनों और उनके घरों को पवित्र करेगा| यदि हम वास्तव में परमेश्वर से प्रेम करते हैं, हम उनकी ओर घूमते है और अनुग्रह पर अनुग्रह प्राप्त करते हैं| हम प्रत्येक दिन अपने अन्तर्मन की स्वच्छता, का अनुभव करते हैं, परमेश्वर के बच्चों की स्वतंत्रता में जीते और उनकी आध्यात्मिक पुरोहिताई कार्यों में भाग लेते हैं| वह जो परमेश्वर से सच्चा प्रेम करते हैं,अपने जीवनों में से मूर्तियों को बाहर निकाल देते हैं, नए समझौते में स्थिर खड़े रहते है, जिसका रहस्य हमारे विश्वास और जीवन के विषय में प्रकटित हुआ था “सो हम जानते हैं कि हमने अपना विश्वास उस प्रेम पर टिकाया है जो परमेश्वर में हमारे लिये है| परमेश्वर प्रेम है और जो प्रेम में स्थित रहता है, वह परमेश्वर मे स्थित रहता है और परमेश्वर उसमे स्थित रहता है|” (१ यूहन्ना ४:१६)

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