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रोमियो – प्रभु हमारी धार्मिकता है|
पवित्र शास्त्र में लिखित रोमियों के नाम पौलुस प्रेरित की पत्री पर आधारित पाठ्यक्रम
भाग 1: परमेश्वर की धार्मिकता सभी पापियों को दण्ड देती है और मसीह में विश्वासियों का न्याय करती है और पापों से मुक्त करती है। (रोमियों 1:18-8:39)
अ - सारा संसार शैतान के तले झुका है और परमेश्वर अपनी पूरी धार्मिकता में न्याय करेंगे (रोमियों 1:18-3:20)

1. परमेश्वर का क्रोध राज्यों के विरोध में प्रगट होता है (रोमियो 1:18-32)


रोमियो 1:26-28
26 इसलिये परमेश्वर ने उन्हें नीच कामनाओं के वश में छोड दिया; यहां तक कि उन की स्त्रियों ने भी स्वाभाविक व्यवहार को, उस से जो स्वाभाव के विरुद्ध है, बदल डाला| 27 वैसेही पुरुष भी स्त्रियों के साथ स्वाभाविक व्यवहार छोडकर आपस में कामातुर होकर जलने लगे, और पुरुषों ने पुरुषों के साथ निर्लज्ज काम करके अपने भ्रम का ठीक फल पाया| 28 और अब उनहों ने परमेश्वर को पहिचानना न चाहा, इस सलिए परमेश्वर ने भी उन्हें उन के निकम्मे मन पर छोड दिया; कि वे अनुचित काम करें|

पौलुस ने यह भयंकर वाक्य अपने पहेले अध्याय में तीन बार लिखा “परमेश्वर ने उन्हे छोड दिया|” यह वाक्य, अन्त, क्रोध और दण्ड का पहला क्रम बतलाता है| शोक उनके लिए, जिनको परमेश्वर ने बुराई की शक्ति में छोड दिया क्योंकि वे सर्वशक्तिमान द्वारा की जाने वाली परवाह और रक्षा के विचार से दूर हो गये हैं|

परमेश्वर से यह अलगाव स्वयं ही उत्कृष्ट अभिलाषाओं और नास्तिक विचारों की तीक्ष्ण उत्कंठा को स्पष्ट करता है| जिस प्रकार एक जानवर गर्मी में भागता है, उसी तरह से ये लोग भी केवल अपनी शारीरिक इच्छाओं की तृप्ति के बारे में सोचते हुए भागते हैं| जहाँ पवित्र आत्मा मनुष्य के मन में निवास नहीं करती, और उसके शरीर एवं अचेतन मन पर नियंत्रण नहीं करती, मनुष्य एक व्यभिचारी के रूप में परिवर्तितहो जाता है, तब भी जब कि वह अच्छाई और शिष्टता के नकाब से ढका हुआ है|

विशेषरूप से आज के पुरुष और महिला के समानता के युग में, कुछ महिलाएं पुरुष के बिना अपनी इच्छाएँ तृप्त करने के अधिकार की मांग करती है| इससे भी आगे कुछ संस्थाएं, जनसंख्या वृद्धि को समाप्त करने के लिए समलैंगिक सम्बन्धों को बढ़ावा देंती है| ऐसा है तो भी पौलुस उन सभी को जिन्होंने अपनी उत्कृष्ट अभिलाषाओं से हार मान ली है को अनैतिक रास्तों के रूप में मनन करते है, जैसे कि परमेश्वर के क्रोध के तले वे स्वय को ही छलने के लिए हार चुके है|

उन सभी का स्वयं में ही बहुत बड़ा नुकसान है, ऐसे जैसे कि भटकी हुई पेचीदगी उन के दिमागों में है, वे बहुत समय तक सामान्य नहीं रहते, परन्तु वे सपने देखते हैं और वह कार्य करते हैं जो वे करना नहीं चाहते है; क्योंकि जो भी पाप करता है वह पाप का दास है| इसके अलावा और भी बहुत से पापी व्यवसाय और कार्य है, जोकि उन सभी को अपने वश में कर लेते है जो परमेश्वर के नियमों के अनुसार नहीं रहते हैं|

सभ्यता के अस्वीकार करने का कारण गहरा है बुराई का सत्व काम वासना, भूल करना नहीं, बल्कि भ्रष्ट करना है, जो परमेश्वर को उनके दिमागों में रहने देना नहीं चाहती| क्योंकि वे अपने आप को और इस जगत को परमेश्वर से अधिक प्रेम करते थे, वे अपवित्रता से व्यभीचार में गिरते जाते थे| वह जो उन लोगों की गवाहियों को पढता है जो कि मसीह द्वारा तुरंत बचाये गए थे, समझता है कि वे लोग, उनके मोक्ष से पहले, परमेश्वर से बहुत दूर थे| उन लोगों के अविश्वास का नतीजा था कि वे सभी प्रकार की काम वासनाओं और गंदगियों के दास थे| लेकिन जब मसीह ने उनको पाया, उनको क्षमा, पवित्रीकरण, बदलाव, शक्ति, आशा और खुशियां दी|

अब तक वह व्यक्ति जो अपनी इच्छा से परमेश्वर से दूर है, पश्चताप एव पापों से मुक्ति के लिए पवित्र के बुलावे का विरोध करता है, वह मिलावटी दिमाग वाला है| परमेश्वर के हाथ से किसी व्यक्ति के बारे में लिखा गया कोई भी शब्द निश्चित रूप से इससे अधिक कष्टकारक नहीं है, जितना कि मिलावटी शब्द है, क्योंकि उस प्रकार की परिस्थितियों में वह परमेश्वर के पास वापस नहीं आ सकता है क्यों कि इस प्रकार की वापसी के लिए मन परिवर्तन की आवश्यकता है| यूनानी शब्द ‘पश्चाताप’ का मूल अर्थ दिमाग में परिवर्तन है| परमेश्वर लोगों के ह्रदयों में मौलिक एव सम्पूर्ण रूप से परिवर्तन की अपेक्षा रखते हैं, जिसमे उन लोगों के पूर्व विचारो एव व्यवहारों में विपरीतता शामिल है, इस रूप में कि वह उसे प्राप्त करे और नया रूप दे|

अब तुम्हारे ह्रदय के बारे में क्या? क्या परमेश्वर की आत्मा, उद्धार और पवित्रता के लिए तुम्हारा दिमाग खुला है? यदि तूम अब तक भी उदासीन, परमेश्वर से दूर हो, तो उनकी ओर मुड जाओ तभी तक जब तक कि यह ‘आज’ कहा जाये| अपने परमेश्वर से प्रार्थना करो कि वह तुम्हारे अचेतन मन को पवित्र करें और तुम्हारा ह्रदय परिवर्तन करे| तुम्हारे भूतकाल को अपवित्र मत रहने दो| तुम्हारे परमेश्वर तुम्हे चंगाई देने वाले परमेश्वर हैं| वह अकेले तुम्हे तुम्हारे सभी कार्यों से मुक्त करा सकते है यदि तुम यह चाहो कि वह तुम्हे, तुम्हारे पुरे ह्रदय से तुम्हारी उत्कृष्ट अभिलाषाओं से मुक्त कराए| तुम कभी भी अपने आप को, अपने आप नहीं बचा सकते| तुम्हे इसके लिए केवल इच्छा करना है, निर्णय लेना है, प्रार्थना करना है और परमेश्वर के द्वारा दीये गये मोक्ष को प्राप्त करना है जो कि पहले से ही तुम्हे बचाने के लिए तैयार है|

प्रार्थना: ओ पवित्र परमेश्वर, आप मुझे जानते हो, और मेरे सभी विचार आपके सामने खुले है| आप मेरे भूतकाल को जानते है और प्रत्यक उस व्यक्ति को जानते है जिसके प्रति मैंने अपराध किया| मुझे मेरी उत्कृष्ट अभिलाषाओं से मुक्त कीजिए और मेरे अचेतन मन को पवित्र कीजिए| मुझे अपने वचन की ओर खिचिये कि मै आपसे प्रेम करूँ| मै और अधिक पाप करना नहीं चाहता| कृपा करके मुझमें एक शक्तिशाली इच्छा का निर्माण कीजिए कि मै आपके हाथ से अपनी स्वतंत्रता प्राप्त करूं| मुझे मेरे मिलावटी दिमाग और भ्रष्ट शरीर से बचाएं| आप मेरे चिकित्सक और बचानेवाले है| मै आपमें विश्वास करता हूँ|

प्रश्न:

17. पौलुस ने परमेश्वर के क्रोध के रूप का कैसा वर्णन किया था?

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