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रोमियो – प्रभु हमारी धार्मिकता है|
पवित्र शास्त्र में लिखित रोमियों के नाम पौलुस प्रेरित की पत्री पर आधारित पाठ्यक्रम
भाग 1: परमेश्वर की धार्मिकता सभी पापियों को दण्ड देती है और मसीह में विश्वासियों का न्याय करती है और पापों से मुक्त करती है। (रोमियों 1:18-8:39)
द - परमेश्वर की शक्ति हमें अपराध कि शक्ति से छुडाती है| (रोमियो 6:1 - 8:27)

1. विश्वासी अपने आप को पाप के लिए मृतक समझता है| (रोमियो 6:1-14)


रोमियो 6:12–14
12 इसलिये पाप तुम्हारे मरणहार शरीर में राज्य न करे, कि तुम उस की लालसाओं के अधीन रहो। 13 और न अपने अंगो को अधर्म के हथीयार होने के लिये पाप को सौंपो, पर अपने आप को मरे हुओं में से जी उठा हुआ जानकर परमेश्वर को सौंपो, और अपने अंगो को धर्म के हथीयार होने के लिथे परमेश्वर को सौंपो। 14और तुम पर पाप की प्रभुता न होगी, क्‍योंकि तुम व्यवस्या के आधीन नहीं बरन अनुग्रह के आधीन हो।।

वह जो अपराध की शक्ति से छुटकारा पा चुका है और यीशु के साथ मित्रता में स्थापित हो चुका है, अपराध से नफरत करता है, उससे घिन का अहसास करता है, और अपराध करना नहीं चाहता है| कामुकता बलवान होती है, परन्तु यीशु के लिए प्रेम इससे अधिक बलवान है| जो सुसमाचार में डट कर खड़ा रहता है, और प्रार्थना मे लगा रहता है, अपने शरीर और आत्मा की सारी इच्छाओं का विरोध करने की शक्ति ढूढँता है और प्राप्त कर लेता है| वह स्वयं अपना सेवक नहीं होता, या किसी बुरे सिद्धांत का अनुसरण नहीं करता परन्तु पूरी इच्छापूर्वक, दोषपूर्ण आचरण से परे हट जाता है| वह प्रलोभनों की पुकार को और नहीं सुनता, क्योंकि वह लगातार विजयप्राप्त करने वाले यीशु की संगत में है, जिनकी शक्ति तुम्हारे शारीर में मौत के सभी उद्देश्यों से अधिक ताकतवर है| पवित्र आत्मा तुममे दुनिया के सभी दर्शनशास्त्रों से अधिक समझदार, ज्ञान स्थापित करती है|

सभी प्रकार के बुरे कार्यों, पुस्तकों, चलचित्रों, और बुरी संगत से परे रहो| इन बातों के कारण अपने आपको यीशु की मित्रता से अलग मत होने दो| अपने अपराध की शक्ति पर विश्वास मत करो, परन्तु यीशु पर और उनकी उद्धार शक्ति पर विश्वास करो|

तुम स्वयं परमेश्वर के हो| तुम उनकी आत्मा की साँस लेते और अनंत सच्चाई का अनुभव करते हो| तो कैसे तुम बिना परमेश्वर के तुम्हारे अपने मार्गों के बारे में सोच सकते हो| अपने आपको अपने परमेश्वर को पास लाओ जैसे पवित्र युद्ध के लिए एक सिपाही, और तुम्हारा समय तुम्हारी शक्ति, और तुम्हारे पैसे को उनको सौंप दो| तुम्हारा त्याग एक कर्तव्य नहीं, बल्कि एक विशेषाधिकार, धन्यवाद और आनंद है| अपने परमेश्वर से पूछो कि वे तुम्हारी सेवकाई कहाँ चाहते हैं, क्योंकि फसल वास्तव में प्रचुर मात्रा में है परन्तु कार्य करने के लिए मजदूर ही बहुत कम है| अब, शीघ्रता पूर्वक एवं हठपूर्वक अपने परमेश्वर की सेवा न करो, परन्तु अपने आप को उनके मार्ग दर्शन के लिए सौंप दो| वह तुम्हारे द्वारा उन लोगों को जो अपराधों से मर चुके है, उठाना चाहते है ताकि वे उनके अनंत जीवन में जी सके| तो तुम्हारे शारीर और तुम्हारी सारी सम्पति को धार्मिकता के हथीयार के रूप में परमेश्वर को दे दो|

धन्यवाद देना मत भूलो, क्योंकि तुम अपराध में मर चुके हो, परन्तु अब यीशु में जीवित हो| तुम्हारे उपहारों को परमेश्वर के पास वापस ले जाओ ताकि वे उन उपहारों को बहुतों के उद्धार के लिए यंत्रों के रूप में उपयोग कर सकें| पवित्र एक मात्र परमेश्वर ने तुम्हे यीशु के लिए योग्यता दी है और की तुम्हारी कमजोरी में तुम्हे उनकी धार्मिकता की शक्ति की महिमा करने के लिए बाहर भेज सके| परेशान मत हो! उपदेशक पौलुस अपने आपको यीशु का बंधक सेवक कहते है| तो, तुम कब सचमे उनका अनुसरण करोगे, अपना जीवन, हर ज्ञान परमेश्वर की सेवा में दोगे|

पौलुस के समान, वे सभी लोग जो परमेश्वर के प्रेम की मित्रता में सेवा करते हैं प्रत्येक दिन पवित्र आत्मा की शक्ति का अनुभव करते हैं, और उनके ह्रदयों में होनेवाले प्रारंभिक परिवर्तनों को पहचानते है| अपराध अब और अधिक तुम्हारे ह्रदयों के सिहासन पर बैठ कर मुस्कुरा नहीं सकता, परन्तु यीशु ने तुम्हारे ह्रदयों पर अधिकार कर लिया है, और उनके निवास द्वारा हमारे जीवनों में एक नये युग का प्रारंभ हो चुका है| परमेश्वर के नियमों का पालन करना एक असंभव कर्तव्य नहीं है, परन्तु हम पवित्र आत्मा के अनुरोध द्वारा इसे आनंद पूर्वक रूप से करना चाहते है|प्रत्येक ईसाई व्यक्ति को अनुग्रह की शक्ति का उपहार मिला है| मृत्यु और भ्रष्टाचार उसमे राज्य नहीं कर सकते| केवल एक यीशु है जिन्होंने उनके महान अनुग्रह के साथ हमारे दिमागों एव ह्रदयों पर राज्य किया है|

प्रार्थना: ओ यीशु मसीह, हम हर सुबह और हर शाम आपकी स्तुति करते हैं, क्योंकि आपने अपने आप को हमारे नाशवान शरीरों के साथ बांध कर अनंत जीवन का भागीदार बनाया है| आप हमारे दिमागों और ह्रदयों पर राज्य करते हैं| हमें अच्छा आचरण सिखाईये कि हम हमारे पूरे दिमाग से, शक्ति से और सम्पति से आप की और आपके स्वर्गीय पिता की स्तुति कर सके और यह कि हम अपने आप को सभी विश्वासियों के साथ आपके प्रेम के बंधक सेवकके रूप में समझे|

प्रश्न:

39: हम कैसे अपने आप को और अपने शरीर के अंगों को परमेशर की धार्मिकता के हथियारों के समान लायें?

इसीलिए मै भी परमेश्वर और लोगों के समक्ष सदा अपनी
अंतरात्मा को शुध्द बनाये रखने के लिए प्रयत्न करता रहता हूँ|

(प्रेरितों के काम 24:16)

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