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पत्रक - वितरण के लिये लघु बायबलसंबंधी सन्देश

पत्रक 07 -- परमेश्वर तुमको सुख देते हैं!


यदि हम हमारे संसार में दुखों के विस्तार और आंसुओं की नदियों को पहचान पाते हम घोर निराशा और आंतक से, चकित या पागल हो गये होते| यद्यपि तोराह और सुसमाचार ने हमें सच्चा सुख दिया और वे अंधियारे के बीच में हमारी मदद करते है| दयावान परमेश्वर ने आशा के शब्दों के साथ उपदेशक यशायाह को प्रभावित किया था “जैसे किसी की माता उसे सुख देती है; तों मै तुम्हे सुख दूंगा” (यशायाह 66:13)| सर्वशक्तिमान ईश्वर ने माँ के प्रेम और उसकी सौम्यता को स्वयं अपनी दया के प्रतिक के रूप में रखा है| जो भी परमेश्वर के सुख को समझना चाहता है, ने गौर करना चाहिए कि कैसे एक माँ अपने बच्चों की देखभाल करती है, तब वह परमेश्वर के अनंत सुख को कुछ समझ सकने के योग्य हो जायेगा|

एक माँ अपने गर्भ में अपने बच्चों को उठा लेती है, दर्द के साथ उनको जन्म देती है, तों उसके बच्चे उसका अपना ही एक हिस्सा हैं| वह अपने आपको उनके प्रति जिम्मेदार अनुभव करती है, उनकी निगरानी करती है, रात और दिन उनका ध्यान रखती है, जब वह भूखे होते हैं उन्हें स्तनपान कराती है, दिन में अनेक बार उन्हें साफ करती है, उन्हें गले लगाती है उनके साथ उपहास और बात करती है जबकि वे लोग एक शब्द भी समझ नहीं पाते| वह अपने बच्चों को कभी अकेला नहीं छोडती परंतु उनकी चिंता करती है, उनके लिए प्रार्थना करती है, क्योंकि उसके हाथ में वे स्वयं परमेश्वर की धरोहर है| एक माँ अपने बच्चो के लिए करुणा और प्रेम से भरपूर होती है|

जैसे उसके बच्चे बड़े होते है, वह उनके लिए कपड़े और जूते खरीदती है, उन्हें साफ करती है, उनके लिए पकाती और स्वच्छता रखती है, और अपने स्तर के अनुसार सबसे अच्छी पाठशाला उनके लिए चुनती है| जब वे शाला से वापस आते हैं वह उन्हें पढाती, और उनका गृहकार्य करवाती है| यदि उसके बच्चे कुछ गलत करते है तों वह उन्हें डांटती या दण्ड देती है, आशा करती है कि वे ईमानदारी के साथ बड़े हो| वह उनको नशीली दवाओं, यौन संबधों और बुरी आत्माओं से संपर्क एवं जादू टोने के खतरों के बारे में चेतावनी देती है| वह उनके लिए अच्छे मित्रो को खोजने का प्रयास करती है| वह अपने आपको अपने बच्चों के सामने एक उत्तम उदाहरण के रूप में रखना चाहती हैं|

बच्चे जानते है कि वे अपनी गलतियों के द्वेष में घर आ सकते हैं| वे अपनी समस्याएं माँ के सामने स्वीकार करते हैं और वह उन्हें आत्मसात कर लेती है और हृदय में छिपा लेती है| वह अपने बच्चों को सच्चे विश्चास के बारे में सिखाती है और उनको परमेश्वर की महानता के बारे में कहानियां सुनाती है| जैसे माँ कभी थकती नहीं है, वह हमेशा अपने बच्चों को वैसे ही दिखाई देती है|


परमेश्वर का दयालु सुख

एक माँ का व्यवहारिक प्रेम, उसकी दयापूर्ण संवेदना त्याग करने के लिए उसकी तैयारी और उसका धीरज हमारे सामने परमेश्वर के प्रेम और सुख का प्रतीक है| परमेश्वर उन सभी के लिए जो उनकी ओर मुड गये है, प्रेम से भरपूर हैं| वह हमें आश्वस्त करते है “मैं वही हूँ जो तुमको चैन दिया करता है|” (यशायाह 51:12) सृष्टि के निर्माता और नियंत्रक ने अपने उपदेशकों और लोगों को, यहाँ तक कि उनकी बंधनावस्था में इस बात की पुष्टि दी थी कि वे उनको सुख देने और सहायता करने के लिए तैयार थे, उन लोगों को यह इसलिए उपलब्ध करा रहे थे कि वे उनकी ओर मुड कर अपने आपको उनको सौंप दे| वह, सर्वशक्तिमान सहायता और सुख देना चाहते है| इसलिए यदि तुम्हे तुम्हारे जीवन में कोई भी समस्या हो तों, उसे अपने आप तक मत रखो परन्तु उसे तुम्हारे परमेश्वर को दे दो और तुम देखोगे कि वे महान कार्य कर सकते है जैसे कि तुमने उन पर विश्वास किया है|

सृष्टिकर्ता ने हमें बनाया और हमें जीवन, शक्ति, दिमाग, इच्छा, बुद्धि, शरीर और आत्मा दी| हम लोग कोई बेजान पत्थर नहीं है, ना ही बहरे पौधे है, परंतु हृदय, दिमाग और अंतरमन के साथ स्वतंत्र मनुष्य है| सर्वज्ञानी हमारी प्रतिभाओं और कमजोरियों को जानते हैं| वह हमारे लिए सीधे मार्ग को जानते और चाहते है, अच्छे कार्यों के उस मार्ग पर हम चले जो उन्होंने हमारे लिए तैयार किया है (इफिसियों 2:10)| तुम्हारे लिए उनके पास एक सुनिश्चित योजना है| वह तुम्हारी देखभाल तुम्हारे पालकों से भी अधिक करते हैं| वह तुम्हारे लिए हमेशा उत्तम की चाह रखते हैं|

वह तुमको कभी भी, अपराध और उलझन में अकेले नहीं छोड़ते, परन्तु तुम्हारा ध्यान रखते है और तुम्हे प्रार्थना करना सिखाते है “हमारे आज की रोटी आज हमें दें” (मत्ती 6:11)| मत भूलो कि उन्होंने तुम्हारे सामने शिक्षा के द्वार को खोला है| वे तुम्हारे लिए एक अच्छे साथी को पहले से ही जानते है| वह तुम्हारी निगरानी करते हैं और तुम्हे शैतान के छल और योजनाओं से दूर रखते हैं| समझदार बनो और अपने आप को पितासमान परमेश्वर को सौंप दो कि वे तुम्हारा सही मार्गदर्शन कर पायें|

इस संसार के भृष्टाचार को परमेश्वर के न्याय की आवश्यकता है| यद्यपि, पवित्र एक मात्र ने हमारे विनाश को अब तक आने नहीं दिया, परंतु मरियम के पुत्र को, अपने आप से हमारी संधि कराने के लिए भेजा| वे प्रत्येक को प्रायश्चित करने और उन तक आने के लिए जगत के अपराधों के लिए यीशु के प्रायश्चित को स्वीकारते हुए, आमंत्रित करते है|

परमेश्वर को जगत से इतना प्रेम था कि उसने अपने एकमात्र पुत्र को दे दिया, ताकि हर वह आदमी जो उसमे विश्वास रखता है, नाश न हो जाये बल्कि उसे अनन्त जीवन मिल जाये|” (यूहन्ना 3:15-16)

जिस प्रकार से एक माँ एक दिन में अपने बच्चे को कई बार स्वच्छ करती है, उसी तरह से पवित्र परमेश्वर तुम्हे स्वच्छ करना चाहते है, अपराधों से छुडाना और तुम्हारा नवीकरण करना चाहते है| एकमात्र दयावान एवं करुणामय तुमको, तुम्हारी निराशा के सबसे भयानक समय में भी सहायता करने को तैयार थे| वह तुम्हे तुम्हारे अपराधों, यहाँ तक कि छिपे हुए अपराधों को भी, यदि तुम उनके सामने स्वीकार करो, तों क्षमा करने के लिए तैयार थे| वह तुमसे प्रेम करते है, तुमसे प्रत्यक्ष रूप से बात करना चाहते है, और तुम्हारे उनके पास आने के लिए प्रतीक्षा करते हैं| तुम कब उनके प्रेम के लिए उनको धन्यवाद दोगे, कब अपने रहस्यों को उनको सौंप दोगे और उनकी इच्छानुसार चलना सीखोगे? वह अपनी बाहों को पूरा फैलाकर तुम्हारा स्वागत करते हैं|

उच्चतम महान की योजना इससे भी अधिक आगे जाती है वह तुमको गोद लेते है ताकि तुम उनकि कानूनन संतान बन पाओ| वह तुम्हे अपनी पवित्र आत्मा का दान देना चाहते हैं ताकि तुम उनके एक आद्यात्मिक पुत्र या पुत्री भी वन जाओ| परमेश्वर का प्रेम हमारी सोच की अपेक्षा बहुत महान है| वह तुम्हारे नाशवान शरीर में अपने अनंत जीवन को डाल देना चाहते है| उनके निकट आओ, उनको ढूंढो और तुम उनके वादे के अनुसार उनको पाओगे “तुम लोग मेरी खोज करोगे और जब तुम पूरे हृदय से मेरी खोज करोगे तों तुम मुझे पाओगे”| (यिर्मयाह 29:13)|


यीशु मसीह का सुख

आशीषित हैं वे जो मातम मनाते है, क्योंकि उनको सुख दिया जायेगा”| (मत्ती 5:4) मसीह अपने दैवीय प्रेम और करुणा से भरपूर हमारे इस दुखदायक संसार में आये| वे उन सभी के लिए जो उदासीन और भटके हुए है, बिना गडरिये के भेड़ो के समान हैं और जो अपने मन में दया का अनुभव करते थे (मत्ती 9:36)| उन्होंने अपने शिष्यों को दास बनाये बिना अपना अनुसरण करने के लिए बुलाया था| वह उन लोगों के लिए एक उदहारण थे और उन्होंने शालीनता पूर्वक उनका मार्गदर्शन किया था| जब यूहन्ना और उसके भाई ने, उन लोगो पर, जो मसीह और शिष्यों को ठुकराते है, स्वर्ग से आग बरसने का आदेश दिया उन्होंने उनको डाँटा यह कहकर “क्या तुम नहीं जानते कि तुम कैसी आत्मा से सम्बन्ध रखते हो?” (लुका 9:55)

जब पतरस शिष्यों के प्रमुख ने अपने मालिक को नकारा, यहाँ तक कि यीशु ने भी उसको चेतावनी दी थी, पतरस फूटफूटकर रोया| यद्यपि मरियम के पुत्र ने जो मृतकों में से जी उठे थे, उसको ढूंढा, क्षमा किया और उसे परमेश्वर की सेवकाई के लिए वापस बुलाकर उसे सुख दिया था|

जब यहूदा, मुकरने वाले ने अपने मालिक को एक चुंबन के साथ दुश्मनों के हाथों बेच दिया था, उन्होंने उसे श्राप नहीं दिया या उसे डाँटा फटकारा, परंतु उससे पूछा “हे यहूदा, क्या तू एक चुम्बन के द्वारा मनुष्य के पुत्र को धोखे से पकड़वाने जा रहा है” (लूका 22:48; मत्ती 26:50)

मसीह परमेश्वर के प्रेम का अवतार है| वह दयावान थे जैसे उनके पिता स्वर्ग में दयावान है (लूका 6:36)| उनके द्वारा गरीबों और बीमारों के लिए, चंगाई के चमत्कार उनकी करुणा के प्रमाण थे| जब उन्होंने एक विधवा को उसके इकलौते पुत्र को दफनाने ले जाने के रास्ते पर फूटफूटकर रोते देखा था, यीशु ने दफ़नाने के क्रिया कर्म को रोककर उसके पुत्र को जीवन देकर उठा दिया था और वापस उसकी माँ को दे दिया था| जब दस मनुष्य जो कोढ़ रोग से ग्रसित थे, और स्वस्थ लोगो के पास ना जाने के लिए बाध्य थे, ने सुना था कि मसीह वहाँ से गुजरने वाले है, वे बहुत दूर से रोकर गिडगिडाये थे कि उन्हें चंगाई मिले| मसीह ने उनको वहाँ से दूर नहीं किया, परंतु अपने शब्द की शक्ति द्वारा उनका कोढ़ चंगा किया था| जब वह बुरी आत्मा की जकडन में जकड़े हुए से मिले अस्वच्छ आत्मा निराशा से चिल्ला कर बाहर आई| वह वहाँ से भाग नहीं गए, परंतु ग्रसित व्यक्ति को अपने सर्व सामर्थ्यवान शब्द द्वारा उन अस्वच्छ आत्माओं से मुक्त किया था|

मसीह ने अपने शिष्यों को डूबने से बचाने के लिए तूफान को शांत किया था| उन्होंने केवल पांच रोटी और दो मछलियों से पांच हजार भूखे श्रोताओं को तृप्त किया था| उन्होंने उस व्यक्ति, जो लकवे से पीड़ित था जिसे छत में से निचे लटकाकर उनके सामने लाया गया था, के अपराधों को क्षमा कर दिया था, उन्होंने वच्चों को आशीषे दी और लाजरस की बहन को प्रोत्साहित किया था, “क्या मैंने तुझसे नहीं कहा कि यदि तू विश्वास करेगी तों परमेश्वर की महिमा का दर्शन पायेगी|” (यूहन्ना 11:40)

मसीह सभी से यहाँ तक कि उनके शत्रुओं से भी प्रेम करते थे| वह लोगों के अपराधों को जानते थे कि वे लोग स्वयं को बचा पाने में असमर्थ हैं इसलिए वह हृदय में संसार के अपराधों को ले गये और उन लोगों के लिए प्रायश्चित किया था, जैसा कि उपदेशक यशायाह को पहले ही प्रकटित हो चुका था: “किन्तु उसने हमारे पाप अपने ऊपर ले लिए| उसने हमारी पीड़ा को हमसे ले लिया और हम यही सोचते रहे कि परमेश्वर उसे दण्ड दे रहा है| हमने सोचा परमेश्वर उस पर उसके कर्मो के लिये मार लगा रहा है| किन्तु वह जो उन बुरे कामों के लिये बेधा जा रहा था, जो हमने किये थे| वह हमारे अपराधों के लिए कुचला जा रहा था| जो कर्ज़ हमें चुकाना था, यानि हमारा दण्ड था, उसे वह चुका रहा था| उसकी यातनाओं के बदले में हम चंगे (क्षमा) किये गये थे| किन्तु उसके इतना करने के बाद भी हम सब भेड़ों की तरह इधर-उधर भटक गये| हममें से हर एक अपनी-अपनी राह चला गया| यहोवा द्वारा हमें हमारे अपराधों से मुक्त कर दिए जाने के बाद और हमारे अपराध को अपने सेवक से जोड़ देने पर भी हमने ऐसा किया|” (यशायाह 53:4-6)

मरियम के पुत्र ने संसार के उद्धारकार्य को पूरा किया और धार्मिकता की स्थापना की जो परमेश्वर को स्वीकार्य थी| अपनी क्षतिपूर्ति मृत्यु द्वारा, परमेश्वर की सुख देने वाली आत्मा को प्राप्त करना उन्होंने हमें सिखाया था|

मसीह के अनुयायियों में पवित्र आत्मा का आगमन

जो भी व्यक्ति परमेश्वर के प्रेम के लिए और मसीह की चंगाई भरी दया के लिए अपने हृदय के द्वार को खोलता है, वह सुख की दैवीय आत्मा को प्राप्त करता है, जो कि सत्य की आत्मा भी है| यीशु ने अपने अनुयायियों से अपने मृत्यु के कुछ समय पहले ही यह वादा किया था: “मै परम पिता से विनती करूँगा और वह तुम्हे एक दूसरा सहायक देगा ताकि वह सदा तुम्हारे साथ रह सके| यदि सत्य का आत्मा जिसे जगत ग्रहण नहीं कर सकता क्योंकि वह उसे न तों देखता है और न ही उसे जानता है| तुम लोग उसे जानते हो क्योंकि वह आज तुम्हारे साथ रहता है और भविष्य में तुम में रहेगा|” (यूहन्ना 14:16-17; 15:26-27; 16:7-14) सुख देने वाली आत्मा पिता का महान वादा है| वह यीशु मसीह के नाम में देते है जो कोई भी उनसे प्रार्थना करता है| (लुका 11:13)

पवित्र आत्मा हमारे सामने परमेश्वर हमारे आध्यत्मिक पिता के बारे में, स्वंय हमारे बारे में और हमारे भविष्य के बारे में सत्य को प्रकटित करता है| वह दैवीय सत्य की ओर हमारे हृदय की आँखें खोलता है, हममे सच्चे विश्वास की स्थापना करता है, हमें अनंत आश्वासन देता है| वह न्याय के दिन हमारे वकील है और जब हम अपने अन्तर्मन द्वारा दोषी ठहराए जाते है हमें सुख देता है|

सत्य की आत्मा हमें हमारे जीवन के प्रत्येक क्षण में हमारा मार्गदर्शन करता है, जैसे उपदेशक पौलुस ने साक्षी दी है| “जो परमेश्वर की आत्मा के अनुसार चलते हैं, वे परमेश्वर की संतान हैं|” (रोमियो 8:14)

यह सुखदायक आत्मा हमें हमारी मूर्खता, हताशा और विफलता के समय मदद करता है| वह हमें छिपे हुए खतरों से फिर से आश्वासन, शांति और सुरक्षा देता है, और मृत्यु की पकड़ से मुक्त करता है| यह आत्मा हमें समझदारी और यदि हम हमारे अपराधों से घृणा करते और ठुकराते हैं तों हमें उन पर विजय पाने के लिए प्रेरित करता है| परमेश्वर की आत्मा पवित्र है| वह हमें पवित्र करना चाहता है, परमेश्वर के सामने हमें हमारी दुष्टताओं को स्वीकार करने के लिए मार्गदर्शन करता है, और हमें सत्यता, पवित्रता और संधिकरण की ओर ले जाता है|

यह दैवीय सुखदायक स्वंय अपनी महिमा नहीं परन्तु मरियम के पुत्र हमारे उद्धार कर्ता की महिमा करता है और उनके प्रेम के संकेतों को समझने के लिए हमारी सहायता करता है| परमेश्वर की आत्मा स्वयं अपने आप में अनंत जीवन है और शक्ति है, जो किसी भी प्रकार से समाप्त नहीं होती है| वह हमें सुख देता है, अपने जीवन द्वारा हमारी मृत्यु पर विजय प्राप्त करता है और हमेशा के लिए हम में निवास करता है|

यह सुख देने वाली आत्मा मसीह के अनुयायियों में निवास करता है क्योंकि वे लोग उनकी क्षतिपूर्ति में विश्वास करते है| यह आत्मा उनके व्यवहार को सुधारता है ताकि परमेश्वर का प्रेम, अच्छाई और दयालुता उनमे दिखेगी| यह सुखदायक आत्मा परमेश्वर के वचन का प्रसार करने और जरूरतमंदों की सेवा करने के लिए हमारा मार्गदर्शन करता है| वह हमें कृतज्ञता और स्तुति प्रशंसा के भजनों से भरता है| दयावान सुखदायक हमें सुखदायकों में परिवर्तित करना चाहते है, जैसा कि उपदेशक पौलुस ने प्रार्थना की थी: “हमारे प्रभु यीशु मसीह का परम पिता परमेश्वर धन्य है| वह करुणा का स्वामी है और आनंद का स्त्रोत है| हमारी हर विपत्ति में वह हमें शांति देता है ताकि हम भी हर प्रकार की विपत्ति में पड़े लोगों को वैसे ही शांति दे सके, जैसे परमेश्वर ने हमें दी है|” (2 कुरिन्थियों 1:3-4) परमेश्वर की आत्मा हमारे आसपास की परिस्थितियों को तुरंत बदल नहीं देता, परंतु वह मसीह के उद्धार द्वारा पहले स्वयं हमें बदल देता है| हमारे हृदय हमारे रक्षक के लिए चाहत रखते है क्योंकि उन्होंने हमसे आरंभ से प्रेम किया| वह सुसमाचार के वचनों द्वारा अपने अनुग्रह की शक्ति हमें देते हैं| जो कोई भी मसीह के वचनों को पढता है, उनको याद रखता है और उनके अनुसार कार्य करता है, वह एक आशीषित एवं आनन्दित व्यक्ति रहेगा|

क्या तुमने परमेश्वर के सुख का अनुभव किया था? यदि तुम सुखदायक आत्मा की वास्तविकता के बारे में और अधिक जानना चाहते हो, हम तुमको मसीह का सुसमाचार, ध्यान-मनन और प्रार्थनाओं के साथ भेजने के लिए तैयार है, ताकि तुम अंधकार के बीच में परमेश्वर के साथ शांति पा सको|

अपने आसपास के जरूरतमंदों को सुख दो: यदि इस पर्चे के शब्दोंने तुम्हे एक नई आशा दी है, इसे उन लोगों को दो जो परमेश्वर के साथ शांति ढूंढते है ताकि वे भी उनकी निराशा में सुख पा सके| हमें बताये तुमने कितने पर्चे देने का निश्चय किया है तों हम तुमको, एक सीमित संख्या में इसकी प्रतियां तुम्हारी सेवा के लिए भेज सके|

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