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रोमियो – प्रभु हमारी धार्मिकता है|
पवित्र शास्त्र में लिखित रोमियों के नाम पौलुस प्रेरित की पत्री पर आधारित पाठ्यक्रम
भाग 3 - परमेश्वर की धार्मिकता मसीह के अनुयायियों के जीवन में दिखाई देती है। (रोमियो 12:1 - 15:13)

7. मसिह वापस आ रहे हैं इस ज्ञान का व्यवहारिक परिणाम (रोमियो 13:11-14)


रोमियो 13:11-14
11 और समय को पहिचान कर ऐसा ही करो, इसलिये कि अब तुम्हारे लिये नींद से जाग उठने की घड़ी आ पहुंची है, क्‍योंकिं जिस समय हम ने विश्वास किया था, उस समय के विचार से अब हमारा उद्धार निकट है। 12रात बहुत बीत गई है, और दिन निकलने पर है; इसलिये हम अन्‍धकार के कामों को तज कर ज्योति के हथियार बान्‍ध लें। 13 जैसा दिन को सोहता है, वैसा ही हम सीधी चाल चलें; न कि लीला क्रीडा, और पियक्कडपन, न व्यभिचार, और लुचपन में, और न झगड़े और डाह में। 14 बरन प्रभु यीशु मसीह को पहिन लो, और शरीर के अभीलाषों को पूरा करने का उपाय न करो|

उपदेशक अपनी पत्री में इस बात की व्याख्या करते हैं कि रोम की कलीसिया मसीह की शीघ्र वापसी के इंतजार में भागीदार थी| विश्वासी अन्तिम दिनों के और रोम कैसर में मसीह विरोधी आत्माओं की शक्ति के उत्पन्न होने के चिन्हों को पहचानते हैं| वे परमेश्वर के पुत्र की महिमा, और उनके स्वर्गीय देश के आनंद के आगमन की आशा कर रहे थे|

उपदेशक मसीह के अनुयायियों से विनती करते है कि वे अपनी आध्यात्मिक लापरवाही में लगातार बने ना रहे, परंतु अपनी आध्यात्मिक संघर्ष की अवस्था को पहचाने, और पूर्णतः उद्धार, जो कि हमारे लिए एक जमानत के रूप में पवित्र आत्मा का हमारे निवास, से आरंभ हुआ था, की अनुभूति करे| आप हमें मसीह की अति शीघ्र वापसी का स्मरण कराते है जो चाहते हैं कि हम उनकी शक्ति, महिमा और दयालुता के आवरण में रहे| इस जगत की रात लगभग समाप्त हो गई है, और सुबह एक नये दिन के बारे में कहती है जिसकी रौशनी निश्चित ही चमकेगी| अंत में पौलुस ने यही जाना था कि हमारा जीवन और क्या है अनन्तता के प्रकटीकरण की तैयारी है जिसका कि पवित्र आत्मा की शक्ति में पिता और पुत्र के साथ भागीदारी में समावेश है|

तो जैसे इस ज्ञान के परिणाम स्वरूप उपदेशक कहते है: “अंधकार के कार्यों को निकाल दो, और रोशनी का कवच पहनो| तुम्हारे जीवन में से अपराध को दूर कर दो| पवित्र आत्मा की शक्ति में मसीह के चरित्र के साथ अपने आपको सजा लो|” इस नवजागरण का अर्थ है हमारे जीवनों में, और कभी कभी हमारी कलीसिया में इस अंधकार को सहन करना| सुसमाचार और पवित्र आत्मा के सभी फल हमारे जीवनों और हमारे कष्टों में दिखाई देना चाहिए|

पौलुस उन लोगों के सत्य को जानते थे जो परमेश्वर को नहीं जानते और जो जानवरों के समान अपने सहजवृति एवं कामुकता के पीछे पीछे दूर चले गये थे| वे खाते, पिते, और पैदा करते थे; और ठीक उसी समय घृणा, शत्रुता और कन्जुसिपन में डूब रहे थे| परमेश्वर के बिना प्रेम, बुराई, भ्रष्ट, अस्वच्छ और कठोर है, जहाँ प्रत्येक केवल अपने लिए संघर्ष करता है, और अपने स्वयं के अंत के लिए दूसरों की कमजोरी को बेशर्मी से उपयोग करता है|

उपदेशक ने स्वयं,अंधकार में लोगों के उलझाव का अनुभव किया था; परन्तु ठीक उसी समय आपने मसीह के नवजीवन का अनुभव किया और रोम में विश्वासियों से प्रार्थना की थी कि केवल मसीह में अपने विश्वास से ही संतुष्ट ना रहो परन्तु आध्यात्मिक रूप से उनको आत्मसात कर लो| यीशु को आत्मसात करना, उनके चरित्र का अभ्यास, उनके सत्व पर चलना, उनके आदेशों का पालन करना, और उनकी आत्मा को अगुवाई एवं मार्गदर्शन करने देना, की ओर संकेत करता है, ताकि आत्मा के सभी फल उनमे प्रकटित हो पाये|

प्रिय भईयों मै तुमसे एक प्रश्न पूछता हूँ: क्या तुम मसीह में हो, या अब तक तुम स्वार्थी हो, अपने लिए जीते हो, अपने परमेश्वर के लिए नहीं? यीशु ने तुम्हे तुम्हारे अहंकारिपन, तुम्हारी आत्मनिर्भरता, तुम्हारी ग्रस्तता, से मुक्त किया है| हमारे शरीर और अपराध पूर्ण विचारों और पवित्र आत्मा के बीच संघर्ष, मसीह की वापसी की तैयारी का सत्व है|

इसीलिए, उपदेशक ईसाईयों को, अपने आपको आध्यात्मिक हथियारों से तैनात करने शत्रुओं से लड़ने के लिए नहीं, परन्तु प्रलोभनों और शारीरिक कामुक्ताओं पर विजय पाने के लिए, और मसीह के प्रेम और पवित्रता से अपने आप को भरने के लिए आमंत्रित करते है|

प्रार्थना: ओ स्वर्गीय पिता, हम आपका आवर्धन करते हैं क्योंकि आपके पुत्र यीशु ने हमारे सामने एक सच्चरित्र जीवन की मिसाल प्रस्तुत की थी| हमारी मदद करे कि हम आपकी पवित्र आत्मा द्वारा मसीह को आत्मसात करे, और विश्वसनीय विश्वासी बने, हम हमारे प्रिय रक्षक, प्रभुओं के प्रभु के आगमन के लिए अपने आपको तैयार करें|

प्रश्न:

88. वह क्या सद्गुण है जो हमारी अगुवाई करने के लिए मसीह के शीघ्र आगमन का ज्ञान है?

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