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रोमियो – प्रभु हमारी धार्मिकता है|
पवित्र शास्त्र में लिखित रोमियों के नाम पौलुस प्रेरित की पत्री पर आधारित पाठ्यक्रम
भाग 1: परमेश्वर की धार्मिकता सभी पापियों को दण्ड देती है और मसीह में विश्वासियों का न्याय करती है और पापों से मुक्त करती है। (रोमियों 1:18-8:39)
द - परमेश्वर की शक्ति हमें अपराध कि शक्ति से छुडाती है| (रोमियो 6:1 - 8:27)

6. यीशु में, मनुष्य अपराध, मृत्यु, और दोष से छुडाया गया है| (रोमियो 8:1-11)


रोमियो 8:2
2 क्‍योंकि जीवन की आत्मा की व्यवस्था ने मसीह यीशु में मुझे पाप की, और मृत्यु की व्यवस्था से स्‍वतंत्र कर दिया।

हमारा विश्वास जीवन से भरपूर है, क्योंकि यदि विश्वासी हृदयों को मसीह के लिए खोलते हैं, तो पवित्र आत्मा उनके हृदयों में उंडेल दी जाती थी| यह जीवन देनेवाली, सक्रिय पवित्र आत्मा परमेश्वर की सृजनात्मक शक्ति है यह उनमे कार्य करती है जो सूली पर प्राण देने वाले पर विश्वास करते हैं|

निर्माण के आरंभ में. दैवीय आत्मा आकारहीन सृष्टि पर मंडरा रही थी| आज, यह आशिषित आत्मा लाखों लोगों के जीवन में आशा का निर्माण करती है| हम विश्वासी के रूप में स्वयं अपने द्वारा नहीं, बल्कि उनकी देखरेख, प्रोत्साहन और धीरज द्वारा जी रहे है| जो कोई भी सहमत है और अपने हृदय को मसीह की आत्मा के कार्य के लिए खोलता है परमेश्वर की शक्ति से भर जाता है| तुम सुरक्षित और पापमुक्त अपनी स्वयं की इच्छा, विचारों, या बल, द्वारा नहीं परन्तु केवल परमेश्वर की पवित्र आत्मा द्वारा हो वह तुम्हारे विश्वास के निर्माता है, तुम्हारे प्रेम का लेखक, तुम्हारे आनंद की बहार, और तुम्हारी उदारता का स्त्रोत है| वह परमेश्वर है जो हममें कार्य करता है, दया के कार्यों के लिए हमारा अनुबोधन करता है, हममे लगातार रहता है, और प्रेम की परिपूर्णता की ओर हमें ले जाता है|

दैवीय आत्मा का यह जीवन अपरिवर्तनीय है, एक जगह बदलने वाली हवा की तरह नहीं जो प्रत्येक क्षण अपनी दिशा बदलती है, परंतु यह नियमित, सुव्यवस्थित एवं विधिसम्मत है इसलिए उपदेशक इसे “जीवन की आत्मा का कानून” कहते हैं| दूसरे शब्दों में आत्मा का कानून उन लोगों में मसीह का जीवन है जो उन पर विश्वास करता है| पवित्र एक मात्र अपने आपको उन लोगों के साथ बांधते है जो उनके नए समझौते में विश्वास करते है, और उनकी मृत्यु के द्वारा एक सच की स्थापना कर चुके है जो कि अन्तिम समय तक भी निरंतर बनी हुई है, क्योंकि उनकी ईमानदारी अनंत है| वह आत्मा जो परमेश्वर और पुत्र के हृदय से उंडेली गई, तुम तक तुम्हारी प्रार्थनाओं, उपवासों, और धार्मिकता के कारण नहीं आई, परन्तु मसीह ने सूली पर तुम्हारे लिए जो धार्मिकताएं पूरी की है, उस कारण आई है| परमेश्वर ने अनंत जीवन की स्थापना सत्य पर की है उनकी शक्ति, विस्फोटकता से या दबावपूर्वक नहीं परन्तु दयालुता, और आनंददायी आदेश में बहती है| यह ना तो रोती है, ना दहाड़ती है, परन्तु यह प्रेम करती है, और नम्रतापूर्वक व्यवहार करती है जैसे मसीह अपराधियों से प्रेम करते हैं क्योंकि वह तुममे और तुम उनमे रहते हो| इसलिए किसी अजनबी आत्मा को अपने आप में निवास करने की आज्ञा ना दे|

यह आत्मिक जीवन, जो तुम्हे दिया गया है, तुम में मसीह के अलावा किसी और या तुम्हारी अपनी सम्पति नहीं है| इसके स्थान पर यह तुम्हारे रक्षक के साथ निरंतर सम्बंध और घनिष्ठ एकता द्वारा है ताकि तुम उनके आत्मिक शरीर के सदस्य बन पाओ| यह कथन मसीह के अपमान और उनकी सूली के विरोध में ईश्वरियनिंदा की ओर संकेत करता है| हमारा प्रलोभनों के प्रति विरोध पहले की अपेक्षा अधिक हो सकता है, जैसे कि मसीह ने स्वयं अनुभव किया था| हम भी अनेक अपराधों में गिर सकते है, और अनजाने में अपराध कर सकते है| परन्तु सिद्धांत में, मसीह ने हमें अपराध की शक्ति से मुक्त किया है और परिणामस्वरूप, मृत्यु हमारे जीवन का वेतन नहीं है| इसके अतिरिक्त कानून का अर्थ हमारे लिए नर्क नहीं है, ना ही यह हमें और अधिक गलतियाँ करने के लिए अनुबोध करता है, परन्तु यह कानून हमारे हृदयों में निवास करता है ताकि हम इसमें आनंदित हो| इसलिए हम अपराध के दास नहीं है, बल्कि परमेश्वर के प्रेम की सन्तान है| हम उन दूसरे लोगों के समान बिना किसी आशा के नहीं मरते है, परन्तु जीवन की आत्मा के अनुसार हमेशा जीते हैं, जैसे मसीह अंतहीनता से जीते हैं| उपदेशीय शब्द भीतर तक चुभते हैं, जो कि अर्थों के साथ अविषित किये गए हैं कि छुडाये गए हो, बुराई से ऊपर उठो, और परमेश्वर के मार्गदर्शक आत्मा द्वारा शक्ति और अध्यादेश में जियो|

प्रार्थना: ओ प्रभु यीशु मसीह, हम आपका धन्यवाद करते है क्योंकि आप हमें मृत्यु से जीवन की ओर ले गये ताकि हम हमारे पिता के प्रेम की महिमा कर पायें और आत्मा के नियमों में चल पायें| हमें अपने अन्दर स्थापित करें कि आपका प्रेम हम में समां जाये और यह कि हम अपने आचरण में आपकी महिमा कर पायें ताकि हमारे आसपास के लोग मृत्यु नहीं जिन्दगी की गंध पा सके|

प्रश्न:

45. वो कौन से दो कानून है, जिनकी तुलना उपदेशक ने एक साथ की है, और उनके अर्थ क्या है?

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