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पत्रक - वितरण के लिये लघु बायबलसंबंधी सन्देश

पत्रक 03 -- परमेश्वर, मेरी आत्मा को आशीष दे


कुछ लोग अपने अस्तित्व को सुरक्षित रखने के लिए कड़ी मेहनत करते हैं| वे पर्याप्त धन कमाने का प्रयास करते है अपने जीवन के लिए और अपने भाग्य को आरामदायक बनाने के लिए अपने पूरे समय वे प्रयासों का बलिदान करते हैं| मरियम के पुत्र ने हमें सिखाया, “कोई भी एक साथ दो स्वामियों का सेवक नहीं हो सकता क्योंकि वह एक से घृणा करेगा और दूसरे से प्रेम| या एक के प्रति समर्पित रहेगा और दूसरे का तिरस्कार करेगा| तुम धन और परमेश्वर दोनों की एक साथ सेवा नहीं कर सकते|” (मत्ती 6:24)

दाऊद ने इस समस्या को परमेश्वर की आराधना करने के द्वारा, सुलझाने का प्रयास किया था|उन्होंने अपने आप को आदेश दिया था और उनके अंदर के सभी विचार शांत हो गये, तों वह अपना ध्यान केवल परमेश्वर पर केंद्रित कर सके| उन्होंने अन्य विचारों को स्वयं अपने को विध्न पहुँचाने की अनुमति नहीं दी, परंतु परमेश्वर की उपस्थिति में यह कहकर खड़े थे: “हे मेरी आत्मा, तू यहोवा का गुण गा! हे मेरे अंग-प्रत्यंग, उसके पवित्र नाम की प्रशंसा कर| हे मेरी आत्मा, यहोवा को धन्य कह और मत भूल कि वह सचमुच कृपालु है! उन सब पापों के लिये परमेश्वर हमको क्षमा करता है जिनको हम करते हैं| हमारी सब व्याधि को वह ठीक करता है| परमेश्वर हमारे प्राण को कब्र से बचाता है, और वह हमें प्रेम और करुणा देता है|” (भजन संहिता 103:1-4)

प्रार्थना और प्रशंसा को संकल्प और सहनशीलता की आवश्यकता है| दाऊद परमेश्वर का आदर और महिमा करना चाहते थे| पवित्र आत्मा विश्वासियों का मार्गदर्शन करता है कि वे अपने सृष्टिकर्ता की आवाज के प्रति अपने आपको खोले|

परमेश्वर का नाम पुराने नियम में 6,828 बार आया है जब कि ईश्वर शब्द केवल 2,600 बार आया है ईश्वर का नाम परमेश्वर है| यह नाम उनकी अपरिवर्तनीय विश्वसनीयता की पुष्टि करता है| वह अकेले ही सारे विश्वास और शुक्रगुजारी के अधिकारी हैं जैसा कि दाऊद ने दर्शाया था|

अब, उनके अचेतन मन से विचार और आवाजें, शांति को नकार कर, शक्ति शाली रूप से बाहर आने लगी थी| इसीलिए उपदेशक ने एक बार फिर से अपने अन्तर मन को परमेश्वर की प्रशंसा करने का आदेश दिया| उन्होने संकल्प किया था कि उनके विचार शुक्रगुजारी और प्रशंसा से भरपूर होने चाहिए| दाऊद परमेश्वर को अपनी पूरी आत्मा से प्रेम और हर प्रकार से उनका आदर करना चाहते थे| वे परमेश्वर को पवित्र कहते थे जिनमे कोई छल, चालाकी, धोखा, या कोई अपराध नहीं था| जो कोई भी परमेश्वर के निकट आता है पवित्रता की किरण उसका निरीक्षण करेंगी और उसमे भीतर तक घुस जाएंगी, जोकि उसके द्वारा किये प्रत्येक अस्वच्छ कार्य को प्रकट करती है| दाऊद जिसने इस आध्यात्मिक खोज का अनुभव किया था ने, अपने आपको पवित्र एक के सामने विनम्र किया और उनकी महिमा की थी| परमेश्वर की पवित्रता ने उनकी महिमा को ढक लिया है क्योंकि पवित्र एक अत्यधिक प्रशंसनीय है| जो कोई भी उनकी ओर मुड़ जाता है, वह उसके हृदय की गहराईयों में उसके अपराधों से मुक्त किया जायेगा|

दाऊद को स्वय की आत्मा को तीसरी बार शांत रहने का और परमेश्वर की प्रशंसा निरंतर करने का आदेश देना पड़ा ताकि उनके विचार धन संबंधी मामलों, रोजमर्रा की समस्याओं और छिपे हुए खतरों के मामलों में भ्रमित होकर या फिसल कर दूर ना चले जाये| उन्होंने केवल प्रभुओं के प्रभु और इस संसार के सर्व शक्ति मान न्यायाधीश की ओर अपना पूरा ध्यान लगाने का संकल्प किया था|

इसके बाद, पवित्र आत्मा ने दाऊद का मार्गदर्शन किया, कि उनके जीवन में परमेश्वर ने उनका पक्ष लिया, उसके लिए व धन्यवाद कर सके| हम लोग प्राकृतिक रूप से, परमेश्वर की आशीषों और हमारी प्रार्थनाओं का उत्तर देने के लिए उनका धन्यवाद करना, तुरंत ही भूल जाते है| हम में से प्रत्येक परमेश्वर के पक्षों को भूलजाने में जगत के विजेता हैं|

हम प्रत्येक पाठक को सुझाव देते है, कि परमेश्वर के बहुत से उपकारों को न भुलाने के लिए एक कागज ले और सभी लाभ जो परमेश्वर ने तुमको दिए है लिख ले| तब सभी वस्तुओं के लिए उनका धन्यवाद करें| ताज़ी हवा के लिए – बारिश, बर्फ, भोजन और कपड़ों के लिए – मातापिता, शिक्षकों, शालाओं, के लिए- अपने काम के स्थान और रहने के स्थान - तुम्हारे देश में सुरक्षा और शांति के लिए उनकी प्रशंसा करें| उनका धन्यवाद करें कि उन्होंने तुम्हे प्राकृतिक विनाशों जैसे तूफान, भूकंप और ज्वालामुखी से बचाया| उनका धन्यवाद करे कि उन्होंने तुम्हारे देश को भूख और युद्ध की वेदनाओं से बचा कर रखा| अपने दिमाग में इस बात की खोज करो कि परमेश्वर ने और कितना अधिक तुमको अपना पक्ष प्रदान किया है| उनको धन्यवाद करने में कंजूस न बनो| अपने हृदय को लगातार प्रशंसा और धन्यवाद करने के लिये तैयार करो उन सभी कारणों के लिये जिनसे तुम तुम्हारे हृदय में खुश हो और परमेश्वर का आनंद तुममें विराजमान करता रहे|

दाऊद के सभी अपराधों के लिये उनको मिला क्षमादान धन्यवाद करने के लिये सबसे अधिक महत्वपूर्ण कारण था, जो दाऊद को दैवीय आत्मा की प्रेरणा से समझ में आया था| कई लोग ऐसे जीवन जीते है जैसे वे नासमझ हैं| वे अपने अपराधों को छिपाते हैं और त्योरी चढा़कर चलते हैं| उनके उदाहरणों का अनुसरण मत करो परन्तु प्रायश्चित करो| परमेश्वर के सामने अपने सभी अपराधों को स्वीकार करो और दुबारा इन अपराधों को ना करने का निर्णय कर लो, ताकि तुम उस आनंद का अनुभव कर पाओ जो उपदेशक यूहन्ना द्वारा प्रकट किया गया| “यदि हम कहते हैं कि हममें कोई पाप नहीं है तो हम स्वयं अपने आपको छल रहे हैं और हममें सच्चाई नहीं है| यदि हम अपने पापों को स्वीकार कर लेते हैं तों हमारे पापों को क्षमा करने के लिये परमेश्वर विश्वसनीय है और न्यायपूर्ण है समुचित है| तथा वह सभी पापों से हमें शुद्ध करता है|”(1 यूहन्ना 1:8-9)

दाऊद ने परमेश्वर के अनुग्रह का अनुभव किया था, जिसने उनके सभी अपराधों को क्षमा किया था| इसलिए उन्होंने अपनी आत्मा को आदेश दिया था कि वह परमेश्वर का धन्यवाद करे उन सभी क्षमादानो के लिये जो ईश्वर उनको प्रायः ही प्रदान करते थे| उपदेशक ने अनुभव किया था कि एक मात्र पवित्र ने उनको क्षमा किया और वास्तव में उनके सभी अपराधों को क्षमा कर दिया था| हम ऐसा व्यापक अनुग्रह किसी और धर्म ने नहीं पाते हैं| हम ‘शायद’ या ‘हो सकता है’ जैसे शब्द तोहरा और सुसमाचार में नहीं पाते, क्योंकि परमेश्वर हमारे अपराधों एक भाग को ही क्षमा करे और दूसरे को नहीं, ऐसा नहीं होता, परन्तु वे हमें पूर्णरूप से स्वच्छ करते हैं, हमें पूर्णरूप से न्यायोचित ठहराते है, और उनका अनुग्रह हमें बिना किसी मूल्य के, उनके महान प्रेम में से देते हैं| जबसे यीशु ने हमारे स्थान पर स्वयं अपनी मृत्यु स्वीकार करने के द्वारा, इस जगत के अपराधों के लिये प्रायश्चित किया, हम निश्चित रूप से जान गये कि, “क्योंकि उसने एक ही बलिदान के द्वारा, जो पवित्र किये जा रहे हैं, उन्हें सदा-सर्वदा के लिए सम्पूर्ण सिद्ध कर दिया|” (इब्रानियों 10:14)

यद्यपि, परमेश्वर ने घोषित किया था कि जो कोई भी अपने अपराधों के लिये क्षमा प्राप्त करता है, ने अपने शत्रुओं को क्षमा कर देना चाहिए, जैसे प्रभु ने तुम को क्षमा किया था (मत्ती 6:12) | क्या तुम्हारे कई शत्रु हैं? क्या तुम किसी ऐसे व्यक्ति के साथ रहते हो जिसके साथ तुम्हारा मेल नहीं है? उसको अभी पूर्णरूप से क्षमा करो, नहीं तों तुम्हे तुम्हारे अपराधों के लिए परमेश्वर से अनुग्रहित क्षमा नहीं मिलेगी| अपने प्रभु से विनती करो कि अपनी शक्ति के साथ तुम्हारी मदद करे ताकि तुम अपने शत्रु को, उन्होंने जो भी गलत तुम्हारे साथ किया है, के लिये वास्तव में क्षमा कर पाओ जैसे सृष्टिकर्ता तुमको पहले ही क्षमा कर चुके हैं| (मत्ती 6 : 14 )

पवित्र आत्मा ने उपदेशक दाऊद का मार्गदर्शन किया था कि उनके सभी अपराधों के लिये क्षमा के बाद, उनके लिये परमेश्वर का दूसरा महत्वपूर्ण उपहार उनका स्वास्थ्य था| दाऊद को यह समझ आया था कि उन्हें इसके लिये धन्यवाद करना चाहिए| प्रायः ही हम सर्दी, छोटे घावों या लंबी बिमारियों से ग्रसित हो जाते हैं, तब परमेश्वर अपनी दया में हमें चंगा कर देते है| केवल चिकित्सीय विश्लेषण और महंगी औषधियाँ ही चंगाई में सहायता नहीं करती हैं| इसका श्रेय वापस सर्वशक्तिमान को ही जाता है| परमेश्वर ने हमें विश्वास दिलाया है, “मैं ही वह हूँ जो तुम्हें स्वस्थ बनाता है|” (निर्गमन 15:26)

मरियम के पुत्र ने इस वादे को पूरा किया| उन्होंने उन सभी बीमारों को जो उनके पास आये चंगा किया , और जिनमे बुरी आत्माओं का वास था उससे उन लोगों को छुडाया| चंगा करने वाले परमेश्वर चिकित्सकों और औषधियों का उपयोंग करते हैं, परंतु पूर्णतः चंगाई केवल उनके द्वारा ही आती है| तों फिर उनको तुम्हारा धन्यवाद कहाँ है? अपने सृष्टिकर्ता को पूरे हृदय से धन्यवाद करना ना भूले, क्योंकि वही एक है जो तुम्हे स्वास्थ्य और चंगाई प्रदान करते हैं|

राजा दाऊद ईश्वर का भय मानने वाले मनुष्य थे| वे जानते थे कि एक दिन वह भी हुआ होगा, जब उनको उनके परमेश्वर का सामना करना पड़ा होगा| फिर भी परमेश्वर ने उनको प्रकट किया था कि उन्होंने उनको उनकी कब्र से छुटकारा दिलाया था, उनकी धार्मिकता के कारण नहीं बल्कि इसलिए कि दाऊद अपने न्यायी परमेश्वर में विश्वास करते थे| जो कोई भी विश्वास करता है कि, यीशु को ना मृत्यु का भय ना कब्र के दण्ड का भय है, जैसा मरियम के पुत्र ने हमें पुष्टि दी है, “यीशु ने उससे कहा, ‘मैं ही पुनरुत्थान हूँ और मैं ही जीवन हूँ| वह जो मुझमे विश्वास करता है जियेगा| और हर वह, जो जीवित है और मुझमे विश्वास रखता है, कभी नहीं मरेगा| क्या तु यह विश्वास रखती है’|” (यूहन्ना 11:25-26)

मरियम के पुत्र मृत्यु को हराने के बाद अपनी कब्र में से जी उठे थे| उन्होंने शैतान पर विजय पाई और अपने अनन्त जीवन की वास्तविकता को सिद्ध किया| वे उन सभी की जो उनका अनुकरण करते हैं, की सहायता करते हैं, उनके हाथ अपने हाथ में लेकर उनके साथ मृत्यु के द्वार से निकल कर अपने अनंत जीवन में ले जाते हैं|

परमेश्वर की आत्मा ने राजा दाऊद को जानकारी दी थी कि हीरो से जड़ा सोने का मुकुट इस संसार की बहुमूल्य वस्तु नहीं है| परमेश्वर के कई मुकुट है जो हमेशा चमकते हैं| वह जिसे परमेश्वर की दया प्राप्त है और उसे दीनों और बीमारों को देता है, जात बाहर, घृणितों और अजनबियों की आवश्यकताओं को पूरा करता, और अवश्य ही उनकी मदद करता है, परमेश्वर के द्वारा उसे आध्यात्मिक मुकुट प्रदान किया जायेगा| क्या तुमने दया और करुणा के मुकुट को अपने प्रभु से प्राप्त किया है जो इसे अपने दयालु सेवको को देते हैं? क्या तुम्हारा हृदय अब तक पत्थर के समान कठोर है? या यह पिघल गया है इसलिए तुम दुखिओं के साथ दुखी और रोनेवालों के साथ रोते हो? लगातार दयावान रहने के लिये यीशु तुम्हारा मार्गदर्शन करते है, न केवल तुम्हारे पडोसिओं एवं मित्रों के बीच, बल्कि उनके बीच भी जो पथभ्रष्ट हुए जा रहे है और अविश्वासियों में भी जिनके पास न इस जीवन में न इसके बाद कोई आशा है| उन लोगों को देखो और उनके मुर्झाये चेहरों को देखकर परेशान न हो, परन्तु उनके लिये प्रार्थना करो और उनके लिये सोचो ताकि परमेश्वर तुम्हे ईमानदारी और गंभीरता पूर्वक उनकी सेवा करने के लिये, उनके पास भेज सके|

यहाँ पर अनजाने और साधारण ह्रदयवाले कई संत उनके मस्तकों पर अदृश्य मुकुटों के साथ हैं| उनके हृदयों में दुखियों और दरिद्रों के लिये दया थी, वे उनके लिये प्रार्थना करते थे, उनकी मदद और उनके लिये बलिदान करते थे, ठीक उसी प्रकार से जैसे उनके प्रभु ने उनके लिये किया था| उन्होंने स्वीकार किया था “तुम्हें मनुष्य के पुत्र जैसा ही होना चाहिये जो सेवा कराने नहीं, बल्कि सेवा करने और बहुतों के छुटकारे के लिये अपने प्राणों की फिरौती देने आया है” (मत्ती 20:28)| यीशु हमारा मार्ग और हमारे लिये एक उदाहरण है जो हमें शक्ति और साहस देते है कि हम आनंदपूर्वक उनकी सेवा करें|

प्रिय पाठकों :
क्या तुम धन और ऊँचा स्तर ढूँढते हो, जिसने तुम्हारे ह्रदय को पत्थर बना दिया है? या यीशु की आत्मा ने तुम्हारे दिमाग में परिवर्तन कर दिया है जिससे तुम कृतज्ञ और करुणामयी बन गये हो, एक अदृश्य मुकुट को अपने मस्तक पर लेकर चल रहे हो? भजन संहिता 103 को पाठ कर लो| अपने आप को धन्यवाद करने के लिये अभ्यस्त करलो ताकि तुम, यीशु में परमेश्वर के प्रेम के अवतार, जिसने अपनी दया में तुम्हारे स्वरुप को बदल दिया, को पहचान सको| अपने आप को कृतज्ञता और स्तुति के साथ अलंकृत कर लो|

आपके निवेदन पर हम यीशु का सुसमाचार प्रार्थनाओं और ध्यान-मनन के साथ आपको बिना किसी मूल्य के भेजने को तैयार है| जो आपको, आपके पूरे ह्रदय के साथ प्रशंसा और धन्यवाद करने के लिये सहायता कर सकते हैं|

परमेश्वर की प्रशंसा और सेवा करने के लिये अन्य लोगो को उत्साहित करें: यदि तुम्हे लगता है कि यह पर्चा मददगार है, इसे अन्य लोगो से छिपा कर न रखे, ताकि वे भी परमेश्वर सेवक बन पाये| हमें लिखिए और हम आपको कुछ ऐसे पर्चे भेजेंगे जिसे आप वितरित कर सकें|

हम आपके पत्र की प्रतीक्षा में है, आपके लिये प्रार्थना करते हैं और हमें अपनी प्रार्थनाओं में स्मरण रखने के लिये आपसे निवेदन करते हैं| अपना पूरा पता साफ़ साफ़ लिखा न भूलें|

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