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रोमियो – प्रभु हमारी धार्मिकता है|
पवित्र शास्त्र में लिखित रोमियों के नाम पौलुस प्रेरित की पत्री पर आधारित पाठ्यक्रम
भाग 1: परमेश्वर की धार्मिकता सभी पापियों को दण्ड देती है और मसीह में विश्वासियों का न्याय करती है और पापों से मुक्त करती है। (रोमियों 1:18-8:39)
अ - सारा संसार शैतान के तले झुका है और परमेश्वर अपनी पूरी धार्मिकता में न्याय करेंगे (रोमियों 1:18-3:20)

1. परमेश्वर का क्रोध राज्यों के विरोध में प्रगट होता है (रोमियो 1:18-32)


रोमियो 1:22-23
22 वे अपने आपको बुद्धिमान जताकर मूर्ख बन गए| 23 और अविनाशी परमेश्वर की महिमा को नाशवान मनुष्य, और पक्षियों, और चोपायों, और रेंगनेवाले जंतुओं को मूरत की समानता में बदल डाला|

नाशवान मनुष्य अपने परमेश्वर के बिना नहीं जी सकता यदि वह अपने प्रभु को अपने ह्रदय में स्वीकार नहीं करता है तो वह दूसरे देवताओं की ओर जायेगा क्योंकि मनुष्य विश्वास करने के लिए ही बनाया गया है| सभी नास्तिक चाहे वे पढ़े लिखे हों या अनपढ़ उनकी अपनी अपनी मुर्तियां होती है जिन्हें वे गिनते है, प्रेम करते है, महिमा करते है और स्वय को उनको समर्पित करते है, और उनके लिए बली भी चढाते है| सामान्य लोगों ने मार्ग दर्शकों (नेता) को ईश्वरतुल्य बनाया, उनके द्वारा सफलता की आशा करने लगे| प्रत्येक व्यक्ति पैसा जमा करके और अमीरी हासिल करके अपने आराम और सुगमता को सुरक्षित करने लगा| पढेलिखे लोग अपनी पुस्तकों में डूबे हुए थे और उनकी कोरी दार्शनिकता यह अनुमान लगा रही थी कि वे कुछ जानते है, जबकि वे कुछ नहीं बल्कि पापी हैं| राजनीतिज्ञ हर प्रकार से उनकी अपनी सफलता की आशा करते है, किसी भी कीमत पर| विद्यार्थी सांस्कृतिक विकास पर निर्भर रहते है और कार्यकर्ता अपने आप को क्रांति की चेष्टा को समर्पित करते है| भय सभी लोगों पर हावी होता है क्योंकि परमेश्वर की शांति उनके दिलों में नहीं पाई जाती है|

कुछ टैक्सी चालक अपनी कारों के आईने पर एक नीला मोती लगाते हैं बुरी नज़र से बचने के लिए परमेश्वर की उनको बचाने की क्षमता को अस्वीकार करते हुए| कुछ यात्री तावीज़ पहनते हैं यह सोचते हुए कि यह उन्हें सुरक्षा देगा| कुछ लोग दैवीय शक्तियों वालों के पास और भविष्यवक्ताओं के पास भागते हैं| वे कतारों में अपनी बारी का इंतज़ार करते हुए खड़े रहते है कि वे मरे हुए लोगों और आत्माओं से संपर्क स्थापित करसकें| मनुष्य एक दिन में लाखों से अधिक बार पहली आयत के विरोध में अपराध करते हैं “मै तुम्हारा परमेश्वर हूँ, मेरे सिवाय तुम्हारे लिए और कोई देवता नहीं होगा|”

परमेश्वर की महिमा के सच से संसार अंधा हो चुका है, मनुष्य अपने खाली ह्रदयों में आशा और शांती की इच्छा करते हुए, एक मृगतृष्णा के पीछे भटक रहे हैं| बहुत सारे लोगों पर निराशावादी विचार शासन कर रहे थे| परमेश्वर की आयतों पर ध्यान न देते हुए, उन पर न चलते हुए लोगों की अभिरुचि अंतरिक्ष में जाने वालों के बारेमें, चलचित्र सितारों के बारे में या राजनीतिज्ञों के बारे में जनने की है| वे युद्धों में एक दूसरे को तहस नहस करते हैं और अपने सृष्टिकर्ता को अस्वीकार करते हुए स्वयं को भी तहस नहस करते हैं|

अपने आप को जांचिये, क्या तुम अपने आप को, या किसी और को अपने सृष्टिकर्ता से अधिक प्रेम करते हो? क्या तुम अपनी कार के इंजिन पर भरोसा करते हो? क्या तुम अपने रूप से प्रेम करते हो? क्या तुम लोगों से मध्यस्थता प्राप्त करते हो? तुम्हारी सभी सांसारिक इच्छाएँ परमेश्वर को छोटा करती है, तो अपने परमेश्वर से अपने पूरे दिल के साथ, अपनी आत्मा के साथ और अपनी पूरी शक्ति के साथ प्रेम करे कि तुम्हारे आदर्श और देवता और यहाँ तक कि तुम्हारा स्वार्थिपन मर जाए और परमेश्वर की सहायता और महिमा तुम पर चमके|

प्रार्थना: ओ पिता, हम आपका धन्यवाद करते हैं क्योंकि आपने हमें अपनी छबी में बनाया, आपने अपना सत्व अपने पुत्र में प्रकटित किया| मेहरबानी करके अपना प्रेम सभी लोगो पर प्रकट करे ताकि अविश्वासी पूरे संसार से गायब हो जाए और आपका पितासमान नाम निर्मल हो जाए| हमें क्षमा करना यदि हमारे पास दूसरे देवता या आदर्श हों, और उन्हें हमारे विचारों से दूर निकाल दे, ताकि अकेले आपके पुत्र का राज्य हम में हमेशा रहे|

प्रश्न:

15. जो मनुष्य परमेश्वर के बिना रहता है, वो क्यों अपने लिए एक सांसारिक देवता बना लेता है?

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