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पत्रक - वितरण के लिये लघु बायबलसंबंधी सन्देश

पत्रक 05 -- परमेश्वर के मार्ग को तैयार करो! (यशायाह 40:3)


जनसाधारण जीवन में बिना किसी उद्देश्य के भागते रहते है, आराम का आनंद लेते हुए और, मुत्यु जो उनकी प्रतीक्षा करती है, के बारे में कुछ न सोचते हुए, अपनी जीविका कमाने के प्रयत्न करते रहते हैं यहाँ केवल कुछ ही लोग हैं जो परमेश्वर के बारे में सोचते है, उनसे डरते हैं और उनके अध्यादेश का पालन करने के लिए अपनी पूरी योग्यता का उपयोग करते हैं ताकि वे उनका मार्गदर्शन और सत्य को प्राप्त कर पाये|

इस सृष्टि के सृष्टिकर्ता अपने द्वारा निर्मित अपने प्राणियों को भूलते नहीं है| वह उनसे प्रेम करते है, उनके बारे में सोचते है, उनसे बात करते हैं और उनके हृदयों को ढूँढते हैं| वे ऐसी इच्छा रखते हैं कि उनकी पूर्णता में वे उनको दैवीय शक्ति दे दे, यदि वे लोग प्रायश्चित करे और पूरी तरह से उनकी ओर आ जाये|


परमेश्वर वह है जो हमारे पास आते हैं

जब आदम और हवा ने परमेश्वर की आज्ञा का पालन नहीं किया, वे शर्मिंदा थे और उनसे छिप गये थे, उन्हें इस बात का ज्ञान हुआ था कि उन्होंने बुरा किया था| फिर भी परमेश्वर ने उनको दण्डित नहीं किया, परंतु उनको देखने यह कहकर आये, “तुम कहाँ हो आदम?” (उत्पति 3:9)| सृष्टिकर्ता प्रत्येक व्यक्ति को देखते और पूछते हैं “तुम कहाँ हो? तुम अपने जीवन में कहाँ पहुंचे हो?”

परमेश्वर ने इब्राहीम को मैसोपोटामिया में बुलाया था, उनके भ्रष्ट बहुदेववादी समाज के बीच में से, और उनको एक न थकने वाला, एक स्वच्छ अनंत घर की खोज करने वाला यात्री बनाया था| प्रिय पाठकों क्या तुम भी एक पवित्रता का मार्ग ढूंढ रहे हो, अपने लिये एक अनंत घर ढूंढ रहे हो?

याकूब एक चालाक कुचक्र करने वाला व्यक्ति था| वह एक बहुत दूर स्थान पर भाग गया और वहाँ शादी कर ली थी| लंबे समय तक एक अजनबी स्थान पर रहने के बाद, वह वापस उसके स्वदेश आया था| परंतु उसके भूतपूर्व अपराध के लिये उसे दण्ड देने के लिये परमेश्वर का दूत उसके मार्ग में खड़ा था| फिर भी याकूब परमेश्वर की महान दया पर विश्वास करता था| उसने पवित्र एक के साथ कुश्ती लडा और कहा, “मै आपको तब तक नहीं जाने दूँगा, जब तक आप मुझे आशीष नहीं देंगे|” (उत्पति 32:26)|

मूसा मिश्र से जंगल में भाग गये थे क्योंकि क्रोध में आकर उन्होंने एक पहरेदार को जान से मार दिया था जो एक यहूदी दास को मार रहा था| इसके चालीस वर्षों के बाद परमेश्वर उनको एक जलती हुई झाड़ी में दिखाई दिये, और यह घोषित किया था कि “मै जो हूँ सो हूँ, वह जो कभी बदलता नहीं है| वह हमेशा विश्वसनीय रहेंगे|” क्या परमेश्वर ने तुम्हे तुम्हारे जीवन के जंगल में पाया था? क्या प्रायः ही तुम्हारे हृदय ने परमेश्वर के बुलावे की आवाज को सुना था? क्या तुमने उन एकमात्र की विश्वसनीयता को, जो बदलते नहीं है, महसूस किया है?

शमूएल एक कम उम्र का लड़का था जब परमेश्वर ने उसे अपने राज्य के ऊपर न्यायाधीश नियुक्त किया था| परमेश्वर केवल वयस्कों को ही नहीं परंतु उसी तरह से जवान लोगों को भी चुनते हैं| हमें अपने आसपास के बच्चों को उनकी भाषा में परमेश्वर का वचन सिखाना चाहिए और उनका परमेश्वर की ओर मार्गदर्शन करना चाहिए| परमेश्वर की इच्छा है कि तुम जैसे सेवकों का उपयोग करके वे जवान लोगों के पास आये|

दाऊद ने व्यभिचार किया था, और उस औरत के पति को मार डालने का आदेश दिया था| परंतु परमेश्वर ने उसे ऐसे ही नहीं छोड़ दिया| उन्होंने उसके पास जो एक उपदेशक था जिसने उसके अपराध को प्रकट किया एवं उस पर परमेश्वर के क्रोध की घोषणा की| दाऊद ने गंभीरतापूर्वक अपने अपराध का प्रायश्चित किया और अपराधियों को उनके परमेश्वर की ओर लाने के लिये उनका मार्गदर्शन करना आरंभ किया था| दाऊद ने परमेश्वर के अनुग्रह और क्षमा को पाया| भजन संहिता 51 पढ़े; इसे स्मरण करें और विश्वास में इसके वचनों में प्रार्थना करे तों तुम भी दाऊद के समान आराम और क्षमा पा सकोगे|

यशायाह एक याजक ने पवित्र परमेश्वर की महिमा की एक झलक को देखा था और रोकर कहा था “मै उतना शुद्ध नहीं हूँ कि परमेश्वर से बातें करूँ मै ऐसे लोगों के बीच रहता हूँ जो उतने शुद्ध नहीं है कि परमेश्वर से बातें कर सकें| किन्तु फिर भी मैंने उस राजा, सर्वशक्तिमान यहोवा, के दर्शन कर लिये है|” (यशायाह 6:5)

वे रोये थे क्योंकि परमेश्वर की रोशनी ने उनकी और उसी प्रकार से उनके आसपास के लोगों की परिस्थिति पर से पर्दा हटा दिया था| क्या तुम ईश्वर की महिमा देखने के लिये निकट आना चाहते हो? तब तुमको अच्छी तरह से समझ में आएगा कि तुम्हारे अपराध तुम्हे पवित्र एकमात्र से अलग कर देते हैं| क्या तुम जानते हो कि तुम्हारे अपराध तुम्हे पवित्र सृष्टिकर्ता के निकट आने से रोकते है, और उन्हें समाप्त कर देना चाहिए? “हम आपसे भीख माँगते है परमेश्वर के साथ संधि में बने रहो” (2 कुरिन्थियों 5:20)


प्रभु के मार्ग को तैयार करो!

वह व्यक्ति जो ईश्वर को संतुष्ट रखना चाहता हैं, ने उनकी सभी नियमों को मानना चाहिए| वह व्यक्ति जो जाने अनजाने अपराध करता है और उनके नियमों का उल्लंघन करता है, ने अपने अपराधों को स्वीकार करना चाहिए और जैसा कि परमेश्वर ने वादा किया है उस अनुसार उनसे क्षमा मांग लेना चाहिए “यदि हम अपने पापों को स्वीकार कर लेते हैं तों हमारे पापों को क्षमा करने के लिये परमेश्वर विश्वसनीय है और न्यायपूर्ण है और समुचित है| तथा वह सभी पापों से हमें शुद्ध करता है|” (1 यूहन्ना 1:9) वह जो झूठ बोलता है, ने परमेश्वर के पास जाकर अपने अपराध को स्वीकार कर लेना चाहिए कि उसने झूठ कहा था| वह व्यक्ति जिसे अपने घर में कुछ ऐसी वस्तु दिखती है जो उसकी नहीं है, ने उस वस्तु को उसके मालिक को देकर उससे क्षमा मांग लेना चाहिए| वह व्यक्ति जिसने दूसरे व्यक्ति के साथ कुछ अस्वच्छतापूर्वक कार्य किया है ने अपनी अस्वच्छता को ईश्वर के सामने स्वीकार करके प्रायश्चित करना चाहिए और वापस अपराध नहीं करना चाहिए| वह जिसने अन्य लोगों को, उसके पालक, जीवन साथी या बच्चों को दुखी किया है, ने उनसे क्षमा माँग कर व्यवहारिक रूप से उनकी सहायता करना चाहिए|

यूहन्ना बपतिस्मा देने वाले ने उपदेशक यशायाह के महान वादे को पूरा किया, जैसे कि जो उस रहस्यप्रकटीकरण जो उन्हें प्राप्त हुआ था को उन्होंने दोहराया था, “किसी का जंगल में पुकारता हुआ शब्द: ‘प्रभु के लिये मार्ग तैयार करो और उसके लिये राहें सीधी करो| हर घाटी भर दी जायेगी और हर पहाड़ और पहाड़ी सपाट हो जायेंगे टेढ़ी-मेढ़ी और ऊबड़-खाबड़ राहें समतल कर दी जायेंगी और सभी लोग परमेश्वर के उद्धार का दर्शन करेंगे!” (यशायाह 40:3-5, लुका 3:4-6)

यूहन्ना बपतिस्मा देने वाले ने प्रचार किया था कि एक भी इन्सान धार्मिक नहीं है| हम सभी दोषी हैं, हमें स्वच्छ होना चाहिए और परिवर्तित होकर विनम्र हो जाना चाहिए| वह जो अवसादों के तले दुखी है, कराहते है, को उत्साहित एव पुनर्जीवित करना चाहिए| वह जो अन्य लोगों को ठगता है, ने अपने इन छलनेवाले मार्गो को छोड़ देना चाहिए, सीधी राह पर चलना चाहिए, और जिन लोगों को उसने छला है उन को उसका हरजाना भरना चाहिए|

निम्नलिखित वचन परमेश्वर के नियमों का सारांश है| “और तुम्हे यहोवा, अपने परमेश्वर से अपने सम्पूर्ण हृदय, आत्मा और शक्ति से प्रेम करना चाहिए|” (व्यवस्था विवरण 6:5) और “अपने पड़ोसी से वैसे ही प्रेम करो जैसे अपने आप से करते हो|” (लैव्यव्यवस्था 19:18) यदि तुम ईश्वर से प्रेम करना चाहते हो, उनके नियमों का पालन करो| परमेश्वर से प्रार्थना करो कि वे तुम्हे दिखायें कि तुम कैसे उनका मार्ग तैयार करो ताकि वे तुम तक व्यक्तिगत रूप से आ सके|


परमेश्वर तुम्हारे लिये मार्ग तैयार करते है

मरियम के पुत्र का जन्म एक अलौकिक रूप से हुआ था, क्योंकि ईश्वर की आत्मा उनमें एक मनुष्य बन गया| यीशु को भ्रष्ट, अपराधों से भरपूर मनुष्यों के बीच शारीरिक रूप में भेजा गया था| उन्होंने उन सभी बीमार लोगों को जो उनके पास आये थे, चंगा करके अपने प्रेम को सिद्ध किया था, और आध्यात्मिक सत्ता द्वारा उन्होंने, प्रेतग्रस्त लोगों को उनके दानवों से छुडाया था| फिर भी उनके राज्य में अधिकांश यह पहचान नहीं पाये कि उनकी महिमा का सत्व उनका शुद्ध प्रेम था|

दयालु प्रभु ने उन सभी जो उन तक प्रभु के आने के मार्ग को बनाने का प्रयत्न कर रहे है, के लिये अपने हृदय को खोल दिया है| इसीलिए मरियम के पुत्र इस जगत के अपराधों को दूर ले गये, हमारे लिये प्रायश्चित किया, हमें हमारे अपराधों से स्वच्छ, और बिना किसी मूल्य के हमें न्यायोचित किया| हमें उनका धन्यवाद करना चाहिए और उनसे प्रेम करना चाहिए क्योंकि उन्होंने हमारे लिये स्वर्ग के द्वार को खोला था|

हमारे जगत में यीशु का आना एक रहस्यमयी धुरी है जिसके आसपास मानवीय इतिहास घूमता है| ईश्वर हमारे संसार में आये थे ताकि यह संसार उनकी ओर मुड़ने के योग्य बने ईश्वर ने प्रत्येक को, जो प्रायश्चित करता है और उनकी ओर मुड जाता है, को क्षमा किया| वह जो इस रहस्य को समझता है, बुद्धिमान है, और जो इसका उपयोग करता है, स्वीकृत होगा|

प्रभु व्यक्तिगत रूप से तुम तक आते है

यीशु, कब्र में से जी उठे क्योंकि उन्होंने मृत्यु पर विजय पाई, वे स्वर्ग तक चले गये, और पवित्र परमेश्वर के साथ रहते है| वे अपने अनुयायियों को, जिन्हें वे प्रेम करते है, चाहते हैं| वे उनकी कमजोरियों और आशाओं को जानते हैं| इसीलिए उन्होंने अपनी पवित्र आत्मा को उनके पास भेजा था| “किन्तु मै तुमसे सत्य कहता हूँ इसमें तुम्हारा भला है कि मै जा रहा हूँ| क्योंकि यदि मै न जाऊँ तों सहायक तुम्हारे पास नहीं आएगा किन्तु यदि मै चला जाता हूँ तों मै उसे तुम्हारे पास भेज दूँगा” (यूहन्ना 16:7) ईश्वर हम तक पवित्र आत्मा, हमें सुख पहुँचाने वाले के द्वारा आते है, जो यीशु के अनुयायियों में निवास करता है|

क्या तुमने अपने हृदय को यीशु की आत्मा के लिये खोला था? वह तुम्हे बदल कर अपने प्रेम से भर देना चाहते है ताकि उनकी शांति आनंद, सहनशीलता और कुलीनता तुममे निवास करें (मत्ती 11:29, गलतियों 5:22-23)| परमेश्वर तुम्हारे हृदय के द्वार पर दस्तक देते है| क्या तुम अपने हृदय को उनके लिये खोलोगे? अपने दिमाग को उनके सामने कठोर मत करो, परंतु तुम तक आने का परमेश्वर के मार्ग को तैयार करो|

हे यरूशलेम, हे मेरे प्रकाश, तू उठ जाग! तेरा प्रकाश (परमेश्वर) आ रहा है! यहोवा की महिमा तेरे ऊपर चमकेगी| आज अन्धेरे ने सारा जग और उसके लोगों को ढक रखा है| किन्तु यहोवा का तेज प्रकट होगा और तेरे ऊपर चमकेगा| उसका तेज तेरे ऊपर दिखाई देगा|” (यशायाह 60:1-2)


प्रभु प्रत्येक व्यक्ति के पास आते हैं

यीशु का प्रेम उन सभी को जो आद्यात्मिक रूप से नए हो गये है का मार्गदर्शन करता है कि वे अपने मित्रों एवं पड़ोसियों तक सुसमाचार का शुभसमाचार ले जाये और उनसे कहें कि प्रभु तुम तक आने की भी इच्छा रखते है| केवल अपने आसपास ही मत घुमो, परंतु यीशु का अनुसरण करो और उनको ढूँढो जो भटक रहे हैं|

यदि तुम्हे इस बात की जानकारी नहीं है कि परमेश्वर की सेवा कैसे करें प्रार्थना करो और उनके मार्गदर्शन एवं निर्देशन के लिए विनती करो और वह तुम्हे निर्देश देंगे कि कैसे अन्य लोगों तक पहुंचे, अच्छे कार्य करें, और जरूरतमंद को दान दे| परमेश्वर तुम्हारे मुँह को खोलते है ताकि तुम उन से कह सको जो प्रभु के प्रेम और पवित्रता के बारे में सुनना चाहते है| परमेश्वर तुम्हे शक्ति देते है तुम्हारे साथ जाते हैं और तुम्हारी सुरक्षा करते है| तुम्हारे जीवन की गाड़ी का चलन चक्का यीशु के हाथों में दे दो, तब तुम आशीषों के साथ भरजाओगे परमेश्वर तुम्हारे लिए आध्यात्मिक संबंधों को क्रमबद्ध करेंगे|


यीशु के आने के रहस्यों पर ध्यान मनन करो

यदि आप भूतकाल वर्त्तमान और भविष्य काल में पुरुषों और महिलाओं के पास परमेश्वर के आने के बारे में और अधिक जानना चाहते होंगे तों कृपया करके हमें लिखें और हम आप को यीशु का सुसमाचार ध्यानमनन और प्रार्थनाओं के साथ भेजेंगे, तों आप विश्वास प्रेम और आशा में शक्तिशाली बन पाओगे| हम आपके पत्र की प्रतीक्षा कर रहे हैं| यदि आप हमें पत्र लिखे, अपना पूरा पता लिखना न भूलें ताकी हमारा पत्र आप तक पहुँच जाये|

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