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पत्रक - वितरण के लिये लघु बायबलसंबंधी सन्देश

पत्रक 09 -- तुम्हे यहोवा, अपने परमेश्वर से अपने सम्पूर्ण हृदय, आत्मा और शक्ति से प्रेम करना चाहिए| (व्यवस्था विवरण 6:5, मत्ती 22:37)


लोग अपने जीवन में पसीने में लथपथ, जीतोड़ मेहनत करके रोटी कमाते है (उत्पति 3:19)| वे पैदा करते है और आनंद एवं शांति ढूंढते हैं| यद्यपि वे परमेश्वर के बारे में कुछ ध्यान नहीं देते; उनकी दिनचर्या में परमेश्वर का कोई स्थान नहीं है|

कुछ व्यक्ति सर्वशक्तिमान सृष्टिकर्ता से डरते हैं| वे अपने बुरे कार्यों के लिए दुखी हैं, एकमात्र पवित्र के क्रोध से डरते हैं, और न्याय के दिन से डरते हैं| वे प्रार्थना, उपवास, भिक्षादान करते है धार्मिक यात्रा पर जाते हैं, और अल्लाह के लिए लड़ाई करके उन्हें संतुष्ट करना चाहते हैं| वे अब तक यह समझ नहीं सके थे कि उनके अच्छे कार्य उनको नर्क से बचाने के लिए पर्याप्त नहीं है| परमेश्वर एक ही है, यहाँ तक कि दुष्टात्मा भी इसमें विश्वास रखते है और कांपते हैं (याकूब 2:19)|

सत्य की खोज करने वाले थोड़े से ही लोग है जो सूर्यमुखी के समान प्रतीत होते हैं, जो कि धीरे धीरे चारो ओर सुबह से रात तक सूरज के आमने सामने रहने के लिए घूमते है, ताकि सूरज की किरणों को आत्मसात करे और पककर विकसित हो जाये और अधिक “फल” लायें| जो कोई भी बिना देर करे अपने परमेश्वर की ओर मुड़ता है, उनके प्रेम की किरणों को आत्मसात करता है और उनसे आध्यात्मिक शक्ति इकठ्ठा करता है, अनंत फल लायेगा|

किस प्रकार के मनुष्य हो तुम? एक दिन में तुम कितने समय के लिए तुम्हारे परमेश्वर के बारे में सोचते हो और वास्तव में उनकी सेवा करते हो? याद रहे दैवीय प्रेम के वारे में क्या लिखा था:

“यदि मै मनुष्यों और स्वर्गदूतों की भाषाएँ तों बोल सकूँ किन्तु मुझमे प्रेम न हो, तों मै एक बजता हुआ घडियाल या झंकारती हुई झांझ मात्र हूँ| यदि मुझमे परमेश्वर की ओर से बोलने की शक्ति हो और मै परमेश्वर के सभी रहस्यों को जानता हूँ तथा समूचा दिव्य ज्ञान भी मेरे पास हो और इतना विश्वास भी मुझमे हो कि पहाड़ों को अपने स्थान से सरका सकूँ, किन्तु मुझमे प्रेम न हो” (1 कुरिन्थियों 13:1-2)|

पुराने नियम में सबसे महत्वपूर्ण आयत है तुम अपने यहोवा अपने परमेश्वर से, अपने पूरे हृदय, आत्मा और अपनी पूरी शक्ति के साथ प्रेम करना| हमें अपने आपको परखना होगा: क्या सचमुच हम परमेश्वर से प्रेम करते हैं? क्या हम उनसे अपनी पूर्णता के साथ, अपने पूरी आत्मा के साथ और अपनी पूरी शक्ति के साथ प्रेम करते है?

वह जो इस आयत पर ध्यान मनन करता है और ईमानदार है, टूट जायेगा और अपने आप को विनम्र बनायेगा, क्योंकि वह यह अनुभूति कर पायेगा कि परमेश्वर के लिए उसका प्रेम कम है, और वह अपनी गलती स्वीकार करेगा, “मै उनसे मेरे पूरे हृदय, आत्मा और शक्ति के साथ प्रेम नहीं करता! मेरा दिमाग और संवेदना पूरी तरह से परमेश्वर के साथ निवास नहीं करती है| मेरा हृदय केवल परमेश्वर के लिए ही नहीं धड़कता है, मेरा अचेतन मन परमेश्वर के प्रेम से भरा हुआ नहीं है और मेरा अन्तर्मन केवल सृष्टिकर्ता की ओर निर्देशित नहीं है| मै एकमात्र पवित्र सर्वशक्तिमान से प्रेम करता हूँ, परंतु मै पूरी तरह से उनसे प्रेम नहीं करता हूँ क्योंकि मै अपना बहुतसा समय, शक्ति और पैसा इस दुनिया की नाशवान वस्तुओं पर बरबाद करता हूँ|

सर्वशक्तिमान हमारे लिए प्रतिज्ञा करते हैं कि हम प्रायश्चित और आंसुओं एवं श्रध्दा के साथ अपनी गलती को स्वीकार करें कि वास्तव में हम स्वयं ही वह प्रतिमा है जिसकी हम स्तुति करते हैं, क्योंकि हम अपने आपको ही पूरा हृदय और शक्ति के साथ प्रेम करते हैं| हम पूरी तरह से अपने ईश्वर से प्रेम नहीं करते, जहां से सारी आशीषें आती हैं| यह हमारा मूल अपराध है|

हम परमेश्वर के क्रोध के अधिकारी हैं| हमारा दण्ड मृत्यु और नर्क होना चाहिए क्योंकि परमेश्वर हमारे जीवन में प्रथम और अन्तिम नहीं है| यदि हम गंभीरतापूर्वक पश्चाताप नहीं करते हम अभी और हमेशा के लिए भटक जायेंगे|

सृष्टिकर्ता हमें समझते है और जानते हैं कि हम सब अपराधी है| इस वास्तविकता के बावजूद, वह हमें प्रेम करते हैं और हमें छोड़ नहीं दिया है, क्योंकि उन्होंने मरियम के पुत्र को हमें परमेश्वर के प्रति एवं मनुष्यों के प्रति सच्चा प्रेम दर्शाने के लिए भेजा| मसीह, सबसे अधिक महत्वपूर्ण आयत को परिपूर्णता एवं गंभीरता से निभाते हुए जिये हैं| उन्होंने प्रार्थना की थी और अपने अनुयायियों को प्रभु की प्रार्थना कराना सिखाया था:

प्रार्थना: “स्वर्ग धाम में हमारे पिता, पवित्र रहे तव नाम| जग में तेरा राज्य आवे| जो चाहे तू पूरा हो सब वैसे ही धरती पर, जैसे वह सदा स्वर्ग में पूरा होता रहता है| दिन प्रतिदिन का आहार तू आज हम दे, अपराधों को क्षमा दान कर जैसे हमने अपने अपराधी क्षमा किये| भारी कठिन परीक्षा मत ले हमें उससे बचा जो वुरा है| क्योंकि राज्य और महिमा सदा तेरे है| आमीन|” (मत्ती 6:9-13)

मसीह ने स्वयं को सम्मान नहीं दिया, परंतु अपने आध्यत्मिक पिता जो स्वर्ग में है, की महिमा की थी और स्वीकार किया था, “मेरा भोजन उसकी इच्छा को पूरा करना है जिसने मुझे भेजा है| और उस काम को पूरा करना है जो मुझे सौंपा गया है|” (यूहन्ना 4:34)

ऐसा करने में, मसीह ने परमेश्वर के लिए अपने सच्चे और परिपूर्ण प्रेम की साक्षी दी थी| मरियम के पुत्र, ना एक सूफी थे ना ही एक तपस्वी थे, क्योंकि परमेश्वर के प्रति उनका प्रेम वास्तविक था और मनुष्यों के लिए उनके प्रेम ने उसे प्रभावी बना दिया था| वे शहरों और गावों पैदल गये, प्रत्येक व्यक्ति के सामने परमेश्वर के पितृत्व की घोषणा की बीमारों को चंगाई प्रदान की, अस्वच्छ आत्माओं को दुष्टआत्माओं से छुडाया, मृतको को जीवन दिया, जगत के अपराधों को दूर ले गये और राज्यों के लिए क्षतिपूर्ति प्रदान करके परमेश्वर से उनकी संधि कराई थी| मसीह ने हमें हमारे अपराधों से उनके अनूठे प्रायश्चित से स्वच्छ किया| उन्होंने परमेश्वर के न्याय को हमारे लिए स्थानापन्न के समान सहन किया था, तों जो कोई भी उनपर विश्वास करता और अपने आपको उनको सौंप देता है अनंत जीवन प्राप्त करेगा| मसीह परमेश्वर के प्रेम के अवतार बन गये थे| वह हमें अपनी दया में बदल देना चाहते है ताकि हम दयावान परमेश्वर के समान दयावान बन जायें|

अपने अनुयायियों को अपराधों से न्यायोचित करने के लिए, मसीह ने अपनी पवित्र आत्मा उन पर उंडेल दी है जो प्रार्थना करते हैं और उनके अनुग्रह की शक्ति की प्रतीक्षा करते है| यह अच्छी आत्मा स्वयं परमेश्वर का प्रेम है जैसाकि उपदेशक पौलुस ने लिखा था, “पवित्र आत्मा के द्वारा, जो हमें दिया गया है, परमेश्वर का प्रेम हमारे हृदय में उंडेल दिया गया है|” (रोमियों 5:5)

यह आत्मा हमें दैवीय मार्ग दर्शन और रोशनी देता है कि हम परमेश्वर से अपने पूरे हृदय, अपनी पूरी आत्मा और अपनी पूरी शक्ति के साथ प्रेम कर सके, और आनंद एवं हर्ष के साथ उनकी सेवा कर सके| यह आत्मा हमारा मार्गदर्शन करती है, कि हम ऐसा जीवन जियें जैसा मसीह ने जिया था और उनसे अन्य लोगों के लिए प्रार्थना करें परमेश्वर हमें ऐसे नियमों का अनुसरण करने के लिए आदेश नहीं देते जो लागू न हो सके; वह हमे मार्गदर्शन और शक्ति देते है कि हम ऐसा जीवन जियें जो उनको प्रसन्न करे|

प्रिय पाठकों,
उन सभी वचनों को जो मोटे अक्षरों में है पाठ करें, क्योंकि वे पवित्र बाईबिल से है| तुम उनसे वह शक्ति प्राप्त कर सकते हो जिससे तुम पूरे हृदय और मन से परमेश्वर से प्रेम करो| परमेश्वर से प्रार्थना करो कि वह अपने प्रेम की आत्मा को तुम्हारे हृदय में उंडेल दे|


क्या तुम परमेश्वर के नियमों एवं वादों के बारे में और अधिक पढ़ना चाहोगे”?

हम तुमको, तुम्हारी विनती पर मसीह के सुसमाचार, ध्यान मनन और प्रार्थनाओं के साथ भेजने को तैयार है| तुम इसमें पाँच सौ से अधिक दैवीय नियमों को पाओगे और, यदि तुम परमेश्वर की आत्मा से सहायता की इच्छा रखते हो, वह तुम्हे आध्यात्मिक शक्ति देंगे कि तुम उन्हें आत्मसात कर पाओगे|


तुम्हारे मित्रों को परमेश्वर और मनुष्यों से प्रेम करने के लिए प्रोत्साहित करो|

इस पर्चे को अपने पड़ोसियों और मित्रों को देकर परमेश्वर के प्रेम के बारे में शुभ समाचार प्रदान करो| यदि तुम हमें बताओ कि वास्तव में तुम कितनी प्रतियां बाँट सकते हो तों हमें एक सीमित संख्या में इन प्रतियों को बिना किसी शुल्क के भेजने में हर्ष होगा|

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